मध्य प्रदेश

रूफटॉप सोलर में बड़ी छलांग, अक्टूबर तक एक लाख कनेक्शन का लक्ष्य

Kavita2
16 Sept 2026 10:21 AM IST
रूफटॉप सोलर में बड़ी छलांग, अक्टूबर तक एक लाख कनेक्शन का लक्ष्य
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इंदौर। मध्य प्रदेश में रूफटॉप सोलर को बढ़ावा देने की मुहिम तेजी से आगे बढ़ रही है। मध्य प्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी (वेस्ट डिस्कॉम) के मालवा-निमाड़ क्षेत्र में रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन की संख्या 90 हजार के पार पहुंच गई है। कंपनी को उम्मीद है कि मौजूदा रफ्तार जारी रही तो अक्टूबर के मध्य तक यह आंकड़ा एक लाख को पार कर जाएगा। केंद्र सरकार की ‘पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना’ और अन्य सौर ऊर्जा पहलों ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

वेस्ट डिस्कॉम अपने सेवा क्षेत्र में उपभोक्ताओं को घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रही है। इसके साथ ही पात्र उपभोक्ताओं को केंद्र सरकार की योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी का लाभ दिलाने और आवेदन से लेकर कनेक्शन तक की प्रक्रिया को सुगम बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

कंपनी की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक मालवा-निमाड़ क्षेत्र में अब तक 90 हजार से अधिक रूफटॉप सोलर प्लांट लगाए जा चुके हैं। इनमें पीएम सूर्य घर योजना के साथ दूसरी योजनाओं और व्यक्तिगत स्तर पर स्थापित किए गए सोलर सिस्टम भी शामिल हैं। बढ़ती संख्या से संकेत मिल रहा है कि घरेलू उपभोक्ताओं के बीच सौर ऊर्जा को लेकर दिलचस्पी बढ़ रही है।

अक्टूबर में एक लाख का आंकड़ा पार करने की उम्मीद

वेस्ट डिस्कॉम को उम्मीद है कि आने वाले कुछ सप्ताह में करीब 10 हजार अतिरिक्त रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन होने के बाद कुल संख्या एक लाख के पार पहुंच जाएगी। इसके लिए कंपनी अलग-अलग क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को जागरूक करने के साथ आवेदनों और तकनीकी प्रक्रियाओं को तेजी से पूरा करने पर काम कर रही है।

रूफटॉप सोलर सिस्टम का सबसे बड़ा फायदा यह है कि उपभोक्ता अपने घर की छत पर ही बिजली पैदा कर सकते हैं। दिन के समय सोलर पैनल से पैदा होने वाली बिजली का उपयोग घर में किया जा सकता है। निर्धारित व्यवस्था के तहत अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेजी जा सकती है और नेट मीटरिंग के जरिए इसका समायोजन किया जाता है।

पीएम सूर्य घर योजना से बढ़ा रुझान

केंद्र सरकार की पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना का उद्देश्य घरों में रूफटॉप सोलर को बढ़ावा देना है। योजना के तहत पात्र घरेलू उपभोक्ताओं को सोलर सिस्टम लगाने के लिए निर्धारित क्षमता के अनुसार केंद्रीय वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है। इससे सोलर प्लांट लगाने की शुरुआती लागत कम करने में मदद मिलती है।

वेस्ट डिस्कॉम की कोशिश है कि अधिक से अधिक पात्र उपभोक्ताओं तक योजना की जानकारी पहुंचे और उन्हें सब्सिडी समेत उपलब्ध सुविधाओं का लाभ मिले। इसके लिए उपभोक्ताओं को आवेदन, तकनीकी स्वीकृति, सोलर प्लांट की स्थापना और नेट मीटरिंग से संबंधित प्रक्रियाओं की जानकारी दी जा रही है।

मालवा-निमाड़ में तेजी से बढ़ रहा सोलर नेटवर्क

मालवा-निमाड़ वेस्ट डिस्कॉम का बड़ा सेवा क्षेत्र है। इंदौर समेत क्षेत्र के कई शहरों और ग्रामीण इलाकों में घरेलू उपभोक्ता रूफटॉप सोलर अपना रहे हैं। 90 हजार से ज्यादा इंस्टॉलेशन का आंकड़ा इस क्षेत्र में सौर ऊर्जा के बढ़ते इस्तेमाल को दिखाता है।

एक लाख का आंकड़ा पार होने के बाद यह नेटवर्क और बड़ा हो जाएगा। इससे पारंपरिक स्रोतों से मिलने वाली बिजली पर कुछ हद तक निर्भरता कम करने के साथ उपभोक्ताओं को अपने स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा पैदा करने का अवसर मिलेगा।

बिजली बिल कम करने में मिल सकती है मदद

रूफटॉप सोलर लगाने वाले परिवारों के लिए बिजली बिल में संभावित बचत इसका प्रमुख आकर्षण है। सोलर सिस्टम से दिन में पैदा होने वाली बिजली का घर में इस्तेमाल होने से ग्रिड से ली जाने वाली बिजली की मात्रा कम हो सकती है। वास्तविक बचत सोलर प्लांट की क्षमता, बिजली की खपत, धूप की उपलब्धता और लागू नेट मीटरिंग व्यवस्था पर निर्भर करती है।

योजना के जरिए सरकार घरेलू स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ाना चाहती है। बड़ी संख्या में घरों पर सोलर प्लांट स्थापित होने से कुल सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता में भी वृद्धि होती है।

सब्सिडी दिलाने में मदद कर रही कंपनी

वेस्ट डिस्कॉम केवल सोलर कनेक्शन बढ़ाने पर ही ध्यान नहीं दे रही, बल्कि पात्र उपभोक्ताओं को निर्धारित सब्सिडी प्राप्त करने की प्रक्रिया में सहयोग देने पर भी जोर है। कई उपभोक्ताओं के लिए आवेदन, दस्तावेज, तकनीकी स्वीकृति और नेट मीटरिंग जैसी प्रक्रियाओं को समझना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में कंपनी स्तर पर मार्गदर्शन उपलब्ध कराना योजना के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

सोलर प्लांट लगाने से पहले उपभोक्ताओं को अपनी औसत बिजली खपत और घर की छत पर उपलब्ध जगह के आधार पर उचित क्षमता का सिस्टम चुनना होता है। इसके बाद अधिकृत प्रक्रिया के जरिए आवेदन और स्थापना की जाती है।

स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में बड़ा कदम

रूफटॉप सोलर का विस्तार पर्यावरण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। सौर ऊर्जा से बिजली उत्पादन के दौरान जीवाश्म ईंधन आधारित उत्पादन की तुलना में प्रत्यक्ष कार्बन उत्सर्जन काफी कम होता है। घरों की खाली छतों का इस्तेमाल बिजली उत्पादन के लिए होने से अलग से बड़े भू-भाग की आवश्यकता भी नहीं पड़ती।

मालवा-निमाड़ क्षेत्र में 90 हजार से अधिक रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित होने के बाद अब वेस्ट डिस्कॉम की नजर एक लाख के आंकड़े पर है। कंपनी का अनुमान है कि अक्टूबर के मध्य तक यह उपलब्धि हासिल हो सकती है। यदि इंस्टॉलेशन की मौजूदा गति बनी रहती है तो आने वाले समय में क्षेत्र में रूफटॉप सोलर से जुड़ने वाले घरेलू उपभोक्ताओं की संख्या और तेजी से बढ़ सकती है।

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