मध्य प्रदेश

दिवाली से पहले पुलिस का बड़ा आदेश, कार्बाइड गन और अवैध पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध

Kavita2
27 Oct 2026 10:32 AM IST
दिवाली से पहले पुलिस का बड़ा आदेश, कार्बाइड गन और अवैध पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध
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भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में दिवाली और आगामी त्योहारों को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने कार्बाइड गन, कार्बाइड तोप, कार्बाइड लैंप और अवैध रूप से संशोधित किए गए पटाखों के निर्माण, खरीद-बिक्री, भंडारण और वितरण पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया है। यह आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत जारी किया गया है और अगले दो महीने तक भोपाल पुलिस कमिश्नरेट क्षेत्र में प्रभावी रहेगा। प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि त्योहारों के दौरान नागरिकों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी स्थिति में छूट नहीं दी जाएगी।

2025 में करीब 300 लोग हुए थे घायल

कार्बाइड गन पर सख्ती के पीछे पिछले साल दिवाली के दौरान हुए गंभीर हादसे प्रमुख कारण हैं। वर्ष 2025 में मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में कार्बाइड गन के इस्तेमाल से करीब 300 लोगों की आंखों में चोट लगने की घटनाएं सामने आई थीं।

घायलों में बड़ी संख्या बच्चों और किशोरों की थी। कई लोगों की आंखों में गंभीर चोटें आई थीं, जबकि कुछ मामलों में स्थायी रूप से दृष्टि प्रभावित होने की आशंका जताई गई थी।

भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर समेत कई शहरों के अस्पतालों में घायल लोगों का उपचार किया गया था।

इन घटनाओं के बाद राज्य सरकार ने कार्बाइड गन के निर्माण, बिक्री और इस्तेमाल के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी। इस वर्ष त्योहारों से पहले प्रशासन ने प्रतिबंधों को सख्ती से लागू करने का फैसला लिया है।

लोहे और PVC पाइप से बने खतरनाक उपकरणों पर रोक

पुलिस कमिश्नर के आदेश में बताया गया है कि कुछ लोग लोहे, स्टील और पीवीसी पाइपों का इस्तेमाल करके अवैध विस्फोटक उपकरण तैयार कर रहे हैं।

इन उपकरणों को कार्बाइड गन, कार्बाइड तोप और कार्बाइड लैंप जैसे नामों से बेचा जाता है। इनका उद्देश्य तेज धमाके की आवाज पैदा करना होता है।

पुलिस के अनुसार, इस प्रकार के उपकरणों का निर्माण और इस्तेमाल बेहद खतरनाक हो सकता है।

इनसे निकलने वाली तेज आवाज और विस्फोट के दौरान उड़ने वाले कण आसपास मौजूद लोगों की आंखों, चेहरे और शरीर के अन्य हिस्सों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं।

विशेष रूप से बच्चों द्वारा ऐसे उपकरणों का इस्तेमाल करने से दुर्घटना का खतरा अधिक रहता है।

निर्माण से लेकर बिक्री तक कई गतिविधियां प्रतिबंधित

भोपाल पुलिस कमिश्नरेट क्षेत्र में जारी आदेश के तहत कार्बाइड आधारित खतरनाक उपकरणों से जुड़ी कई गतिविधियों पर रोक लगाई गई है।

- कार्बाइड गन, तोप और लैंप का अवैध निर्माण, असेंबलिंग और संशोधन।

- प्रतिबंधित उपकरणों की खरीद, बिक्री और बिक्री के लिए प्रदर्शन।

- खतरनाक उपकरणों का भंडारण, वितरण और आपूर्ति।

- अवैध संशोधित पटाखों को तैयार करना या व्यावसायिक रूप से उपलब्ध कराना।

- प्रतिबंधित उपकरणों की मरम्मत और पुनः संयोजन।

आदेश के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार मुकदमा दर्ज किया जा सकता है।

प्रशासन ने साफ किया है कि यह प्रतिबंध नागरिकों की सुरक्षा के लिए लगाया गया है और निर्धारित अवधि तक लागू रहेगा।

आखिर क्यों खतरनाक है कार्बाइड गन?

कार्बाइड गन एक खतरनाक उपकरण है, जिसका उपयोग तेज धमाके की आवाज पैदा करने के लिए किया जाता है।

इसमें इस्तेमाल होने वाले कैल्शियम कार्बाइड से ज्वलनशील गैस उत्पन्न हो सकती है। गैस के प्रज्वलित होने पर अचानक विस्फोट होने का खतरा रहता है।

ऐसे उपकरणों के टूटने या फटने से प्लास्टिक और धातु के छोटे टुकड़े तेजी से बाहर निकल सकते हैं। ये कण आंखों और चेहरे पर गंभीर चोट पहुंचा सकते हैं।

चिकित्सकीय विशेषज्ञों के अनुसार, आंखों में रासायनिक जलन और विस्फोट से होने वाली चोटें कई बार लंबे समय तक परेशानी पैदा कर सकती हैं।

इसी वजह से सरकार ने लोगों, विशेषकर बच्चों और अभिभावकों को इन उपकरणों से दूर रहने की सलाह दी है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी दिए सख्त निर्देश

भोपाल पुलिस के आदेश से पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी राज्यभर के अधिकारियों को कार्बाइड गन और अवैध पटाखों पर सख्ती बरतने के निर्देश दिए थे।

21 अक्टूबर को आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से त्योहारों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखने को कहा था।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि कार्बाइड गन और कार्बाइड लैंप जैसे उपकरणों के इस्तेमाल पर प्रभावी रोक लगाई जाए।

इसके साथ ही उन्होंने अवैध पटाखों की बिक्री, विस्फोटक सामग्री के गैरकानूनी भंडारण और खतरनाक उपकरणों की उपलब्धता पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए।

उन्होंने चेतावनी दी कि गंभीर लापरवाही सामने आने पर संबंधित जिले के अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

बाजारों और दुकानों की जांच पर जोर

त्योहारी सीजन में पटाखों की बिक्री बढ़ने के कारण पुलिस प्रशासन अवैध कारोबार पर निगरानी मजबूत कर रहा है।

राज्य के विभिन्न जिलों में पुलिस को पटाखा दुकानों, गोदामों और संदिग्ध बिक्री केंद्रों की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।

ग्वालियर पुलिस ने भी कार्बाइड गन, कैल्शियम कार्बाइड और अवैध पटाखों की बिक्री रोकने के लिए विशेष जांच अभियान चलाने की घोषणा की है।

इस अभियान में हार्डवेयर दुकानों, फैब्रिकेशन प्रतिष्ठानों और संबंधित रसायनों की अवैध बिक्री पर निगरानी रखी जाएगी।

इसके अलावा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रतिबंधित उपकरणों की बिक्री रोकने पर भी जोर दिया जा रहा है।

भीड़भाड़ वाले इलाकों में विशेष सतर्कता

पुलिस प्रशासन का मानना है कि त्योहारों के दौरान बाजारों, आवासीय कॉलोनियों और सार्वजनिक स्थानों पर बड़ी संख्या में लोग एकत्र होते हैं।

ऐसे स्थानों पर खतरनाक विस्फोटक उपकरणों का इस्तेमाल गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकता है।

प्रशासन की प्राथमिकता है कि बच्चों, बुजुर्गों और अन्य नागरिकों को ऐसे उपकरणों के खतरे से बचाया जाए।

इसी उद्देश्य से अधिकारियों को आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने संवेदनशील स्थानों पर दमकल वाहन और प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता बनाए रखने तथा अस्पतालों को आपात स्थिति के लिए तैयार रखने पर भी जोर दिया है।

आदेश का उल्लंघन करने वालों पर होगी कानूनी कार्रवाई

भोपाल पुलिस कमिश्नर द्वारा जारी आदेश के अनुसार, प्रतिबंधित गतिविधियों में शामिल पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

यह धारा विधिवत जारी सार्वजनिक आदेश की अवज्ञा से संबंधित है। मामले की परिस्थितियों के अनुसार अन्य प्रासंगिक कानूनी प्रावधान भी लागू हो सकते हैं।

पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे कार्बाइड गन, कार्बाइड तोप और ऐसे अन्य खतरनाक उपकरणों की खरीद या इस्तेमाल न करें।

यदि किसी क्षेत्र में इन उपकरणों का अवैध निर्माण या बिक्री की जानकारी मिलती है, तो इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दी जा सकती है।

प्रशासन का कहना है कि दिवाली खुशियों और रोशनी का त्योहार है। इसे सुरक्षित बनाने के लिए आम नागरिकों और व्यापारियों का सहयोग आवश्यक है।

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