मध्य प्रदेश

सोयाबीन मक्का किसानों को बड़ी राहत, अब छुट्टी के दिन भी होगी खरीदी

Ratna Netam
30 Oct 2026 5:38 PM IST
सोयाबीन मक्का किसानों को बड़ी राहत, अब छुट्टी के दिन भी होगी खरीदी
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भोपाल : 30 अक्टूबर 2026। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के सोयाबीन और मक्का उत्पादक किसानों के लिए बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने घोषणा की है कि अब अवकाश के दिनों में भी कृषि उपज मंडियां खुली रहेंगी और किसानों की सोयाबीन तथा मक्का की खरीदी की जाएगी। सरकार का उद्देश्य खरीफ सीजन में किसानों को अपनी उपज बेचने में होने वाली परेशानियों से राहत देना है। त्योहारों और साप्ताहिक छुट्टियों के दौरान मंडियां बंद रहने से किसानों को कई दिनों तक अपनी फसल बेचने का इंतजार करना पड़ता था। अब नई व्यवस्था से किसानों को अतिरिक्त समय मिलेगा और मंडियों में खरीदी की प्रक्रिया जारी रखी जा सकेगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को सोशल मीडिया के माध्यम से इस निर्णय की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सोयाबीन और मक्का उत्पादक किसानों की सुविधा तथा उनकी उपज के सुगम उपार्जन के लिए मध्य प्रदेश सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सरकार ने किसानों की परेशानियों को ध्यान में रखते हुए अवकाश के दिनों में भी मंडियां खुली रखने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि किसानों की सुविधा, उनकी मेहनत का उचित मूल्य और उनके हितों की रक्षा करना प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता हैराज्य सरकार का यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है, जब प्रदेश में खरीफ फसलों की कटाई और मंडियों में आवक का दौर चल रहा है। मध्य प्रदेश देश के प्रमुख सोयाबीन उत्पादक राज्यों में शामिल है। इसके अलावा प्रदेश के कई जिलों में बड़े पैमाने पर मक्का की खेती भी की जाती है। फसल तैयार होने के बाद किसान उसे बेचकर अपनी आर्थिक जरूरतों को पूरा करते हैं। ऐसे में मंडियों का नियमित संचालन किसानों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
त्योहारी सीजन में कई बार लगातार सरकारी छुट्टियां और साप्ताहिक अवकाश पड़ने के कारण मंडियों में खरीदी और नीलामी का काम प्रभावित होता है। ऐसी परिस्थितियों में किसानों को अपनी उपज ट्रैक्टर-ट्रॉली या अन्य वाहनों में लेकर मंडी पहुंचने के बावजूद इंतजार करना पड़ सकता है। इससे परिवहन खर्च बढ़ने के साथ किसानों का समय भी खराब होता है। विशेष रूप से दूरदराज के गांवों से आने वाले किसानों को अतिरिक्त परेशानियों का सामना करना पड़ता है।मुख्यमंत्री के निर्णय के बाद इन समस्याओं में कमी आने की उम्मीद है। अवकाश के दिनों में मंडियां खुली रहने से किसानों को अपनी सुविधा के अनुसार उपज बेचने का अवसर मिलेगा। इससे मंडियों में एक ही दिन अधिक आवक होने के कारण पैदा होने वाले दबाव को भी कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, मंडियों में नीलामी, तौल और भुगतान की व्यवस्था संबंधित स्थानीय प्रशासन तथा मंडी प्रबंधन के निर्देशों के अनुसार संचालित होगी।
मध्य प्रदेश में सोयाबीन की खेती का बड़ा आर्थिक महत्व है। प्रदेश के मालवा, निमाड़ और अन्य कृषि क्षेत्रों में बड़ी संख्या में किसान सोयाबीन उत्पादन से जुड़े हैं। इस फसल से किसानों की आय के साथ खाद्य तेल उद्योग और कृषि आधारित व्यापारिक गतिविधियां भी प्रभावित होती हैं।सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SOPA) के खरीफ 2026 के अनुमान के अनुसार, मध्य प्रदेश में सोयाबीन का उत्पादन बढ़कर लगभग 57.16 लाख टन तक पहुंच सकता है। पिछले वर्ष यह उत्पादन करीब 43.24 लाख टन था। इस प्रकार उत्पादन में लगभग 32 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। अधिक उत्पादन की स्थिति में मंडियों में आवक बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे में खरीदी व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना आवश्यक हो जाता है।
प्रदेश सरकार ने सोयाबीन उत्पादक किसानों के लिए भावांतर भुगतान योजना भी लागू की है। इसके अंतर्गत निर्धारित नियमों के अनुसार किसानों को बाजार मूल्य और संदर्भ मूल्य के अंतर की भरपाई के माध्यम से सहायता प्रदान करने की व्यवस्था की गई है। खरीफ 2026 के लिए अधिसूचित मंडियों में सोयाबीन की बिक्री की अवधि 22 अक्टूबर 2026 से 15 जनवरी 2027 तक निर्धारित की गई है।भावांतर योजना का उद्देश्य उन किसानों को सहायता प्रदान करना है, जिन्हें बाजार में फसल का मूल्य निर्धारित संदर्भ स्तर से कम मिलता है। हालांकि, योजना का लाभ पात्रता, पंजीकरण, बिक्री अवधि और अन्य निर्धारित शर्तों के अनुसार ही प्राप्त होगा। इसलिए किसानों को अपनी उपज बेचने से पहले संबंधित मंडी और कृषि विभाग से आवश्यक जानकारी प्राप्त करनी चाहिए।मक्का उत्पादक किसानों के लिए भी अवकाश के दिनों में खरीदी जारी रहने का निर्णय महत्वपूर्ण है। मक्का का उपयोग खाद्य सामग्री, पशु आहार और विभिन्न औद्योगिक उत्पादों के निर्माण में किया जाता है। इसकी मांग कृषि और औद्योगिक बाजार दोनों से जुड़ी रहती है। ऐसे में मंडियों में नियमित व्यापार होने से किसानों को उपज बेचने के अधिक अवसर उपलब्ध हो सकते हैं।
किसानों के लिए फसल बेचने का समय भी काफी महत्वपूर्ण होता है। कई किसान खेती में किए गए खर्च, बीज, खाद, कीटनाशक, मजदूरी और परिवहन के भुगतान के लिए फसल बिक्री से मिलने वाली राशि पर निर्भर रहते हैं। यदि मंडियों में छुट्टियों के कारण खरीदी बंद रहती है, तो उनकी आर्थिक योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं। अवकाश के दिनों में खरीदी की सुविधा मिलने से इस समस्या को कम करने में सहायता मिल सकती है।हालांकि, सरकार की इस घोषणा का वास्तविक लाभ तभी मिल सकेगा, जब मंडियों में आवश्यक कर्मचारियों, व्यापारियों, तौल व्यवस्था और भुगतान संबंधी सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। किसानों को अपनी उपज लेकर मंडी पहुंचने से पहले स्थानीय स्तर पर खरीदी के समय और नियमों की जानकारी लेना भी जरूरी होगा।
राज्य सरकार के इस निर्णय से प्रदेश में कृषि व्यापार की गतिविधियों को निरंतर बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है। विशेष रूप से त्योहारों के दौरान यह व्यवस्था किसानों के लिए उपयोगी हो सकती है। इससे फसल बिक्री में होने वाली अनावश्यक देरी कम की जा सकेगी।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बार फिर दोहराया है कि प्रदेश सरकार किसानों के हितों की रक्षा और उनकी आय से जुड़े विषयों को प्राथमिकता दे रही है। सरकार का प्रयास है कि किसानों को अपनी मेहनत की उपज बेचने के लिए अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।फिलहाल सोयाबीन और मक्का की खरीदी अवकाश के दिनों में भी जारी रखने की घोषणा से किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है। अब किसानों की नजर मंडियों में इस फैसले के प्रभावी क्रियान्वयन और खरीदी व्यवस्था पर रहेगी।
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