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MP बोर्ड की नई मैथ नीति से इंदौर में हलचल, स्टैंडर्ड और बेसिक गणित को लेकर बढ़ी चर्चा

Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : मध्य प्रदेश बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (MPBSE) द्वारा गणित विषय को लेकर जारी नई गाइडलाइंस के बाद इंदौर के स्कूलों में हलचल देखने को मिल रही है। बोर्ड ने मैथेमेटिक्स को दो स्तरों—स्टैंडर्ड और बेसिक—में विभाजित करने की व्यवस्था को और स्पष्ट करते हुए नई निर्देश जारी किए हैं। इस कदम को छात्रों के लिए अधिक शैक्षणिक लचीलापन देने वाला बताया जा रहा है, लेकिन इसे लेकर शिक्षक, अभिभावक और छात्र समुदाय में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
नई व्यवस्था के तहत मैथेमेटिक्स स्टैंडर्ड उन छात्रों के लिए है जो आगे चलकर उच्च कक्षाओं में गणित विषय को जारी रखना चाहते हैं, जबकि मैथेमेटिक्स बेसिक उन छात्रों के लिए रखा गया है जो विषय में कम दबाव चाहते हैं या भविष्य में इसे छोड़ना चाहते हैं। हालांकि यह व्यवस्था पहले से ही मौजूद थी, लेकिन नए निर्देशों ने इसे अधिक स्पष्ट और संरचित बना दिया है, जिससे अब स्कूलों में इस पर अधिक गंभीरता से चर्चा हो रही है।
इंदौर के कई निजी स्कूलों में अभिभावकों की ओर से पूछताछ बढ़ गई है कि उनके बच्चों के लिए कौन सा विकल्प बेहतर रहेगा। इस विषय पर गणित शिक्षक पंकज मिश्रा ने बताया कि अभिभावक यह जानना चाहते हैं कि कौन सा स्तर उनके बच्चों के लिए सुरक्षित विकल्प होगा। उन्होंने कहा कि यह निर्णय केवल कठिनाई या सरलता पर आधारित नहीं होना चाहिए, बल्कि बच्चे के भविष्य की शैक्षणिक दिशा को ध्यान में रखकर लिया जाना चाहिए।
नई गाइडलाइन में यह भी प्रावधान है कि कुछ शर्तों के आधार पर छात्र बेसिक से स्टैंडर्ड गणित में स्थानांतरण कर सकते हैं। इस नियम को लेकर भी स्कूलों में मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ शिक्षकों का मानना है कि इससे छात्रों को बेहतर अवसर मिलेगा, जबकि कुछ इसे चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया बता रहे हैं।
एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स (MP बोर्ड) के पैट्रन गोपाल सोनी ने इस नीति का समर्थन करते हुए कहा कि यह कदम छात्रों को राहत देने वाला है, क्योंकि इससे उन्हें अपनी क्षमता के अनुसार विषय चुनने का विकल्प मिलता है। हालांकि उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर स्कूलों में उचित ब्रिज कोर्स और तैयारी प्रणाली नहीं बनाई गई, तो बेसिक से स्टैंडर्ड में बदलाव छात्रों के लिए तनावपूर्ण हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीति शिक्षा प्रणाली में लचीलापन लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसके सफल क्रियान्वयन के लिए स्कूलों और शिक्षकों को अधिक तैयारी करनी होगी। इंदौर जैसे शहरी क्षेत्रों में इस नीति पर तेजी से चर्चा हो रही है और आने वाले समय में इसके प्रभाव और स्पष्ट होंगे।
फिलहाल, छात्र और अभिभावक दोनों ही यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि यह नया ढांचा उनके शैक्षणिक भविष्य पर किस तरह असर डालेगा।





