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मोहन कैबिनेट का बड़ा फैसला, 8,225 करोड़ से अधिक के प्रस्तावों को मंजूरी

भोपाल। मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने प्रदेश में विकास कार्यों को गति देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में वन संरक्षण, सिंचाई, शिक्षा, सामाजिक न्याय और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने से जुड़े कई प्रस्तावों को मंजूरी प्रदान की गई। विभिन्न विकास और कल्याणकारी प्रस्तावों के लिए 8,225 करोड़ रुपये से अधिक की स्वीकृति की खबर सामने आई है।
कैबिनेट बैठक के बाद सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य काश्यप ने फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार विकास कार्यों के साथ पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दे रही है। मुख्यमंत्री ने नगरीय निकायों में खरीदी से जुड़ी अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए भ्रष्टाचार के मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
कैंपा फंड के तहत 2,050 करोड़ रुपये की कार्ययोजना मंजूर
कैबिनेट बैठक में पर्यावरण संरक्षण और वनों के विकास को प्राथमिकता देते हुए कैंपा (CAMPA) फंड के अंतर्गत 2,050 करोड़ रुपये की कार्ययोजना को स्वीकृति दी गई।
कैंपा निधि का उपयोग मुख्य रूप से प्रतिपूरक वनीकरण, वन संरक्षण और वन क्षेत्रों के विकास से जुड़ी गतिविधियों में किया जाता है। इस स्वीकृति से प्रदेश में वन संरक्षण संबंधी कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है।
मध्य प्रदेश वन संपदा की दृष्टि से देश के प्रमुख राज्यों में शामिल है। ऐसे में वन क्षेत्रों के संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखने के लिए इस प्रकार की योजनाओं को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि, स्वीकृत कार्ययोजना के अंतर्गत जिलावार कितनी राशि खर्च होगी और किन परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी, इसकी विस्तृत जानकारी संबंधित विभाग के क्रियान्वयन आदेशों से स्पष्ट होगी।
आर्थिक अपराधों की जांच के लिए EOW को 345 करोड़ रुपये
राज्य सरकार ने आर्थिक अपराधों की जांच और संबंधित प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) के लिए 345 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है।
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ सरकारी धन के दुरुपयोग, वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से जुड़े विभिन्न मामलों की जांच करता है। ऐसे में इस विभाग के लिए वित्तीय प्रावधान को प्रशासनिक जवाबदेही मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
सरकार का जोर भ्रष्टाचार संबंधी मामलों में प्रभावी जांच और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने पर है।
नगरीय निकायों में खरीदी घोटालों पर सख्ती, 392 लोगों पर कार्रवाई
कैबिनेट बैठक के दौरान नगरीय निकायों में सामग्री की खरीदी से जुड़ी अनियमितताओं का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा।
मंत्री चैतन्य काश्यप ने जानकारी दी कि पिछले छह महीनों के दौरान सामने आए 201 मामलों में कुल 392 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
इन अनियमितताओं की पहचान के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सहित अन्य तकनीकी माध्यमों का उपयोग किए जाने की जानकारी भी दी गई।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने संबंधित विभागों को जांच प्रक्रिया में तेजी लाने और जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए।
सरकार की ओर से दोहराई गई जीरो टॉलरेंस नीति का उद्देश्य सरकारी खरीद प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ाना और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग पर रोक लगाना है।
सिंचाई परियोजनाओं के लिए 3,378 करोड़ रुपये मंजूर
किसानों और कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए कैबिनेट ने नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की चार योजनाओं को जारी रखने का फैसला लिया है।
इन योजनाओं के लिए 3,378 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। ये परियोजनाएं छिंदवाड़ा, मुरैना, सिवनी और सागर जिलों से संबंधित हैं।
इन परियोजनाओं के माध्यम से सिंचाई सुविधाओं का विस्तार और पहले से संचालित कार्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
सिंचाई संसाधनों की उपलब्धता किसानों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि पर्याप्त पानी मिलने से खेती की निरंतरता बनाए रखने और वर्षा पर निर्भरता कम करने में सहायता मिल सकती है।
चार नए जिलों में खुलेंगे जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय
कैबिनेट ने प्रदेश के चार नवगठित जिलों निवाड़ी, मऊगंज, पांढुर्णा और मैहर में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय स्थापित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है।
इन कार्यालयों के संचालन के लिए आवश्यक पद स्वीकृत किए गए हैं। इस फैसले से संबंधित जिलों में शिक्षा विभाग के प्रशासनिक कार्यों को स्थानीय स्तर पर संचालित करने में सुविधा होगी।
शिक्षा विभाग से संबंधित विभिन्न मामलों के निस्तारण में भी नई व्यवस्था उपयोगी साबित हो सकती है।
सामाजिक न्याय की सात योजनाओं के लिए 351 करोड़ रुपये
सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की सात योजनाओं को जारी रखने के लिए कैबिनेट ने 351 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं।
इन योजनाओं की निरंतरता से संबंधित लाभार्थियों तक सरकारी सहायता और सुविधाएं पहुंचाने का कार्य जारी रह सकेगा।
सरकार का उद्देश्य सामाजिक कल्याण की योजनाओं के संचालन को बनाए रखना और पात्र नागरिकों को निर्धारित लाभ उपलब्ध कराना है।
कम बारिश वाले 12 जिलों के किसानों पर भी चर्चा
बैठक में प्रदेश के कम वर्षा वाले जिलों की स्थिति पर भी विचार-विमर्श किया गया।
सरकार के सामने 12 जिलों में कम बारिश का मुद्दा रखा गया। इनमें अलीराजपुर, इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार, शाजापुर और पांढुर्णा सहित अन्य प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर चर्चा की गई।
अलीराजपुर जिले में सामान्य से लगभग 52 प्रतिशत कम बारिश दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।
मुख्यमंत्री ने प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का आकलन करने और किसानों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया। हालांकि, इन जिलों को सूखाग्रस्त घोषित करने के संबंध में अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है।
दिसंबर में होगा मंत्रियों का चिंतन शिविर
कैबिनेट बैठक में सरकार के आगामी कार्यक्रमों पर भी चर्चा हुई। जानकारी के अनुसार, 21 और 22 दिसंबर को दो दिवसीय चिंतन शिविर आयोजित करने का प्रस्ताव है।
इसमें सरकार के तीन वर्षों के कामकाज की समीक्षा के साथ आगामी विकास योजनाओं और प्राथमिकताओं पर चर्चा की जाएगी।
इसके अलावा दीपावली के अवसर पर स्थानीय कुम्हारों और माटी कला से जुड़े कारीगरों को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया गया।
मुख्यमंत्री ने मंत्रियों से अपने प्रभार वाले जिलों में स्थानीय उत्पादों और मिट्टी के दीयों की खरीद को बढ़ावा देने की अपील की।
विकास के साथ पारदर्शिता पर सरकार का जोर
मोहन कैबिनेट के इन फैसलों से स्पष्ट है कि सरकार सिंचाई, वन संरक्षण, शिक्षा और सामाजिक कल्याण की योजनाओं को आगे बढ़ाने के साथ प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने पर भी ध्यान दे रही है।
नगरीय निकायों में अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई और आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ के लिए वित्तीय स्वीकृति को इसी दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।





