- Home
- /
- राज्य
- /
- मध्य प्रदेश
- /
- मध्य प्रदेश में परिवहन...
मध्य प्रदेश में परिवहन व्यवस्था में बड़ा बदलाव, राज्य परिवहन प्राधिकरण का पुनर्गठन

भोपाल। मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने प्रदेश की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित, सुरक्षित और आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य सरकार ने गुरुवार, 29 अक्टूबर को परिवहन विभाग के अंतर्गत मध्य प्रदेश राज्य परिवहन प्राधिकरण का पुनर्गठन कर दिया। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार, गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव को राज्य परिवहन प्राधिकरण का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। सरकार का यह निर्णय ऐसे समय आया है, जब प्रदेश में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के माध्यम से सार्वजनिक बस परिवहन को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। इस योजना के पहले चरण में सात प्रमुख शहरों में 351 बसों का संचालन शुरू किया गया है। यात्रियों की सुविधा के लिए डिजिटल टिकटिंग, बसों की निगरानी और ऑनलाइन बुकिंग जैसी आधुनिक व्यवस्थाओं को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में प्रदेश के अधिक से अधिक शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क से जोड़ना है।
राज्य सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार, मध्य प्रदेश राज्य परिवहन प्राधिकरण के पुनर्गठन के बाद गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव को इसकी अध्यक्षता की जिम्मेदारी सौंपी गई है। परिवहन व्यवस्था के संचालन और नियामकीय कामकाज में राज्य परिवहन प्राधिकरण की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यह संस्था मोटर वाहन अधिनियम के तहत निर्धारित अधिकारों और जिम्मेदारियों का निर्वहन करती है। इसके माध्यम से परिवहन संबंधी प्रशासनिक व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने में सहायता मिल सकती है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार सार्वजनिक परिवहन सेवाओं के विस्तार पर जोर दे रही है। इसी उद्देश्य से 25 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की शुरुआत की गई थी। भोपाल में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मोहन यादव और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 351 बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इस योजना के माध्यम से शहरों के भीतर और एक शहर से दूसरे शहर के बीच यात्रियों को बेहतर बस सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के पहले चरण में प्रदेश के सात प्रमुख शहरों को शामिल किया गया है। इनमें इंदौर, भोपाल, जबलपुर, रीवा, देवास, कटनी और भिंड शामिल हैं। कुल 351 बसों में 120 इंटरसिटी और 231 इंट्रासिटी बसें शामिल हैं। इंटरसिटी बसों का उद्देश्य विभिन्न शहरों के बीच यात्रियों को परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है, जबकि इंट्रासिटी बसें शहरों के भीतर लोगों की दैनिक आवाजाही को आसान बनाने के लिए संचालित की जा रही हैं।
योजना के तहत सबसे अधिक 145 बसें इंदौर को उपलब्ध कराई गई हैं। इनमें 50 इंटरसिटी और 95 इंट्रासिटी बसें शामिल हैं। राजधानी भोपाल में 106 बसों की व्यवस्था की गई है, जिनमें 23 इंटरसिटी और 83 इंट्रासिटी बसें हैं। इसी तरह जबलपुर में 67 बसें शामिल हैं, जिनमें 14 इंटरसिटी और 53 इंट्रासिटी बसें हैं। इसके अलावा रीवा में 18, देवास में 10, कटनी में तीन और भिंड में दो इंटरसिटी बसों की व्यवस्था की गई है।
सरकार का मानना है कि इन बस सेवाओं के विस्तार से आम नागरिकों, विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों और व्यापारियों को सुविधा मिलेगी। सार्वजनिक परिवहन का बेहतर नेटवर्क तैयार होने से निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिल सकती है। इसके अलावा छोटे शहरों और कस्बों के बीच संपर्क बेहतर होने से स्थानीय व्यापार तथा आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
प्रदेश सरकार सार्वजनिक परिवहन में डिजिटल तकनीक के उपयोग को भी प्राथमिकता दे रही है। बस यात्रियों के लिए टिकट लेने की प्रक्रिया को सरल और सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से ऑनलाइन सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है। इंदौर, भोपाल और जबलपुर की सिटी बसों में 'चलो' मोबाइल ऐप के माध्यम से ऑनलाइन टिकट बुकिंग की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इस ऐप की मदद से यात्रियों को बस सेवाओं की जानकारी प्राप्त करने और यात्रा की योजना बनाने में आसानी हो सकती है।
इसके अलावा यात्रियों को बसों की लोकेशन, उनके आने-जाने के निर्धारित समय और रूट से संबंधित जानकारी डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित की जा रही है। इंदौर में सिटी बस यात्रियों के लिए बस पास की सुविधा भी प्रदान की गई है। डिजिटल सेवाओं के विस्तार से टिकट व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने और यात्रियों को बेहतर अनुभव उपलब्ध कराने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अंतर्गत बसों की निगरानी के लिए इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम का उपयोग किया जा रहा है। इस व्यवस्था के माध्यम से बसों की लोकेशन, संचालन, समयबद्धता और अन्य गतिविधियों की निगरानी की जा सकेगी। इसके लिए मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और उसकी सहायक कंपनियों में कमांड एवं कंट्रोल सेंटर स्थापित किए गए हैं।
बसों की निगरानी के साथ यात्रियों की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। परिवहन व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बसों के निर्धारित रूट और समय का पालन सुनिश्चित करने से यात्रियों को अनावश्यक इंतजार से राहत मिल सकती है।
सरकार ने आने वाले वर्षों में सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क को बड़े स्तर पर विकसित करने की योजना बनाई है। मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के विजन 2030-31 के तहत प्रदेश में 15 हजार से अधिक सार्वजनिक बसों का नेटवर्क विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके माध्यम से लगभग 30 लाख यात्रियों को सुविधा उपलब्ध कराने की योजना है।
इसके साथ ही वर्ष 2031 तक प्रदेश की 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को बस सेवाओं से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन सुविधाओं की कमी दूर करने की दिशा में मदद मिल सकती है। खासकर उन गांवों और कस्बों के लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है, जहां नियमित सार्वजनिक परिवहन सेवाएं सीमित हैं।
राज्य सरकार की योजना के अनुसार, सार्वजनिक बसों का संचालन निजी ऑपरेटरों के माध्यम से किया जा सकता है, जबकि सरकार निगरानी और नियामकीय व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालेगी। इससे बस संचालन की गुणवत्ता, समयबद्धता और सेवा मानकों को बेहतर बनाए रखने का प्रयास किया जाएगा।
परिवहन व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए प्रशिक्षित चालकों की उपलब्धता भी आवश्यक है। इसी उद्देश्य से विभिन्न स्थानों पर चालक प्रशिक्षण केंद्रों को विकसित करने की योजना है। आधुनिक वाहनों के संचालन और सड़क सुरक्षा से जुड़े प्रशिक्षण के माध्यम से यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का प्रयास किया जा रहा है।
राज्य परिवहन प्राधिकरण के पुनर्गठन को प्रदेश की परिवहन व्यवस्था में प्रशासनिक सुधार के रूप में देखा जा रहा है। इससे नियामकीय कामकाज और परिवहन संबंधी व्यवस्थाओं में समन्वय बेहतर होने की उम्मीद है। हालांकि पुनर्गठन के वास्तविक परिणाम आने वाले समय में प्रशासनिक फैसलों और सेवाओं के संचालन के आधार पर स्पष्ट होंगे।
फिलहाल प्रदेश में 351 बसों के साथ शुरू की गई मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा को विस्तार देने की दिशा में सरकार काम कर रही है। डिजिटल टिकटिंग, बसों की रियल टाइम निगरानी और ग्रामीण क्षेत्रों तक परिवहन सुविधाएं पहुंचाने की योजनाओं से आम नागरिकों को लाभ मिलने की संभावना है। यदि निर्धारित लक्ष्यों के अनुसार बस नेटवर्क का विस्तार होता है तो आने वाले वर्षों में मध्य प्रदेश की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकता है।





