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ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में शीतला माता मंदिर के पास हुए भीषण सड़क हादसे के बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। इस दर्दनाक दुर्घटना में 15 लोगों की मौत और 27 लोगों के घायल होने की खबर सामने आने के बाद कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट रुचिका चौहान ने घटना की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी किए हैं। अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (एडीएम) सीबी प्रसाद को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। उन्हें सात दिनों के भीतर जांच पूरी कर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। जांच में हादसे के कारणों, सुरक्षा व्यवस्था में संभावित लापरवाही और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी।
शीतला माता मंदिर के पास हुआ था भीषण हादसा
ग्वालियर में रविवार, 18 अक्टूबर की देर रात करीब डेढ़ बजे शीतला माता मंदिर मार्ग पर भीषण सड़क दुर्घटना हुई थी। नवरात्रि के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे थे। इसी दौरान धान से भरा एक तेज रफ्तार ट्रक अनियंत्रित होकर श्रद्धालुओं की भीड़ में घुस गया।
ट्रक की चपेट में आने से कई श्रद्धालुओं की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हो गए। अचानक हुई इस घटना से मंदिर परिसर और आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के समय श्रद्धालु मंदिर में दर्शन के लिए कतार में खड़े थे। तभी ट्रक ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। दुर्घटना के बाद स्थानीय लोग घायलों की मदद के लिए दौड़े।
सात दिनों में जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश
जिला मजिस्ट्रेट रुचिका चौहान ने घटना की गंभीरता को देखते हुए मजिस्ट्रियल जांच कराने का निर्णय लिया है।
जांच की जिम्मेदारी अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट सीबी प्रसाद को सौंपी गई है। उन्हें सात दिनों के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट कलेक्टर कार्यालय में प्रस्तुत करनी होगी।
जांच अधिकारी को हादसे की वास्तविक वजह का पता लगाने के साथ यह भी जांचने के निर्देश दिए गए हैं कि ट्रक दुर्घटनास्थल तक कैसे पहुंचा।
इसके अलावा घटना के दौरान किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है, तो उसकी जिम्मेदारी निर्धारित करने के लिए भी जांच की जाएगी।
प्रतिबंधित रास्ते पर कैसे पहुंचा ट्रक?
इस दर्दनाक हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिस मार्ग पर भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित था, वहां ट्रक कैसे पहुंच गया।
जानकारी के अनुसार, नवरात्रि के कारण मंदिर मार्ग पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ थी। सुरक्षा के मद्देनजर वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाए गए थे।
इसके बावजूद धान से लदा ट्रक मंदिर के पास पहुंच गया और श्रद्धालुओं को कुचलते हुए आगे बढ़ गया।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, ट्रक चिनौर की ओर से आ रहा था। ढलान वाले रास्ते पर चालक वाहन से नियंत्रण खो बैठा। हालांकि, वाहन के अनियंत्रित होने की वास्तविक वजह की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
प्रशासनिक लापरवाही की भी होगी जांच
मजिस्ट्रियल जांच के दौरान घटनास्थल पर लागू यातायात प्रतिबंधों और सुरक्षा व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की जाएगी।
जांच अधिकारी यह पता लगाएंगे कि दुर्घटना के समय पुलिस और अन्य संबंधित विभागों की ओर से क्या व्यवस्थाएं की गई थीं।
इसके अलावा यह भी जांचा जाएगा कि प्रतिबंधित मार्ग पर ट्रक के प्रवेश को रोकने के लिए पर्याप्त इंतजाम थे या नहीं।
यदि सुरक्षा व्यवस्था में किसी प्रकार की कमी या लापरवाही सामने आती है, तो उसके लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान की जाएगी।
जांच रिपोर्ट में भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक सुझाव भी शामिल किए जाएंगे।
आठ पुलिसकर्मी निलंबित, अधिकारी पर कार्रवाई
हादसे के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घटना पर दुख व्यक्त करते हुए प्रशासनिक लापरवाही को गंभीरता से लिया।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर ग्वालियर के सिटी एसपी स्तर के अधिकारी को पद से हटाया गया और आठ अन्य पुलिसकर्मियों को निलंबित करने की कार्रवाई की गई।
यह कार्रवाई प्रारंभिक स्तर पर सामने आई कथित लापरवाही के मद्देनजर की गई है। विस्तृत जांच रिपोर्ट के बाद जिम्मेदारी की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
ट्रक चालक और मालिक गिरफ्तार
दुर्घटना के बाद पुलिस ने ट्रक चालक और वाहन मालिक के खिलाफ भी कार्रवाई की है।
पुलिस के अनुसार, ट्रक चालक दिलबाग सिंह और वाहन मालिक हरप्रीत सिंह को राजस्थान से गिरफ्तार किया गया है।
प्रारंभिक जांच में यह जानकारी भी सामने आई कि ट्रक चालक कथित रूप से नेविगेशन एप के निर्देशों का पालन करते हुए प्रतिबंधित मार्ग पर पहुंच गया था।
हालांकि, हादसे के लिए तकनीकी खराबी, चालक की लापरवाही अथवा अन्य परिस्थितियां किस हद तक जिम्मेदार थीं, इसका अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद सामने आएगा।
मृतकों और घायलों के परिजनों को आर्थिक सहायता
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के लिए चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता की घोषणा की है।
इसके अलावा गंभीर रूप से घायल लोगों को दो-दो लाख रुपये और अन्य घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता देने की घोषणा की गई है।
पीड़ित परिवारों ने उठाए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
इस हादसे के बाद मृतकों के परिजनों में गहरा आक्रोश है। कई परिवारों ने मंदिर मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं।
पीड़ित परिवारों का कहना है कि जब दोपहिया वाहनों तक को प्रतिबंधित मार्ग पर जाने की अनुमति नहीं थी, तो भारी ट्रक वहां कैसे पहुंच गया।
कुछ परिजनों ने हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य में देरी होने के भी आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
भविष्य में हादसे रोकने के लिए मांगे सुझाव
मजिस्ट्रियल जांच का उद्देश्य केवल दुर्घटना के कारणों का पता लगाना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक उपाय सुझाना भी है।
जांच अधिकारी से यातायात प्रबंधन, भारी वाहनों पर प्रतिबंध, पुलिस की तैनाती और धार्मिक आयोजनों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित सुझाव देने को कहा गया है।
फिलहाल जिला प्रशासन की ओर से गठित जांच व्यवस्था पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। सात दिनों के भीतर आने वाली रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि इतना बड़ा हादसा किन परिस्थितियों में हुआ और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।





