मध्य प्रदेश

MP ; इंद्रजीत गुंडिया ने मछली पालन से हासिल की सफलता, सरकारी योजना बनी सहारा

Kavita2
30 May 2026 11:16 AM IST
MP ; इंद्रजीत गुंडिया ने मछली पालन से हासिल की सफलता, सरकारी योजना बनी सहारा
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Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : मेघनगर ब्लॉक के मदरानी गांव के 35 वर्षीय इंद्रजीत गुंडिया ने शहर की नौकरी छोड़कर आत्मनिर्भरता का रास्ता चुना और आज वे जिले के सफल मछली पालकों में गिने जा रहे हैं। उनकी यह सफलता प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मिली सहायता का परिणाम है, जो अब स्थानीय युवाओं और किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है।

इंद्रजीत ने इंदौर से बीएससी की पढ़ाई पूरी करने के बाद शहर में नौकरी करने के बजाय अपने गांव लौटने का निर्णय लिया। उन्होंने पारंपरिक रोजगार के बजाय एक्वाकल्चर यानी मछली पालन के क्षेत्र में अवसर तलाशने शुरू किए और धीरे-धीरे इसे अपने करियर का आधार बना लिया।

सरकारी योजना के सहयोग से उन्होंने वर्ष 2024-25 में अपनी पुश्तैनी जमीन पर 0.5 हेक्टेयर का तालाब विकसित किया। इस कार्य के लिए उन्हें प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत तकनीकी और आर्थिक सहायता भी प्राप्त हुई, जिससे उन्हें आधुनिक तरीके से मछली पालन शुरू करने में मदद मिली।

इसके बाद वर्ष 2025-26 में उन्होंने 5,000 फिंगरलिंग्स (मछली के छोटे बच्चे) डालकर वैज्ञानिक तरीके से मछली पालन की शुरुआत की। उन्होंने आधुनिक तकनीक, उचित देखभाल और संतुलित आहार प्रबंधन को अपनाकर उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया।

इंद्रजीत गुंडिया का कहना है कि यदि सही जानकारी और सरकारी सहायता मिल जाए तो ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्वरोजगार के बड़े अवसर मौजूद हैं। उनका मानना है कि मछली पालन एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें कम लागत में अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है और यह ग्रामीण युवाओं के लिए एक बेहतर विकल्प बन सकता है।

उनकी सफलता ने गांव के अन्य युवाओं और किसानों को भी इस दिशा में प्रेरित किया है। अब कई लोग मछली पालन को एक स्थायी और लाभकारी व्यवसाय के रूप में देखने लगे हैं।

स्थानीय प्रशासन के अनुसार, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाना और किसानों की आय में वृद्धि करना है। इंद्रजीत जैसे लाभार्थी इस योजना की सफलता का उदाहरण हैं।

आज इंद्रजीत गुंडिया न केवल एक सफल उद्यमी बन चुके हैं, बल्कि अपने अनुभवों के जरिए अन्य किसानों को भी प्रशिक्षण और मार्गदर्शन दे रहे हैं। उनकी कहानी यह दिखाती है कि सही योजना और मेहनत के साथ ग्रामीण क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव संभव है।

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