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मध्य प्रदेश
मोहन सरकार का मास्टरस्ट्रोक! सिंचाई और वन संरक्षण के लिए हजारों करोड़ की मंजूरी
Ratna Netam
3 Nov 2026 8:34 PM IST

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भोपाल : 3 नवंबर 2026। मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने प्रदेश के विकास को नई गति देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में आयोजित मंत्रिमंडल की बैठक में 23 हजार 300 करोड़ रुपये से अधिक के विभिन्न विकास प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इन प्रस्तावों में वन संरक्षण, वन्यजीव संवर्धन, सिंचाई परियोजनाओं, नगरीय बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया है। सरकार का कहना है कि इन फैसलों से प्रदेश में विकास कार्यों को गति मिलेगी और नागरिक सुविधाओं का विस्तार होगा।कैबिनेट की बैठक के बाद सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप ने फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार का उद्देश्य प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन स्थापित करना है। इसी दिशा में विभिन्न विभागों की योजनाओं के लिए वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई है। सरकार ने विशेष रूप से किसानों, शहरी नागरिकों और वन क्षेत्रों से जुड़े विकास कार्यों को प्राथमिकता दी है।
बैठक में सबसे बड़ी राशि वन विभाग की योजनाओं के लिए मंजूर की गई। मंत्रिमंडल ने वनों के संवर्धन और वन्यजीव संरक्षण से संबंधित नौ प्रमुख योजनाओं के संचालन के लिए कुल 17,240 करोड़ 55 लाख रुपये स्वीकृत किए हैं। यह राशि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की अवधि के लिए मंजूर की गई है।इन योजनाओं का उद्देश्य प्रदेश में वन क्षेत्रों का संरक्षण, जैव विविधता को बढ़ावा देना और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखना है। मध्य प्रदेश देश के प्रमुख वन संपदा वाले राज्यों में शामिल है। ऐसे में जंगलों के संरक्षण के साथ वन्यजीव प्रबंधन को मजबूत करना सरकार की महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में शामिल है।स्वीकृत राशि में से 10,664 करोड़ 79 लाख रुपये कार्यकारी योजना संगठन और वन वृत्तों की स्थापना तथा संचालन से संबंधित कार्यों के लिए निर्धारित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त क्षतिपूर्ति वनीकरण योजना के लिए 1,994 करोड़ 30 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं। इस योजना का उद्देश्य विकास परियोजनाओं के कारण वन भूमि के उपयोग से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान की भरपाई में सहायता करना है।
मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय उद्यानों की स्थापना और उनसे संबंधित व्यवस्थाओं के लिए 1,623 करोड़ 79 लाख रुपये की स्वीकृति भी दी है। वहीं इमारती लकड़ी उत्पादन से संबंधित गतिविधियों के लिए 1,107 करोड़ 6 लाख रुपये और चिड़ियाघरों तथा वन्यजीव रेस्क्यू सेंटरों के लिए 604 करोड़ 23 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। इन फैसलों से वन्यजीव संरक्षण और वन प्रबंधन से जुड़े कार्यों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।किसानों और कृषि क्षेत्र को राहत देने के उद्देश्य से कैबिनेट ने सिंचाई परियोजनाओं के लिए भी बड़ी राशि मंजूर की है। पन्ना, विदिशा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली और उज्जैन जिलों से संबंधित सिंचाई योजनाओं के निरंतर संचालन के लिए 4,103 करोड़ 73 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। यह राशि वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक की अवधि के लिए मंजूर की गई है।सरकार के इस फैसले का उद्देश्य किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध कराना और कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए जल संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना है। जिन क्षेत्रों में खेती वर्षा पर निर्भर है, वहां सिंचाई सुविधाओं का विस्तार किसानों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।
पन्ना जिले की मझगांव मध्यम सिंचाई परियोजना के लिए 69 करोड़ 36 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इस परियोजना के अंतर्गत लगभग 13,060 हेक्टेयर क्षेत्र में सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली विकसित की जा रही है। इसके माध्यम से किसानों को आधुनिक सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।इसके अलावा विदिशा जिले की टेम मध्यम सिंचाई परियोजना के लिए 277 करोड़ 52 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं। मऊगंज, सीधी और सिंगरौली जिलों से संबंधित सीतापुर-हनुमना सूक्ष्म सिंचाई परियोजना के लिए 3,620 करोड़ 82 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है। वहीं उज्जैन की सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना के लिए 136 करोड़ 3 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं।प्रदेश के शहरों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए भी महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है। मंत्रिमंडल ने मुख्यमंत्री नगरीय क्षेत्र अधोसंरचना निर्माण योजना को 1 अप्रैल 2027 से 31 मार्च 2029 तक जारी रखने और इसके लिए 700 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि स्वीकृत करने का निर्णय लिया है।
इस योजना के माध्यम से नगरीय क्षेत्रों में आवश्यक अधोसंरचना को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। बढ़ती आबादी और शहरीकरण के कारण शहरों में सड़क, जल निकासी और अन्य नागरिक सुविधाओं की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में अतिरिक्त वित्तीय प्रावधान नगरीय निकायों की विकास योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।मंत्रिमंडल ने स्वास्थ्य क्षेत्र में औद्योगिक निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाने से जुड़े प्रस्ताव के लिए 610 करोड़ 51 लाख रुपये की मंजूरी भी दी है। इस निर्णय को राज्य में निवेश गतिविधियों और रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है।प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने के उद्देश्य से लोकायुक्त संगठन के संचालन के लिए 573 करोड़ 85 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है। यह राशि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की अवधि के लिए निर्धारित की गई है।
इसमें 553 करोड़ 85 लाख रुपये कार्यालय स्थापना, वेतन और अन्य प्रशासनिक खर्चों के लिए तथा 20 करोड़ रुपये विभागीय परिसंपत्तियों के रखरखाव के लिए मंजूर किए गए हैं। सरकार का उद्देश्य लोकायुक्त संगठन के कामकाज को सुचारू बनाए रखने के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना है।बैठक में जनजातीय इतिहास और संस्कृति के संरक्षण को लेकर भी फैसला लिया गया। जबलपुर स्थित राजा शंकर शाह-कुंवर रघुनाथ शाह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय के नियमित संचालन के लिए सहायक अनुसंधान अधिकारी का एक पद स्वीकृत किया गया है। इसके साथ ही संग्रहालय के संचालन और रखरखाव के लिए 83 लाख 18 हजार रुपये के वार्षिक व्यय को मंजूरी दी गई है।इस राशि का उपयोग संग्रहालय की प्रशासनिक व्यवस्थाओं, बिजली, पानी, भवन के रखरखाव और अन्य आवश्यक गतिविधियों पर किया जाएगा। इस फैसले से जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों कीऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
राज्य सरकार के इन फैसलों से स्पष्ट है कि उसने पर्यावरण संरक्षण, कृषि विकास और शहरी सुविधाओं को एक साथ आगे बढ़ाने पर जोर दिया है। हालांकि स्वीकृत बजट का वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि संबंधित विभाग परियोजनाओं को कितनी प्रभावी और समयबद्ध तरीके से लागू करते हैं।विशेषज्ञों के अनुसार, सिंचाई परियोजनाओं के विस्तार से कृषि क्षेत्र में उत्पादन क्षमता बढ़ सकती है। वहीं वन संरक्षण के लिए किए गए वित्तीय प्रावधान पर्यावरणीय संतुलन और वन्यजीवों की सुरक्षा में सहायक हो सकते हैं। शहरी अधोसंरचना में निवेश से आम नागरिकों की सुविधाएं बेहतर होने की संभावना है।कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई यह कैबिनेट बैठक प्रदेश की विकास योजनाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब सभी की निगाहें इन प्रस्तावों के क्रियान्वयन और उनसे मिलने वाले वास्तविक लाभ पर रहेंगी।
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