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MP ; मानसून 21–23 जून के बीच पहुंचने की उम्मीद, खरीफ बुवाई पर असर की आशंका

Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department) के अनुसार, मानसून अब 21 से 23 जून के बीच मध्य प्रदेश में प्रवेश कर सकता है। मौसम विभाग ने बताया कि वर्तमान में मानसून तेलंगाना के भद्राचलम के पास रुका हुआ है, जिसके कारण मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में इसके आगे बढ़ने में देरी हो रही है।
मानसून की इस देरी का सीधा असर खरीफ सीजन की कृषि गतिविधियों पर देखा जा रहा है। खेतों में बुवाई का काम अपेक्षित गति से नहीं हो पा रहा है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर बारिश नहीं होने से फसल चक्र प्रभावित हो सकता है।
वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक S.S. Dhakad ने बताया कि सोयाबीन, उड़द, मूंग और अरहर जैसी प्रमुख खरीफ फसलों की सही बुवाई के लिए लगभग 100 मिलीमीटर (करीब 4 इंच) बारिश आवश्यक होती है। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि वे पर्याप्त बारिश का इंतजार करें और बुवाई से पहले बीजों का उचित उपचार अवश्य करें, ताकि अंकुरण बेहतर हो सके और फसल को नुकसान से बचाया जा सके।
इस बीच, राज्य में मंगलवार को प्री-मानसून गतिविधियां सक्रिय रहीं। कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई, जिससे तापमान में थोड़ी राहत मिली है और मौसम कुछ हद तक सुहावना हुआ है।
सीधी जिले में सबसे अधिक बारिश दर्ज की गई, जहां करीब 1 इंच वर्षा हुई। इसके अलावा बैतूल, रीवा और सतना जिलों में भी आधा इंच या उससे अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई। वहीं रायसेन, छिंदवाड़ा, ग्वालियर और सागर जिलों में भी बारिश के साथ तेज हवाएं चलीं, जिससे मौसम में बदलाव महसूस किया गया।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि प्री-मानसून बारिश भले ही कुछ राहत दे रही हो, लेकिन स्थायी कृषि गतिविधियों के लिए नियमित मानसूनी बारिश का इंतजार करना जरूरी है। यदि मानसून तय समय के अनुसार आगे बढ़ता है, तो अगले कुछ दिनों में मध्य प्रदेश में कृषि कार्यों में तेजी आने की संभावना है।
कृषि विभाग भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है और किसानों को समय-समय पर सलाह जारी कर रहा है ताकि मौसम के अनुसार फसल योजना बनाई जा सके।
कुल मिलाकर, मानसून की देरी ने जहां किसानों की चिंता बढ़ा दी है, वहीं प्री-मानसून बारिश से कुछ जिलों में अस्थायी राहत जरूर मिली है।





