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मध्य प्रदेश से 2-3 दिनों में विदा हो सकता है मानसून, 30 जिलों में बारिश का कोटा अधूरा

भोपाल। मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून अब विदाई की ओर बढ़ रहा है। मौसम विभाग के संकेतों के अनुसार अगले दो से तीन दिनों में मानसून राज्य के अधिकांश हिस्सों से लौट सकता है। इसके साथ ही इस साल का मानसूनी दौर समाप्त हो जाएगा। हालांकि वातावरण में नमी बने रहने के कारण कुछ जिलों में हल्की बारिश या बूंदाबांदी देखने को मिल सकती है, लेकिन फिलहाल प्रदेश में कहीं भी भारी बारिश की संभावना नहीं है।
मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार अगले तीन दिनों के दौरान कुछ स्थानों पर हल्की बूंदाबांदी हो सकती है। यह बारिश बड़े क्षेत्र में नहीं होगी और न ही किसी जिले में भारी बारिश का अनुमान है। मानसून की पूरी तरह वापसी होने तक वातावरण में मौजूद नमी के कारण कुछ हिस्सों में बादल और हल्की वर्षा की स्थिति बनी रह सकती है।
मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून का सामान्य सीजन 1 जून से 30 सितंबर तक माना जाता है। इस अवधि के समाप्त होने के बाद अब राज्य में मानसून की वापसी की परिस्थितियां बनने लगी हैं। सितंबर के अंतिम सप्ताह में कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां कमजोर पड़ गई थीं और अब मौसम अधिकतर शुष्क होने की ओर बढ़ रहा है।
हालांकि इस साल बारिश पूरे राज्य में समान नहीं रही। प्रदेश के 55 जिलों में से 30 जिलों में सामान्य बारिश का कोटा पूरा नहीं हो पाया है। वहीं 25 जिलों में सामान्य या उससे अधिक बारिश दर्ज की गई है। इससे साफ है कि मानसून की बारिश का वितरण राज्य में असमान रहा।
प्रदेश में अब तक लगभग 908.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जबकि सामान्य बारिश करीब 37.3 इंच मानी जाती है। कुल मिलाकर राज्य में औसत से करीब चार प्रतिशत कम वर्षा हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही और वहां औसत से करीब चार प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि पश्चिमी हिस्से में सामान्य से लगभग 12 प्रतिशत कम वर्षा हुई।
पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में बारिश की कमी ज्यादा रही। इनमें आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा जैसे जिले शामिल हैं। इन इलाकों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई। कुछ स्थानों पर यह कमी काफी अधिक रही।
आलीराजपुर में स्थिति सबसे कमजोर रही, जहां सामान्य बारिश का आधा कोटा भी पूरा नहीं हो सका। दूसरी ओर निवाड़ी और मऊगंज जैसे जिलों में सामान्य से काफी अधिक बारिश हुई। इस तरह प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में मानसून का असर अलग-अलग देखने को मिला।
पूर्वी मध्य प्रदेश के कई जिलों में भी बारिश का वितरण समान नहीं रहा। बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी जैसे जिलों में सामान्य से कुछ कम बारिश दर्ज की गई, जबकि इसी क्षेत्र के कई अन्य जिलों में बारिश का कोटा पूरा हुआ।
मौसम विभाग के अनुसार 1 अक्टूबर को मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट जैसे जिलों में हल्की बूंदाबांदी और गरज-चमक की संभावना है। वहीं भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, सागर और जबलपुर सहित कई शहरों में मौसम अधिकतर साफ रहने और तेज धूप निकलने का अनुमान है।
मानसून की वापसी के साथ ही तापमान और हवा के रुख में भी बदलाव शुरू हो सकता है। सितंबर के अंतिम दिनों में इंदौर समेत कुछ इलाकों में रात के तापमान में गिरावट दर्ज की गई। इंदौर में न्यूनतम तापमान 16.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। मौसम में यह बदलाव मानसून की विदाई और वातावरण में नमी कम होने से जोड़ा जा रहा है।
इस बार जून के दौरान राज्य में बारिश सामान्य से लगभग 14 प्रतिशत कम रही थी। जुलाई के शुरुआती दिनों में अच्छी बारिश होने से कमी कुछ हद तक पूरी हुई, लेकिन इसके बाद मानसून में कई बार ब्रेक आया। अगस्त और सितंबर में बारिश के दौर लौटे, फिर भी जून में बनी कमी पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकी। इसी कारण पूरे मानसूनी सीजन का आंकड़ा औसत से थोड़ा नीचे रहा।
30 जिलों में बारिश की कमी का असर कृषि और जल संसाधनों पर भी पड़ सकता है। जिन इलाकों में बारिश सामान्य से काफी कम रही, वहां मिट्टी में नमी और जल स्रोतों की स्थिति पर विशेष नजर रखने की जरूरत होगी। वहीं ज्यादा बारिश वाले जिलों में तालाब, बांध और अन्य जल स्रोतों की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर हो सकती है।
मानसून की विदाई के बाद आने वाले दिनों में राज्य में मौसम धीरे-धीरे शुष्क होने लगेगा। दिन में धूप तेज रह सकती है, जबकि रात और सुबह के तापमान में गिरावट शुरू होने की संभावना है। अक्टूबर के आगे बढ़ने के साथ सुबह और रात में हल्की ठंडक महसूस होने लगेगी।
फिलहाल मौसम विभाग की ओर से प्रदेश में किसी बड़े बारिश सिस्टम का संकेत नहीं है। कहीं-कहीं नमी के कारण हल्की बारिश या बूंदाबांदी हो सकती है, लेकिन भारी बारिश की संभावना नहीं जताई गई है। अगले दो से तीन दिनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी होने के बाद मध्य प्रदेश में बारिश का मौजूदा दौर लगभग समाप्त हो जाएगा।
इस साल के मानसून की तस्वीर देखें तो राज्य में कुल बारिश सामान्य के करीब रही, लेकिन जिलों के स्तर पर बड़ा अंतर देखने को मिला। 30 जिलों में सामान्य बारिश का कोटा पूरा नहीं हुआ, जबकि 25 जिलों में स्थिति संतोषजनक रही। अब मानसून की विदाई के साथ प्रदेश में मौसम के नए दौर की शुरुआत होने जा रही है।





