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शहर में आवारा कुत्तों और मवेशियों का आतंक, रोजाना सामने आ रहे हमले के मामले

भोपाल। शहर की सड़कों पर बढ़ती आवारा कुत्तों और मवेशियों की संख्या अब लोगों के लिए बड़ी चिंता का कारण बनती जा रही है। कई इलाकों से आवारा कुत्तों के हमले और सांडों की लड़ाई की घटनाएं सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में डर का माहौल है। पैदल चलने वाले लोगों, बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर के कई हिस्सों में आवारा कुत्तों के झुंड अक्सर घूमते रहते हैं। खासकर सुबह और शाम के समय इनकी संख्या अधिक दिखाई देती है। इस दौरान सड़क पर निकलने वाले लोगों को हमले का खतरा बना रहता है।
अस्पतालों में रोज पहुंच रहे कुत्ते के काटने के मामले
लोगों के अनुसार, शहर के अस्पतालों में हर दिन कुत्ते के काटने के दो से तीन मामले सामने आ रहे हैं। इनमें कई लोग ऐसे होते हैं, जिन्हें सड़क पर घूम रहे आवारा कुत्तों ने अपना शिकार बनाया।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई बार लोग डर के कारण रास्ता बदलने को मजबूर हो जाते हैं। बच्चों को अकेले बाहर भेजने में भी अभिभावक चिंता महसूस करते हैं।
लोगों ने नगर प्रशासन से मांग की है कि आवारा कुत्तों की समस्या के समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं और सड़कों पर घूमने वाले मवेशियों को भी नियंत्रित किया जाए।
अखबार बांटने वाले मीडियाकर्मी पर हमला
बुधवार को शहर में एक अखबार बांटने वाले मीडियाकर्मी सैयद अबरार अली के साथ आवारा कुत्तों के हमले की घटना सामने आई। जानकारी के मुताबिक, वह मानस भवन के पास अखबार बांटने का काम कर रहे थे, तभी कुछ आवारा कुत्तों ने उन्हें घेर लिया।
इस दौरान एक कुत्ते ने उन पर हमला कर दिया और उन्हें काट लिया। घटना के बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल जाना पड़ा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अखबार वितरण, दूध सप्लाई और सुबह जल्दी निकलने वाले कामगारों को अक्सर ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ता है, क्योंकि इस समय सड़क पर आवारा कुत्तों की गतिविधियां ज्यादा रहती हैं।
दूसरे मीडियाकर्मी को भी झेलना पड़ा हमला
एक अन्य मीडियाकर्मी बाबू सिसोदिया ने बताया कि अखबार बांटने के दौरान उन्हें भी अलग-अलग इलाकों में दो बार आवारा कुत्तों ने काटा है।
उन्होंने कहा कि सड़क पर काम करने वाले लोगों के लिए यह समस्या लगातार बढ़ रही है। कई बार कुत्तों के झुंड अचानक लोगों के पीछे दौड़ने लगते हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा भी बना रहता है।
मवेशियों की वजह से भी बढ़ रही परेशानी
आवारा कुत्तों के साथ-साथ सड़कों पर घूमने वाले मवेशी भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। कई जगहों पर सांडों की लड़ाई की घटनाएं सामने आती रहती हैं।
लोगों का कहना है कि सड़क पर बैठे या घूमते मवेशियों के कारण यातायात प्रभावित होता है। कई बार अचानक सामने आ जाने से वाहन चालक हादसे का शिकार हो जाते हैं।
नगर प्रशासन से कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों ने नगर प्रशासन से अपील की है कि आवारा पशुओं की समस्या को गंभीरता से लिया जाए। उनका कहना है कि केवल शिकायतों के बाद कार्रवाई करने के बजाय स्थायी समाधान की जरूरत है।
लोगों ने सुझाव दिया है कि आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने, उनकी निगरानी करने और सड़कों से मवेशियों को हटाने के लिए नियमित अभियान चलाया जाना चाहिए।
सुरक्षा को लेकर लोगों में चिंता
शहरवासियों का कहना है कि सड़कें सभी के लिए सुरक्षित होनी चाहिए। लेकिन आवारा कुत्तों और मवेशियों की बढ़ती संख्या के कारण आम लोगों को खतरा महसूस हो रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए प्रशासन, स्थानीय संस्थाओं और नागरिकों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। साथ ही पशु प्रबंधन और जागरूकता अभियान भी चलाए जाने चाहिए।
फिलहाल शहर में आवारा कुत्तों और मवेशियों की समस्या को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। अब सभी की नजर नगर प्रशासन की ओर है कि इस समस्या के समाधान के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।





