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नितिन नबीन के रोड शो में रथ से उतारे जाने पर नाराज मेयर, 20 सितंबर को करेंगे मौन विरोध

उज्जैन। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के उज्जैन रोड शो के दौरान महापौर मुकेश टटवाल को रथ से नीचे उतारे जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। घटना से नाराज टटवाल ने 20 सितंबर को फ्रीगंज स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के सामने मौन बैठकर विरोध दर्ज कराने की घोषणा की है। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, यह घटनाक्रम गुरुवार को नितिन नबीन के रोड शो के दौरान हुआ था।
महापौर का कहना है कि वह शहर के प्रथम नागरिक के रूप में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की अगवानी करने हेलीपैड पहुंचे थे। उनके मुताबिक, भाजपा के जिला प्रभारी बजरंग पुरोहित और कार्यक्रम प्रभारी जयपाल सिंह चावड़ा ने उनसे राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ रथ पर सवार होने के लिए कहा था। इसके बाद वह विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा के साथ रथ पर चढ़ गए, लेकिन कुछ देर बाद उन्हें नीचे उतरने के लिए कहा गया।
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— SanjayGupta_Journalist (@sanjaygupta1304) September 18, 2026
Bjp राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के रथ से उतराने के बाद उज्जैन महापौर का छलका दर्द, अंबेडकर की शरण में जाएंगे। pic.twitter.com/7Hxakf9kXU
रथ से उतरने के लिए कहने पर विवाद
रोड शो शुरू होने से पहले भाजपा के कई वरिष्ठ नेता रथ पर सवार हुए थे। मुकेश टटवाल भी उनके साथ रथ पर चढ़े। इसके कुछ देर बाद उन्हें रथ से उतरने के लिए कहा गया। सामने आए विवरणों में इस बात को लेकर अंतर है कि निर्देश किसने दिया—एक रिपोर्ट में पुलिस द्वारा नीचे उतरने के लिए कहे जाने का उल्लेख है, जबकि अन्य रिपोर्टें सामान्य रूप से उन्हें रथ से उतारे जाने की बात कहती हैं।
टटवाल ने पूरे घटनाक्रम पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इससे उनके सम्मान को ठेस पहुंची है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें रथ पर बैठने के लिए पार्टी पदाधिकारियों ने ही कहा था, इसलिए बाद में नीचे उतारे जाने से असहज स्थिति पैदा हुई।
प्रोटोकॉल सूची को लेकर उठे सवाल
घटना के बाद सबसे अधिक चर्चा रथ पर सवार होने वाले नेताओं की सूची को लेकर हो रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार, हेलीपैड से रथ पर सवार होने वाले नेताओं की सूची में महापौर मुकेश टटवाल का नाम नहीं था, जबकि शिप्रा तट पर बनाए गए मुख्य मंच की सूची में उनका नाम शामिल था। टटवाल ने कहा कि उन्हें सूची की जानकारी नहीं थी और उन्हें केवल रथ से नीचे उतरने के लिए कहा गया।
रोड शो के दौरान रथ पर राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के साथ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, सांसद अनिल फिरोजिया, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा और नगर अध्यक्ष संजय अग्रवाल सहित अन्य नेता मौजूद थे।
हालांकि एक अन्य स्थानीय रिपोर्ट में दावा किया गया है कि तय सूची में महापौर का नाम भी था। अलग-अलग रिपोर्टों में सूची को लेकर यह अंतर सामने आने के कारण वास्तविक अधिकृत प्रोटोकॉल सूची की पुष्टि महत्वपूर्ण हो जाती है।
20 सितंबर को अंबेडकर प्रतिमा के पास बैठेंगे
घटना के बाद मुकेश टटवाल ने 20 सितंबर को विरोध दर्ज कराने की घोषणा की है। रिपोर्ट के अनुसार, वह सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक फ्रीगंज स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के सामने मौन बैठेंगे। उन्होंने कहा कि वह वहां बैठकर सार्वजनिक जिम्मेदारी निभाने और ऐसी परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति के लिए प्रार्थना करेंगे।
टटवाल ने महापौर पद की कथित अवहेलना को लेकर भी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि इसके बावजूद उनका उद्देश्य शहर की जनता के लिए अपनी जिम्मेदारी निभाना है।
बैरवा समाज की बैठक में भी उठा मामला
रथ से उतारे जाने की घटना को लेकर शुक्रवार को बागपुरा स्थित संत बालीनाथ मंदिर में बैरवा समाज की बैठक भी हुई। बैठक में टटवाल के साथ हुए व्यवहार पर नाराजगी जताई गई और उनके प्रस्तावित विरोध को समर्थन देने का निर्णय लिया गया।
इस बैठक के बाद मामला भाजपा के आंतरिक कार्यक्रम से निकलकर स्थानीय राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। टटवाल ने घटनाक्रम की जानकारी पार्टी पदाधिकारियों को दिए जाने की बात भी कही है।
कांग्रेस ने भी साधा निशाना
इस मामले पर कांग्रेस नेताओं ने भाजपा को घेरा है। तराना से कांग्रेस विधायक महेश परमार ने घटना को महापौर के सम्मान से जोड़ते हुए भाजपा की आलोचना की और पार्टी से माफी की मांग की। यह कांग्रेस नेता का राजनीतिक आरोप है; घटना के पीछे जातिगत कारण होने की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।
वहीं भाजपा संगठन की ओर से घटना के कारण और प्रोटोकॉल व्यवस्था को लेकर विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार है।
आखिर किस आधार पर तय हुई थी सूची?
पूरे विवाद का महत्वपूर्ण सवाल यह है कि रथ पर किन नेताओं को सवार होना था और इसके लिए अंतिम अधिकृत सूची क्या थी। एक तरफ महापौर का कहना है कि पार्टी के जिम्मेदार पदाधिकारियों ने उन्हें रथ पर चढ़ने के लिए कहा था, दूसरी ओर एक रिपोर्ट में रथ की सूची में उनका नाम नहीं होने की बात सामने आई है।
यदि महापौर का नाम सूची में नहीं था तो उन्हें रथ पर चढ़ने के लिए किस आधार पर कहा गया और अगर वह अधिकृत थे तो बाद में उन्हें नीचे उतरने के लिए क्यों कहा गया—इन सवालों पर स्पष्ट जवाब अभी सामने नहीं आया है।
फिलहाल महापौर मुकेश टटवाल ने 20 सितंबर को डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के सामने मौन विरोध का ऐलान किया है। अब इस मामले में भाजपा संगठन की आधिकारिक प्रतिक्रिया और प्रोटोकॉल सूची को लेकर स्थिति स्पष्ट होने पर घटनाक्रम की पूरी तस्वीर सामने आ सकेगी।





