- Home
- /
- राज्य
- /
- मध्य प्रदेश
- /
- मध्य प्रदेश में अब तक...
मध्य प्रदेश में अब तक 88 फीसदी मौसमी बारिश, 37 जिलों में सामान्य से कम बरसे बादल

भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून सीजन समाप्त होने में लगभग 15 दिन बाकी हैं और राज्य को अब तक अपने मौसमी बारिश कोटे का करीब 88 प्रतिशत पानी मिला है। प्रदेश में वर्षा का वितरण एक समान नहीं रहा है। भोपाल और ग्वालियर सहित 18 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है, जबकि इंदौर, उज्जैन और जबलपुर समेत 37 जिले अभी भी सामान्य वर्षा के स्तर से नीचे हैं। निवाड़ी में सामान्य से 49 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है, वहीं अलीराजपुर सबसे अधिक वर्षा की कमी वाले जिलों में शामिल है।
बारिश के उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश के कुछ जिलों में मानसून मेहरबान रहा, लेकिन कई क्षेत्रों में बारिश की कमी बनी हुई है। एक तरफ निवाड़ी में सामान्य से करीब आधी अधिक वर्षा दर्ज की गई है, वहीं दूसरी ओर अलीराजपुर में मौसमी बारिश का अंतर काफी अधिक है। इससे स्पष्ट है कि प्रदेश स्तर पर कुल बारिश का आंकड़ा संतोषजनक दिखाई देने के बावजूद जिलावार स्थिति में बड़ा अंतर बना हुआ है।
इंदौर, उज्जैन और जबलपुर जैसे प्रमुख शहरों वाले जिले भी सामान्य वर्षा का स्तर हासिल नहीं कर पाए हैं। इन जिलों में मानसून के बाकी दिनों की बारिश महत्वपूर्ण होगी। यदि आने वाले दिनों में पर्याप्त पानी नहीं बरसा तो मौसमी कमी बनी रह सकती है। इसका प्रभाव जलस्रोतों, सिंचाई व्यवस्था और आगामी कृषि गतिविधियों पर पड़ सकता है।
भोपाल और ग्वालियर समेत 18 जिलों में औसत से अधिक बारिश दर्ज की गई है। इन क्षेत्रों में तालाबों, बांधों और अन्य जलस्रोतों की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रहने की संभावना है। हालांकि, किसी जिले में सामान्य से अधिक बारिश होने का अर्थ यह नहीं है कि वहां के हर हिस्से में समान मात्रा में पानी बरसा है। स्थानीय स्तर पर वर्षा के वितरण में अंतर हो सकता है।
मंगलवार को प्रदेश के लगभग सभी जिलों में कहीं-कहीं बारिश होने की संभावना जताई गई है। भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़ और विदिशा में बादल छाने के साथ वर्षा हो सकती है। इंदौर संभाग के इंदौर, धार, अलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन और झाबुआ में भी बारिश की संभावना बनी हुई है।
उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास और रतलाम में भी कुछ स्थानों पर बादल बरस सकते हैं। नर्मदापुरम, बैतूल और हरदा में वर्षा होने के आसार हैं। बारिश की तीव्रता और अवधि सभी जिलों में एक जैसी रहने की संभावना नहीं है। कुछ स्थानों पर हल्की या मध्यम बारिश हो सकती है, जबकि कई क्षेत्रों में केवल बादल छाए रह सकते हैं।
ग्वालियर-चंबल अंचल के ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड और श्योपुर में भी बारिश की संभावना है। जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडोरी और पांढुर्ना में मौसम बदल सकता है और स्थानीय स्तर पर वर्षा दर्ज की जा सकती है।
विंध्य क्षेत्र के रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज और मैहर में भी बारिश के आसार बताए गए हैं। शहडोल संभाग के शहडोल, उमरिया और अनूपपुर के साथ सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ तथा निवाड़ी में भी कहीं-कहीं पानी गिरने की संभावना है।
मौसम विभाग के उपखंड स्तरीय पूर्वानुमान में 15 सितंबर के लिए पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश में भारी बारिश की व्यापक चेतावनी दर्ज नहीं थी। इसका मतलब यह नहीं है कि बारिश पूरी तरह नहीं होगी। विभिन्न जिलों में हल्की से मध्यम बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। मौसम केंद्र भोपाल पर प्रदेश के शहरों का मौसम और जिला स्तर के पूर्वानुमान उपलब्ध कराए जाते हैं।
राज्य में बारिश का मौजूदा अंतर कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है। खरीफ फसलों के अंतिम चरण में मिट्टी में पर्याप्त नमी की जरूरत रहती है। जहां बारिश कम हुई है, वहां किसानों की निर्भरता सिंचाई के दूसरे साधनों पर बढ़ सकती है। वहीं, बहुत अधिक या लगातार बारिश होने वाले क्षेत्रों में खेतों में जलभराव से फसलों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है।
अलीराजपुर, धार, रतलाम और झाबुआ जैसे पश्चिमी जिलों में वर्षा की कमी को लेकर चिंता बनी हुई है। हाल में उपलब्ध एक रिपोर्ट में अलीराजपुर को सामान्य से 54 प्रतिशत कम वर्षा वाला जिला बताया गया था। धार में 41 प्रतिशत, रतलाम में 37 प्रतिशत और झाबुआ में 36 प्रतिशत की कमी बताई गई थी। हालांकि, बारिश के ये आंकड़े प्रतिदिन बदलते हैं और प्रकाशन के समय नवीनतम आधिकारिक आंकड़ों का उपयोग किया जाना चाहिए।
मौसम विभाग के अनुसार सामान्य वर्षा की गणना लंबे समय की औसत बारिश से तुलना करके की जाती है। सामान्य से 19 प्रतिशत तक कम या अधिक वर्षा को सामान्य श्रेणी में माना जा सकता है। इससे अधिक कमी होने पर जिला वर्षा की कमी वाली श्रेणी में आता है। इसलिए “मौसमी कोटे का 88 प्रतिशत” और “सामान्य से कम बारिश वाले जिले” दो अलग-अलग आधारों पर बताए गए आंकड़े हो सकते हैं।
मानसून की वापसी से पहले बचे हुए दिनों में होने वाली बारिश प्रदेश की अंतिम मौसमी स्थिति तय करेगी। यदि वर्षा गतिविधियां सक्रिय रहती हैं तो कमी वाले जिलों को कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि, कई जिलों में मौजूदा अंतर इतना अधिक है कि उसे कम समय में पूरी तरह भरना मुश्किल हो सकता है।
लोगों को बारिश और आकाशीय बिजली की स्थिति में खुले स्थानों, पेड़ों और बिजली के खंभों के नीचे खड़े होने से बचना चाहिए। किसानों को खेतों में काम करते समय स्थानीय मौसम चेतावनी पर ध्यान देना चाहिए। यात्रा पर निकलने से पहले भी मौसम की ताजा जानकारी देखना उपयोगी रहेगा। मौसम तेजी से बदलने की स्थिति में स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की सलाह का पालन किया जाना चाहिए।





