मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश में मानसून की बेरुखी, बारिश की कमी 18% तक पहुंची

Kavita2
5 Aug 2026 10:15 AM IST
मध्य प्रदेश में मानसून की बेरुखी, बारिश की कमी 18% तक पहुंची
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भोपाल। मध्य प्रदेश में इस बार मानसून की रफ्तार धीमी बनी हुई है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में बारिश की कुल कमी बढ़कर 18 प्रतिशत तक पहुंच गई है। मानसून सीजन में अब तक प्रदेश में सामान्य से करीब 3.5 इंच कम बारिश दर्ज की गई है। कम बारिश के कारण कई जिलों में किसानों और आम लोगों की चिंताएं बढ़ने लगी हैं।

मौसम विभाग के अनुसार, मध्य प्रदेश में अब तक औसतन 407.2 मिलीमीटर (करीब 16 इंच) बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि तक सामान्य तौर पर 495.2 मिलीमीटर (करीब 19.5 इंच) बारिश होनी चाहिए थी। इस तरह प्रदेश में सामान्य बारिश की तुलना में बड़ा अंतर बना हुआ है।

बारिश की कमी का असर राज्य के अधिकांश हिस्सों में देखने को मिल रहा है। IMD के मुताबिक, मध्य प्रदेश के कुल 55 जिलों में से 43 जिलों में सामान्य से कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। इससे पता चलता है कि मानसून की स्थिति अभी भी कई क्षेत्रों में कमजोर बनी हुई है।

पिछले एक सप्ताह के दौरान भी प्रदेश में कहीं भी भारी बारिश दर्ज नहीं की गई है। हालांकि कुछ इलाकों में हल्की और मध्यम बारिश हुई है, लेकिन वह प्रदेश में बनी बारिश की कमी को पूरा करने के लिए पर्याप्त साबित नहीं हुई। मौसम विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और आगामी दिनों के लिए पूर्वानुमान जारी कर रहा है।

कम बारिश का सबसे ज्यादा असर कृषि क्षेत्र पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। मध्य प्रदेश एक कृषि प्रधान राज्य है और यहां बड़ी संख्या में किसान मानसून की बारिश पर निर्भर रहते हैं। खरीफ फसलों की बुवाई और शुरुआती विकास के लिए पर्याप्त बारिश जरूरी होती है। ऐसे में लंबे समय तक बारिश में कमी रहने पर फसलों की स्थिति प्रभावित हो सकती है।

किसानों का कहना है कि कई क्षेत्रों में बारिश की अनियमितता के कारण खेतों में नमी की कमी बनी हुई है। जहां पर्याप्त वर्षा नहीं हुई है, वहां फसलों की सिंचाई के लिए अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत पड़ रही है। इससे किसानों की लागत बढ़ने की चिंता भी बनी हुई है।

हालांकि, मौसम विभाग ने बुधवार को प्रदेश के कुछ जिलों के लिए राहत की संभावना जताई है। IMD ने दतिया, भिंड, छतरपुर, पन्ना और सतना जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। विभाग का अनुमान है कि इन क्षेत्रों में मौसम सक्रिय हो सकता है और अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के दौरान बारिश का वितरण हमेशा समान नहीं रहता। कुछ क्षेत्रों में अधिक बारिश होती है, जबकि कुछ हिस्सों में कम वर्षा दर्ज की जाती है। फिलहाल मध्य प्रदेश में बारिश की कमी का बड़ा कारण कमजोर मानसूनी गतिविधियां और कम वर्षा वाले दिन माने जा रहे हैं।

मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे मौसम संबंधी अपडेट पर नजर बनाए रखें। भारी बारिश वाले क्षेत्रों में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। प्रशासन को भी संभावित जलभराव और अन्य परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।

राज्य सरकार और कृषि विभाग भी बारिश की स्थिति पर नजर रख रहे हैं। अधिकारियों द्वारा जिलों से फसलों और जल उपलब्धता की स्थिति की जानकारी ली जा रही है। यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं होती है तो प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के शेष समय में होने वाली बारिश प्रदेश के लिए काफी महत्वपूर्ण होगी। यदि आने वाले दिनों में सक्रिय मानसूनी सिस्टम बनते हैं और अच्छी बारिश होती है तो वर्तमान कमी को कुछ हद तक पूरा किया जा सकता है।

मध्य प्रदेश में मानसून की मौजूदा स्थिति ने किसानों और प्रशासन दोनों की चिंता बढ़ा दी है। जहां एक ओर कई जिले बारिश की कमी से जूझ रहे हैं, वहीं मौसम विभाग ने कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना जताकर राहत की उम्मीद जगाई है। अब सभी की नजरें आने वाले दिनों में मानसून की गतिविधियों पर टिकी हैं।

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