मध्य प्रदेश

इंदौर में लोकायुक्त का शिकंजा, 40 हजार रिश्वत लेते बिजली कंपनी का JE गिरफ्तार

Kavita2
18 July 2026 5:24 PM IST
इंदौर में लोकायुक्त का शिकंजा, 40 हजार रिश्वत लेते बिजली कंपनी का JE गिरफ्तार
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इंदौर : मध्य प्रदेश के इंदौर में लोकायुक्त पुलिस ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए मध्य प्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (MPPKVVCL) के एक जूनियर इंजीनियर को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी अधिकारी पर एक बिल्डर से काम आगे बढ़ाने के एवज में रिश्वत मांगने का आरोप है।

लोकायुक्त पुलिस ने शनिवार को यह कार्रवाई की। गिरफ्तार किए गए जूनियर इंजीनियर की पहचान निमेश कुमार भोंडेकर के रूप में हुई है। वह इंदौर के सुखलिया जोन में असिस्टेंट इंजीनियर कार्यालय के अंतर्गत जूनियर इंजीनियर के पद पर पदस्थ थे।

लोकायुक्त अधिकारियों के अनुसार, आरोपी को 40 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया। यह कार्रवाई एक शिकायत के आधार पर की गई थी, जिसमें शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि अधिकारी द्वारा एक काम की फाइल आगे बढ़ाने के लिए रिश्वत की मांग की जा रही थी।

जानकारी के मुताबिक, यह ट्रैप ऑपरेशन 18 जुलाई को इंदौर के बिल्डर और होटल व्यवसायी शिवप्रकाश बसवाल की शिकायत के बाद किया गया। बसवाल ने लोकायुक्त कार्यालय पहुंचकर आरोपी अधिकारी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।

शिकायत में बताया गया था कि वह अंबे नगर और मारुति नगर के पास स्थित अपने GR-7 होटल में सोलर पैनल लगाने से संबंधित प्रक्रिया पूरी करवा रहे थे। इस काम से जुड़ी फाइल को आगे बढ़ाने के लिए जूनियर इंजीनियर निमेश कुमार भोंडेकर ने कथित तौर पर रिश्वत की मांग की थी।

लोकायुक्त पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि अधिकारी ने इस काम के लिए 80 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त टीम ने मामले की प्रारंभिक जांच की और आरोपों की पुष्टि होने के बाद ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई।

योजना के अनुसार, लोकायुक्त टीम ने आरोपी अधिकारी को रिश्वत लेते हुए पकड़ने के लिए जाल बिछाया। तय प्रक्रिया के तहत शिकायतकर्ता को रिश्वत की राशि लेकर भेजा गया। जैसे ही जूनियर इंजीनियर ने पैसे स्वीकार किए, लोकायुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर उसे पकड़ लिया।

कार्रवाई के दौरान आरोपी के पास से रिश्वत की रकम बरामद की गई। इसके बाद लोकायुक्त पुलिस ने आरोपी अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

लोकायुक्त अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में शिकायत मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाती है। सरकारी विभागों में रिश्वतखोरी रोकने और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए लोकायुक्त लगातार अभियान चलाता रहता है।

इस मामले में भी लोकायुक्त टीम अब आगे की जांच कर रही है। जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि क्या आरोपी अधिकारी ने इससे पहले भी किसी अन्य व्यक्ति से इसी तरह की मांग की थी या नहीं। साथ ही, मामले से जुड़े दस्तावेजों और अन्य तथ्यों की भी जांच की जाएगी।

MPPKVVCL बिजली वितरण से जुड़ी प्रमुख सरकारी कंपनी है, जो पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति और संबंधित सेवाओं का संचालन करती है। कंपनी के कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार की कार्रवाई से विभागीय स्तर पर भी सतर्कता बढ़ने की संभावना है।

लोकायुक्त की इस कार्रवाई के बाद सरकारी कार्यालयों में काम कराने के नाम पर रिश्वत मांगने वालों के खिलाफ कड़ा संदेश गया है। अधिकारियों का कहना है कि आम लोगों को किसी भी सरकारी काम के लिए रिश्वत देने की जरूरत नहीं है और ऐसी मांग होने पर संबंधित जांच एजेंसियों से शिकायत की जा सकती है।

फिलहाल आरोपी जूनियर इंजीनियर के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया जारी है। लोकायुक्त पुलिस मामले की जांच पूरी करने के बाद आगे की कार्रवाई करेगी।

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