मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश कांग्रेस ने भंग किया पूरा संगठनात्मक ढांचा, भाजपा ने कहा– गुटबाजी की हार

Ratna Netam
5 Aug 2026 5:07 PM IST
मध्य प्रदेश कांग्रेस ने भंग किया पूरा संगठनात्मक ढांचा, भाजपा ने कहा– गुटबाजी की हार
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भोपाल : मध्य प्रदेश कांग्रेस ने संगठनात्मक स्तर पर बड़ा फैसला लेते हुए प्रदेश संगठन के व्यापक पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस निर्णय के तहत प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अंतर्गत गठित सभी विभागों, प्रकोष्ठों और उनकी जिला, ब्लॉक सहित सभी स्तर की इकाइयों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है। पार्टी का कहना है कि यह कदम संगठन को अधिक मजबूत, सक्रिय और आगामी चुनावों के लिए तैयार करने की रणनीति का हिस्सा है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस फैसले को कांग्रेस की संगठनात्मक विफलता बताते हुए उस पर तीखा हमला बोला है।
हाल ही में दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस ने जीत दर्ज कर अपनी सीट बरकरार रखी थी। चुनाव परिणाम आने के बाद पार्टी नेतृत्व ने नई दिल्ली में वरिष्ठ नेताओं के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में चुनावी प्रदर्शन, संगठन की स्थिति और भविष्य की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई। इसी दौरान कई जिलों में संगठन की कार्यशैली अपेक्षित स्तर की नहीं होने का मुद्दा भी सामने आया। इसके बाद संगठन में व्यापक बदलाव करने का निर्णय लिया गया।
प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी ने आधिकारिक रूप से जानकारी देते हुए बताया कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के निर्देशों के अनुरूप संगठनात्मक पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसी के तहत प्रदेश कांग्रेस के अंतर्गत संचालित सभी विभागों, प्रकोष्ठों और उनकी सभी इकाइयों को तत्काल प्रभाव से भंग किया जा रहा है। नए सिरे से संगठन का गठन किया जाएगा, जिसमें कार्यकर्ताओं की सक्रियता, जनसंपर्क और संगठनात्मक क्षमता को प्राथमिकता दी जाएगी।
पार्टी सूत्रों के अनुसार कांग्रेस अब वर्ष 2028 में होने वाले मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों के साथ-साथ उससे पहले होने वाले पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों की तैयारियों में जुट गई है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि मजबूत संगठन के बिना चुनावी सफलता संभव नहीं है। इसलिए पुराने ढांचे की समीक्षा कर नए चेहरों और सक्रिय कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने की योजना बनाई जा रही है। संगठन के पुनर्गठन में स्थानीय स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ताओं को अधिक अवसर मिलने की संभावना भी जताई जा रही है।
हालांकि कांग्रेस के इस फैसले पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा प्रवक्ता अजय यादव ने कहा कि कांग्रेस द्वारा सभी विभागों और प्रकोष्ठों को भंग करना इस बात का प्रमाण है कि पार्टी को अब अपने ही संगठन पर भरोसा नहीं रह गया है। उनके अनुसार यह निर्णय कांग्रेस के भीतर बढ़ती गुटबाजी, नेतृत्व संकट और संगठनात्मक कमजोरियों को उजागर करता है।
भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस में लंबे समय से संगठन निर्माण के नाम पर समर्पित कार्यकर्ताओं की उपेक्षा होती रही है। पार्टी के भीतर पदों के वितरण को लेकर धनबल, बाहुबल और गुटबाजी के आरोप लगातार लगते रहे हैं। भाजपा प्रवक्ता ने दावा किया कि अब होने वाले नए पुनर्गठन में भी यदि पारदर्शिता नहीं बरती गई तो निष्ठावान कार्यकर्ताओं की अनदेखी जारी रहेगी और संगठन पहले जैसी समस्याओं से जूझता रहेगा।
दूसरी ओर कांग्रेस नेताओं का कहना है कि संगठन में बदलाव किसी व्यक्ति विशेष को ध्यान में रखकर नहीं किया जा रहा, बल्कि पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य पार्टी को जमीनी स्तर पर अधिक प्रभावी बनाना है। पार्टी का दावा है कि नए संगठनात्मक ढांचे के माध्यम से युवाओं, महिलाओं और अनुभवी कार्यकर्ताओं को संतुलित प्रतिनिधित्व दिया जाएगा ताकि प्रदेशभर में संगठन को नई ऊर्जा मिल सके।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस आगामी चुनावों से पहले संगठन को पूरी तरह सक्रिय करने की कोशिश कर रही है। विधानसभा चुनाव में अभी समय है, लेकिन पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों को देखते हुए पार्टी अपनी तैयारियों में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती। ऐसे में संगठन का पुनर्गठन कांग्रेस के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक कदम माना जा रहा है।
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कांग्रेस नए संगठन में किन नेताओं और कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी सौंपती है तथा यह बदलाव आगामी चुनावों में पार्टी की राजनीतिक स्थिति को कितना मजबूत बना पाता है। वहीं भाजपा ने पहले ही इस फैसले को कांग्रेस की आंतरिक कमजोरी का संकेत बताते हुए राजनीतिक हमला तेज कर दिया है।
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