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MP ; कान्हा टाइगर रिज़र्व में फिर बाघ की मौत, जांच में जुटा वन विभाग

Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिज़र्व में मंगलवार सुबह एक और बाघ मृत अवस्था में पाया गया। यह घटना उस गंभीर स्थिति के कुछ ही दिनों बाद सामने आई है जब एक बाघिन और उसके चार शावकों की कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) से मौत हो चुकी थी। लगातार हो रही इन मौतों ने वन विभाग और विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है।
जानकारी के अनुसार, मृत बाघ की उम्र लगभग पाँच से छह वर्ष बताई जा रही है। उसका शव मुक्की सर्कल के मोहगाँव बीट क्षेत्र में पाया गया। प्रारंभिक जांच में उसके शरीर पर चोट के निशान मिले हैं और साथ ही फेफड़ों में संक्रमण की पुष्टि भी हुई है।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बाघ के शरीर के महत्वपूर्ण अंग—जैसे दांत, पंजे और मूंछें—सुरक्षित पाए गए हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि शिकार या तस्करी की संभावना फिलहाल कम है। हालांकि, मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी।
पोस्टमॉर्टम के बाद नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) के प्रोटोकॉल के अनुसार बाघ के शव का दाह संस्कार किया गया।
सूत्रों के अनुसार, कुछ दिन पहले वन अधिकारियों को सूचना मिली थी कि एक बाघ घायल अवस्था में देखा गया है और वह बीमार प्रतीत हो रहा है। इसके बाद तत्काल इलाके में तलाशी अभियान शुरू किया गया और पूरे क्षेत्र को घेर लिया गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जांच के लिए डॉग स्क्वॉड को भी मौके पर बुलाया गया।
लगातार सामने आ रही बाघों की मौतों ने रिज़र्व की सुरक्षा व्यवस्था और वन्यजीव स्वास्थ्य प्रबंधन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कैनाइन डिस्टेंपर वायरस जैसी बीमारियों पर नियंत्रण और निगरानी को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
वन विभाग ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है और आसपास के इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है।
कुल मिलाकर, कान्हा टाइगर रिज़र्व में हुई इस ताजा घटना ने वन्यजीव संरक्षण को लेकर गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है।





