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दंतेवाड़ा की ऑर्गेनिक खेती पर मध्य प्रदेश की नजर, डेलीगेशन भेजने के निर्देश: CM

Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में आदिवासी किसानों द्वारा की जा रही ऑर्गेनिक खेती को लेकर मध्य प्रदेश सरकार ने रुचि दिखाई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गुरुवार को ट्राइबल अफेयर्स विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान कहा कि इस मॉडल का अध्ययन करने के लिए मध्य प्रदेश से एक डेलीगेशन भेजा जाना चाहिए।
बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में पारंपरिक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि दंतेवाड़ा जैसे क्षेत्रों में अपनाए जा रहे ऑर्गेनिक खेती के तरीकों से सीख लेकर मध्य प्रदेश में भी इन्हें लागू किया जा सकता है, जिससे किसानों की आय और कृषि गुणवत्ता दोनों में सुधार होगा।
मोहन यादव ने यह भी कहा कि राज्य के आदिवासी इलाकों में पशुपालन को बढ़ावा देना जरूरी है। उन्होंने दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए आदिवासी समुदाय की भागीदारी को और मजबूत करने पर जोर दिया। उनका कहना था कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में पशुपालन महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
इसी समीक्षा बैठक में आदिवासी कल्याण मंत्री विजय शाह ने न्यूट्रिशन ग्रांट स्कीम को लेकर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत विशेष पिछड़ी जनजातियों के परिवारों की महिला मुखियाओं के बैंक खातों में हर महीने 1,500 रुपये की राशि सीधे ट्रांसफर की जा रही है।
मंत्री के अनुसार, दिसंबर 2023 से अब तक इस योजना के तहत 2,37,550 महिलाओं को लाभ पहुंचाया गया है और कुल 432 करोड़ रुपये की राशि वितरित की जा चुकी है। यह योजना आदिवासी परिवारों में पोषण स्तर सुधारने और आर्थिक सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से चलाई जा रही है।
सरकार का मानना है कि इस प्रकार की योजनाएं न केवल आदिवासी समुदाय के जीवन स्तर को बेहतर बनाएंगी, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में भी मदद करेंगी। बैठक में अधिकारियों को योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए निगरानी मजबूत करने के निर्देश भी दिए गए।
विशेषज्ञों का कहना है कि दंतेवाड़ा जैसे क्षेत्रों में ऑर्गेनिक खेती और पारंपरिक कृषि तकनीकों का अध्ययन अन्य राज्यों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ टिकाऊ कृषि मॉडल को बढ़ावा मिल सकता है।
फिलहाल मध्य प्रदेश सरकार की ओर से डेलीगेशन भेजने की तैयारी पर काम शुरू हो गया है, जिससे दोनों राज्यों के बीच कृषि और आदिवासी विकास से जुड़ी नीतियों के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।





