मध्य प्रदेश

साइंस हाउस कंपनी में भ्रष्टाचार के आरोपों पर मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल का बयान

SHIDDHANT
5 Dec 2025 9:45 PM IST
साइंस हाउस कंपनी में भ्रष्टाचार के आरोपों पर मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल का बयान
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Bhopal भोपाल। मध्यप्रदेश में शिक्षा और विज्ञान उपकरणों की सरकारी खरीद को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। राजधानी भोपाल में साइंस हाउस कंपनी पर लगे कथित भ्रष्टाचार के आरोपों ने राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है। आरोपों के बीच प्रदेश के मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि यदि कहीं भी कोई गड़बड़ी या अनियमितता पाई जाती है, तो सरकार कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने में पीछे नहीं हटेगी।
पत्रकारों से बात करते हुए पटेल ने कहा,
“अगर कहीं भी कोई गलत काम हुआ है, तो उसकी जांच कराई जाएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी। हमारी सरकार पारदर्शिता में विश्वास करती है और किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
मंत्री का यह बयान उस समय आया है, जब प्रदेश में साइंस हाउस कंपनी द्वारा स्कूलों और कॉलेजों में सप्लाई किए गए विज्ञान उपकरणों की गुणवत्ता और मूल्यांकन पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कंपनी ने भारी भरकम कीमतों पर निम्न गुणवत्ता वाले उपकरणों की आपूर्ति की, जिससे करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। कुछ शिक्षकों और विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई।
इस मामले को विपक्ष ने भी जोर-शोर से उठाया है। विपक्षी दलों ने कहा कि यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह शिक्षा क्षेत्र में एक गंभीर घोटाला होगा, जिसमें सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है। कांग्रेस नेताओं ने मांग की है कि सरकार एक उच्च स्तरीय जांच समिति गठित करे और पूरे मामले को सार्वजनिक करे।
नरेंद्र शिवाजी पटेल ने इन मांगों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार विपक्ष की मांगों का सम्मान करती है, लेकिन जांच तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर होगी, न कि राजनीतिक दबाव में। उन्होंने कहा कि किसी भी विभाग या अधिकारी की भूमिका संदिग्ध पाई गई तो विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य शिक्षा और विज्ञान के क्षेत्रों को मजबूत करना है और किसी भी प्रकार की अनियमितता उस मिशन के खिलाफ है।
इधर शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक स्तर पर रिपोर्ट मांगी गई है और खरीद संबंधी दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी गई है। यह देखा जा रहा है कि टेंडर प्रक्रिया सही तरीके से हुई या नहीं, और उपकरणों का मूल्य वास्तविक बाजार मूल्य के अनुरूप था या नहीं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मामले की जांच निष्पक्ष हुई तो यह आने वाले दिनों में प्रदेश की विज्ञान शिक्षा प्रणाली में सुधार का रास्ता खोल सकती है।
फिलहाल इस आरोप ने शिक्षा जगत, प्रशासन और राजनीति—तीनों में हलचल पैदा कर दी है। सभी की निगाहें अब उस जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिसके बाद ही यह तय होगा कि साइंस हाउस कंपनी पर लगे आरोपों में कितनी सच्चाई है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होगी।
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