मध्य प्रदेश

Madhya प्रदेश में प्रमोशन घोटाले पर बड़ा एक्शन, अधिकारियों पर गिरेगी गाज

Ratna Netam
24 July 2026 6:29 PM IST
Madhya  प्रदेश में प्रमोशन घोटाले पर बड़ा एक्शन, अधिकारियों पर गिरेगी गाज
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भोपाल : मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। नियमों की गलत व्याख्या कर कर्मचारियों को पदोन्नति दिए जाने के मामले में अब सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने सख्त रुख अपनाया है। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि किसी कर्मचारी को निर्धारित नियमों के विपरीत पदोन्नति दी गई है तो ऐसे आदेशों को निरस्त किया जाएगा। इसके साथ ही गलत तरीके से पदोन्नति आदेश जारी करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

यह मामला सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन से जुड़ा हुआ है, जहां एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को सहायक ग्रेड-3 के पद पर पदोन्नति दिए जाने को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कर्मचारी को इस शर्त के साथ पदोन्नति दी गई कि वह दो वर्ष के भीतर सीपीसीटी परीक्षा उत्तीर्ण कर लेगा। इसके आधार पर 10 जुलाई 2026 को पदोन्नति आदेश जारी कर दिया गया।

हालांकि सामान्य प्रशासन विभाग ने इस प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है। विभाग का कहना है कि कर्मचारियों की पदोन्नति से संबंधित नियमों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसमें सीपीसीटी परीक्षा पास करने की शर्त के आधार पर पदोन्नति देने का प्रावधान हो। जीएडी ने कहा है कि नियमों की गलत व्याख्या कर जारी किए गए आदेशों को मान्यता नहीं दी जा सकती।

मामले की जानकारी सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर जांच शुरू कर दी गई है। विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि पदोन्नति आदेश जारी करने से पहले संबंधित अधिकारियों ने नियमों का सही तरीके से परीक्षण किया था या नहीं। यदि जांच में लापरवाही या नियमों की अनदेखी सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागों और संस्थानों को निर्देश दिए हैं कि कर्मचारियों की पदोन्नति से जुड़े मामलों में शासन द्वारा निर्धारित नियमों का सख्ती से पालन किया जाए। विभाग ने चेतावनी दी है कि भविष्य में यदि किसी कर्मचारी को गलत तरीके से लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से नियमों के विपरीत आदेश जारी किए जाते हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।

सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए शासन लगातार नियमों की समीक्षा कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि पदोन्नति कर्मचारियों के सेवाकाल और योग्यता के आधार पर निर्धारित नियमों के अनुसार ही दी जानी चाहिए। किसी भी तरह की मनमानी या नियमों की गलत व्याख्या से न केवल प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित होती है, बल्कि अन्य कर्मचारियों के अधिकारों पर भी असर पड़ता है।

उज्जैन विश्वविद्यालय के इस मामले के बाद प्रदेश के अन्य विभागों में भी पदोन्नति आदेशों की समीक्षा किए जाने की संभावना है। जीएडी यह सुनिश्चित करना चाहता है कि कहीं अन्य स्थानों पर भी नियमों के विपरीत पदोन्नति तो नहीं दी गई है। यदि ऐसे मामले सामने आते हैं तो उन्हें भी निरस्त करने की कार्रवाई की जा सकती है।

इस पूरे मामले ने सरकारी विभागों में पदोन्नति प्रक्रिया और नियमों के पालन को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और आगे होने वाली प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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