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Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : कुक्षी में गुरुवार को धार्मिक आस्था और उत्साह के बीच नए जैन मंदिर में भगवान श्री शांतिनाथ की मुख्य प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न की गई। यह आयोजन ‘श्री शांतिजिन प्रतिष्ठा-सह-अंजनशलाका महामहोत्सव’ के अंतर्गत वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक धार्मिक विधियों के साथ भव्य रूप से आयोजित किया गया।
पूरे कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। धार्मिक वातावरण में मंत्रों की गूंज और भक्ति भाव ने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया। इस अवसर पर कई धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए गए, जिसमें मुख्य रूप से भगवान श्री शांतिनाथ की प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा शामिल रही।
इस कार्यक्रम के प्रतिष्ठाचार्य गच्छाधिपति हृदय सम्राट श्रीमद् नित्यसेन सूरी महाराज रहे, जिन्होंने वैदिक विधि-विधान के अनुसार मुख्य प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा कराई। इसके साथ ही उन्होंने मंदिर के शिखर पर धर्मध्वजा भी फहराई। ध्वजारोहण समारोह में तिलक चंद रूपचंद चौधरी परिवार मुख्य यजमान के रूप में उपस्थित रहा और धार्मिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई।
इस भव्य आयोजन में केवल भगवान श्री शांतिनाथ की प्रतिमा ही नहीं, बल्कि अन्य कई तीर्थंकरों, देवी-देवताओं, गणधरों और गुरु भगवंतों की प्रतिमाओं की भी प्राण-प्रतिष्ठा की गई। इन प्रतिमाओं की स्थापना के लिए विभिन्न परिवारों ने सहयोग दिया और अलग-अलग प्रतिमाओं के निर्माण एवं प्रतिष्ठा का खर्च वहन किया।
कार्यक्रम के दौरान पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल रहा। सुबह से ही श्रद्धालु मंदिर परिसर में पहुंचने लगे थे और धार्मिक क्रियाओं में भाग ले रहे थे। मंत्रोच्चार और धार्मिक विधियों के बीच वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक हो गया था।
इस अवसर पर कचहरी चौक से एक भव्य वरघोड़ा (धार्मिक जुलूस) भी निकाला गया। यह जुलूस शहर के विभिन्न जैन मंदिरों से होकर गुजरते हुए नव-निर्मित मंदिर तक पहुंचा। वरघोड़े में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए, जिन्होंने भक्ति गीतों और धार्मिक नारों के साथ यात्रा को और भी भव्य बना दिया।
जुलूस के दौरान श्रद्धालुओं ने पारंपरिक परिधान पहनकर धार्मिक उत्साह का प्रदर्शन किया। ढोल-नगाड़ों और भक्ति संगीत के साथ पूरा शहर धार्मिक रंग में रंग गया। जगह-जगह लोगों ने वरघोड़े का स्वागत किया और पुष्पवर्षा कर श्रद्धालुओं का अभिनंदन किया।
मंदिर परिसर में प्राण-प्रतिष्ठा के बाद विशेष पूजा-अर्चना और आरती का आयोजन भी किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान श्री शांतिनाथ के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरे आयोजन में अनुशासन और धार्मिक मर्यादाओं का विशेष ध्यान रखा गया।
आयोजकों के अनुसार यह महामहोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज में एकता, शांति और आध्यात्मिकता का संदेश देने वाला अवसर है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन से धार्मिक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिलती है।
इस पूरे कार्यक्रम में स्थानीय जैन समाज के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। आयोजन समिति ने सभी व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए विशेष प्रबंधन किया था, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
कुक्षी में आयोजित यह भव्य प्राण-प्रतिष्ठा समारोह क्षेत्र में धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बनकर सामने आया है। श्रद्धालुओं ने इसे एक ऐतिहासिक और अविस्मरणीय आयोजन बताया, जिसने पूरे शहर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।





