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इंदौर में BJP का बड़ा शक्ति प्रदर्शन, सीएम मोहन यादव ने निकाली पदयात्रा

इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में शुक्रवार, 30 अक्टूबर को भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 'लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ' अभियान के तहत विशाल पदयात्रा निकाली। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया, प्रदेश प्रभारी बिप्लब कुमार देब और कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने हिस्सा लिया। पदयात्रा में डॉक्टरों, वकीलों, व्यापारियों, धार्मिक नेताओं, सामाजिक संगठनों और विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों की भागीदारी देखने को मिली। भाजपा ने इस आयोजन के जरिए लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति विश्वास बनाए रखने का संदेश दिया। वहीं, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इसे देशभक्तों की रैली बताया।
शुक्रवार सुबह सुभाष नगर चौराहे से शुरू हुई यह पदयात्रा परदेशीपुरा होते हुए पाटनीपुरा चौराहे तक पहुंची। यात्रा के दौरान भाजपा कार्यकर्ता पार्टी के झंडे और तिरंगे लेकर चलते नजर आए। कई प्रतिभागियों ने हाथों में लोकतंत्र और संविधान से जुड़े संदेश लिखी तख्तियां भी ले रखी थीं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी और स्थानीय नागरिक शामिल हुए। पाटनीपुरा चौराहे पर आयोजित सभा में वरिष्ठ नेताओं ने उपस्थित लोगों को संबोधित किया।-
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी ने इस कार्यक्रम को विशेष राजनीतिक महत्व दिया। उनके साथ केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया, भाजपा प्रदेश प्रभारी बिप्लब कुमार देब, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और तुलसीराम सिलावट सहित कई जनप्रतिनिधियों की भागीदारी रही। इंदौर सांसद शंकर लालवानी और महापौर पुष्यमित्र भार्गव भी कार्यक्रम से जुड़े प्रमुख नेताओं में शामिल रहे।
पदयात्रा के दौरान अलग-अलग सामाजिक और व्यावसायिक संगठनों की भागीदारी चर्चा का विषय रही। डॉक्टरों, अधिवक्ताओं, व्यापारियों, साधु-संतों, सिख और सिंधी समाज सहित विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधि इसमें शामिल हुए। आयोजकों ने कार्यक्रम को केवल राजनीतिक कार्यकर्ताओं तक सीमित न रखते हुए समाज के अलग-अलग वर्गों को जोड़ने का प्रयास किया। इससे भाजपा ने व्यापक जनभागीदारी का संदेश देने की कोशिश की।
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने पदयात्रा को देशभक्तों की रैली बताते हुए देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने आयोजन से पहले भी लोगों से इसमें शामिल होने की अपील की थी। विजयवर्गीय ने देश की स्वतंत्रता के लिए बलिदान देने वालों का उल्लेख करते हुए कहा था कि राष्ट्रहित में सोचने वाले नागरिकों को लोकतंत्र की रक्षा के लिए आगे आना चाहिए। भाजपा नेताओं ने कार्यक्रम के माध्यम से अराजकता के खिलाफ एकजुटता दिखाने का संदेश दिया।
भाजपा की इस पदयात्रा का एक प्रमुख राजनीतिक संदर्भ मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) को लेकर जारी बहस भी है। पार्टी नेताओं के मुताबिक, अभियान का उद्देश्य इस प्रक्रिया के बारे में लोगों को जानकारी देना और विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवालों का जवाब देना है। भाजपा का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति जनता का भरोसा मजबूत होना चाहिए।
दरअसल, मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद सामने आते रहे हैं। भाजपा इस प्रक्रिया को मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने से जोड़ती है, जबकि विपक्ष की ओर से पात्र मतदाताओं के नाम हटने की आशंका जैसे सवाल उठाए जाते हैं। ऐसे माहौल में इंदौर की पदयात्रा को भाजपा की राजनीतिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
पार्टी नेताओं ने आयोजन से पहले विभिन्न सामाजिक संगठनों, व्यापारिक संस्थाओं, शिक्षण संस्थानों और खेल संगठनों के प्रतिनिधियों से संपर्क किया था। भाजपा की ओर से एक लाख लोगों के शामिल होने का लक्ष्य और दावा किया गया था। हालांकि, कार्यक्रम में वास्तव में कितने लोग उपस्थित रहे, इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
इस आयोजन को सफल बनाने के लिए भाजपा के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं ने व्यापक तैयारियां की थीं। शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में बैठकें आयोजित कर नागरिकों को पदयात्रा में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया। भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा और अभियान के नगर संयोजक सुधीर कोल्हे ने भी तैयारियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पदयात्रा के कारण शहर के कुछ प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित होने की खबरें भी सामने आईं। विशेष रूप से पाटनीपुरा क्षेत्र में मंच और कार्यक्रम की व्यवस्थाओं के कारण वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। बड़े राजनीतिक आयोजनों के दौरान सामान्य यातायात बनाए रखना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण चुनौती होती है।
राजनीतिक दृष्टि से इंदौर भाजपा का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। ऐसे में मुख्यमंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में आयोजित इस पदयात्रा को संगठन की ताकत दिखाने के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है। कार्यक्रम के जरिए पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं के साथ सामाजिक और व्यावसायिक वर्गों को जोड़ने पर जोर दिया।
इंदौर में आयोजित इस पदयात्रा ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है। भाजपा ने जहां इसे लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं के समर्थन में जनजागरण का अभियान बताया, वहीं इसके राजनीतिक संदेश का संबंध विपक्ष के साथ जारी मतभेदों से भी जुड़ा दिखाई देता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया की भागीदारी ने कार्यक्रम का महत्व और बढ़ा दिया।
फिलहाल 'लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ' पदयात्रा के जरिए भाजपा ने इंदौर में अपनी संगठनात्मक सक्रियता और जनसंपर्क अभियान का प्रदर्शन किया है। आने वाले दिनों में इस अभियान का राजनीतिक प्रभाव कितना होगा, यह प्रदेश की राजनीतिक परिस्थितियों और जनता की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।





