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मध्य प्रदेश
सिवनी का जंबो सीताफल पहुंचेगा दुबई, किसानों की चमकी किस्मत
Rajeshwari Nishad
30 Oct 2026 6:48 PM IST

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सिवनी। मध्य प्रदेश के सिवनी जिले ने कृषि और बागवानी के क्षेत्र में एक नई उपलब्धि हासिल की है। अपने बड़े आकार, बेहतरीन स्वाद और खास मिठास के लिए मशहूर सिवनी का GI टैग प्राप्त 'जंबो सीताफल' अब पहली बार अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंचने जा रहा है। जिले से इस विशेष फल की पहली खेप संयुक्त अरब अमीरात के दुबई भेजने की तैयारी पूरी कर ली गई है। शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 को कलेक्टर अंजू अरुण कुमार सीताफल की पहली निर्यात खेप को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगी। इस उपलब्धि को जिले के किसानों, आदिवासी परिवारों और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूहों के लिए महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। खास बात यह है कि जून 2026 में जंबो सीताफल को भौगोलिक संकेतक यानी GI टैग मिला था। इसके कुछ ही महीनों बाद अब इस फल को विदेशी बाजार में भेजने की पहल हो रही है। जिला प्रशासन और उद्यानिकी विभाग का मानना है कि निर्यात के अवसर बढ़ने से स्थानीय किसानों की आय और ग्रामीण रोजगार को नई मजबूती मिल सकती है।
31 अक्टूबर को दुबई रवाना होगी पहली खेप
सिवनी जिला प्रशासन के अनुसार, पहली बार जंबो सीताफल को अंतरराष्ट्रीय बाजार में भेजने की व्यवस्था की गई है।उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की सहायक संचालक आशा उपवंशी वासेवार ने बताया कि पहली खेप के लिए सीताफल जिले के स्व-सहायता समूहों के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा।इन फलों की गुणवत्ता के अनुसार छंटाई, ग्रेडिंग और पैकेजिंग की जाएगी। इसके बाद इन्हें नागपुर पहुंचाया जाएगा, जहां से कार्गो के माध्यम से दुबई निर्यात करने की योजना है।पहली खेप को शनिवार को जिला कलेक्टर हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगी।यह सिवनी के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है, क्योंकि अब तक यहां के सीताफल की बिक्री मुख्य रूप से स्थानीय और घरेलू बाजारों में होती रही है।हालांकि, पहली खेप की कुल मात्रा और निर्यात से होने वाली कमाई का आधिकारिक आंकड़ा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
जून 2026 में मिला था GI टैग
सिवनी के जंबो सीताफल को जून 2026 में भौगोलिक संकेतक यानी GI टैग का दर्जा दिया गया था।यह पहचान किसी उत्पाद को उसके विशेष भौगोलिक क्षेत्र, गुणवत्ता और स्थानीय विशेषताओं के आधार पर प्रदान की जाती है।सिवनी का जंबो सीताफल मुख्य रूप से छपारा क्षेत्र के भूतबंधानी और आसपास के इलाकों में पाया जाता है।अपने बड़े आकार और स्वाद के कारण यह सामान्य सीताफल से अलग पहचान रखता है।इसका वजन लगभग 200 ग्राम से लेकर एक किलोग्राम तक हो सकता है।GI टैग मिलने के बाद इस फल को विशेष क्षेत्रीय उत्पाद के रूप में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान मिलने की संभावनाएं बढ़ी हैं।GI टैग किसी उत्पाद की क्षेत्रीय पहचान को संरक्षण देता है, हालांकि इससे हर फल का जैविक प्रमाणित होना या उसकी गुणवत्ता स्वतः सुनिश्चित होना जरूरी नहीं है।
तीन हजार से अधिक आदिवासी परिवारों की आजीविका
सिवनी जिले में सीताफल उत्पादन और संग्रहण ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।उद्यानिकी विभाग के पूर्व में जारी आंकड़ों के अनुसार, जिले में 3,000 से अधिक आदिवासी परिवार सीताफल के उत्पादन और संग्रहण से जुड़े हुए हैं।जिले में लगभग 695 हेक्टेयर क्षेत्र में सीताफल की खेती और उत्पादन होता है।इस क्षेत्र से सालाना लगभग 6,090 मीट्रिक टन सीताफल के उत्पादन का अनुमान बताया गया है।जिले में सीताफल से जुड़े कारोबार का सालाना आकार लगभग 20 से 25 करोड़ रुपये होने की जानकारी भी सामने आई है।अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी पहुंच बनने से उत्पादकों को नए खरीदार मिलने की उम्मीद है।हालांकि, निर्यात की शुरुआत से किसानों की आय कितनी बढ़ेगी, इसका आकलन वास्तविक बिक्री और भुगतान के आंकड़ों के बाद ही किया जा सकेगा।
महिला स्व-सहायता समूहों को मिलेगा नया अवसर
दुबई के लिए भेजी जा रही पहली खेप में महिला स्व-सहायता समूहों की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।स्थानीय महिला समूह सीताफल की उपलब्धता और आपूर्ति में सहयोग कर रहे हैं।फल की छंटाई, ग्रेडिंग, पैकिंग और मूल्य संवर्धन जैसे कार्य ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर विकसित कर सकते हैं।राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने और सामूहिक उद्यमों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाता है।यदि सिवनी के जंबो सीताफल की विदेशों में नियमित मांग बनी रहती है, तो महिला समूहों को उत्पादन के साथ प्रसंस्करण और विपणन से भी लाभ मिल सकता है।यह पहल महिलाओं को केवल मौसमी मजदूरी तक सीमित रखने के बजाय संगठित व्यवसाय से जोड़ने की दिशा में उपयोगी साबित हो सकती है।
'सीताफल से समृद्धि अभियान' का दिखने लगा असर
सिवनी जिला प्रशासन और उद्यानिकी विभाग ने सीताफल उत्पादकों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से 'सीताफल से समृद्धि अभियान' शुरू किया है।इस अभियान के अंतर्गत किसानों को बेहतर उत्पादन, फल की गुणवत्ता, पैकेजिंग और बाजार से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।सितंबर 2026 में जिला स्तर पर आयोजित कार्यशाला में किसानों, किसान उत्पादक संगठनों, महिला समूहों, उद्यमियों और विभागीय अधिकारियों ने हिस्सा लिया था।उस समय सीताफल की बेहतर मार्केटिंग, प्रसंस्करण और निर्यात की संभावनाओं पर चर्चा की गई थी।इसके अलावा किसानों का एक दल महाराष्ट्र में अध्ययन भ्रमण के लिए भी भेजा गया था।इसका उद्देश्य किसानों को फल प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन से जुड़ी आधुनिक तकनीकों की जानकारी उपलब्ध कराना था।
अंतरराष्ट्रीय मानकों की दी जा रही ट्रेनिंग
जिला कलेक्टर अंजू अरुण कुमार ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त की है।उन्होंने बताया कि सिवनी की विशेष मिट्टी और जलवायु के कारण यहां का जंबो सीताफल अपने आकार, मिठास और गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध है।किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार की जरूरतों के अनुसार तैयार करने के लिए उद्यानिकी विभाग और कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण यानी APEDA के सहयोग से प्रशिक्षण दिया जा रहा है।इस प्रशिक्षण में फलों की ग्रेडिंग, पैकेजिंग और गुणवत्ता मानकों पर ध्यान दिया जा रहा है।विदेशी बाजार में ताजे फल भेजने के लिए सही पैकिंग और परिवहन व्यवस्था महत्वपूर्ण होती है।सीताफल जल्दी पकने वाला फल है। इसलिए लंबी दूरी तक भेजते समय फल की गुणवत्ता बनाए रखना विशेष चुनौती होती है।
दिल्ली-मुंबई सहित कई शहरों में पहले से मांग
सिवनी के जंबो सीताफल की पहचान केवल मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं है।इसकी आपूर्ति पहले से दिल्ली, मुंबई, नागपुर, रायपुर, आगरा, झांसी, वाराणसी और अन्य बड़े शहरों में की जा रही है।कुछ बाजारों में सीताफल की प्री-बुकिंग भी हो रही है।अच्छी गुणवत्ता वाले फलों को बेहतर कीमत मिलने की खबरों से स्थानीय किसानों में उत्साह है।जिले में किसानों और संग्राहकों को संगठित करने के लिए किसान उत्पादक संगठनों का गठन किया गया है।इन संगठनों के माध्यम से बाजार की मांग के अनुसार फल उपलब्ध कराने और सामूहिक विपणन की व्यवस्था विकसित की जा रही है।
सीताफल से बन रहे कई खाद्य उत्पाद
जंबो सीताफल का उपयोग केवल ताजे फल के रूप में ही नहीं, बल्कि कई खाद्य उत्पाद तैयार करने में भी किया जा सकता है।इससे पल्प, आइसक्रीम, रबड़ी, शेक, बासुंदी, लस्सी और विभिन्न मिठाइयां बनाई जाती हैं।सिवनी जिले में तीन सीताफल पल्प प्रसंस्करण इकाइयां भी स्थापित की जा चुकी हैं।प्रसंस्करण का लाभ यह है कि ताजे फल की सीमित अवधि में बिक्री पर निर्भरता कुछ हद तक कम की जा सकती है।इससे स्थानीय स्तर पर छोटे उद्योग विकसित होने और रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना रहती है।
खाड़ी देशों में बढ़ सकता है कारोबार
दुबई के लिए पहली खेप रवाना होने के बाद प्रशासन की नजर अन्य खाड़ी देशों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी है।अधिकारियों को उम्मीद है कि यदि सीताफल की गुणवत्ता और आपूर्ति व्यवस्था खरीदारों की अपेक्षाओं पर खरी उतरती है, तो भविष्य में निर्यात के नए अवसर विकसित होंगे।हालांकि, दूसरे देशों से नियमित ऑर्डर मिलने की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।फिलहाल सिवनी के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि एक स्थानीय कृषि उत्पाद अब पहली बार विदेशी बाजार में प्रवेश करने जा रहा है।यह पहल किसानों की आय बढ़ाने, महिला स्व-सहायता समूहों को मजबूत बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को वैश्विक बाजार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
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