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भोपाल। मध्य प्रदेश में इस मानसून सीजन के दौरान बारिश का आंकड़ा अभी भी सामान्य से पीछे चल रहा है। हालांकि जुलाई महीने में हुई पर्याप्त बारिश ने स्थिति को कुछ हद तक संभाल लिया है। मौसम विभाग के अनुसार, दो लंबे शुष्क दौर के बावजूद जुलाई में राज्य में इतनी वर्षा हुई कि महीने के निर्धारित लक्ष्य की भरपाई हो गई। लेकिन जून में कम बारिश के कारण पूरे मानसून सीजन की कुल वर्षा अभी भी सामान्य से 13 प्रतिशत कम दर्ज की गई है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के 55 जिलों में से 42 जिलों में अब तक सामान्य से कम बारिश हुई है। इससे साफ है कि मानसून की शुरुआत कमजोर रहने का असर अभी भी राज्य के वर्षा आंकड़ों पर बना हुआ है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मध्य प्रदेश में मानसून की सक्रियता में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। जून महीने में बारिश की कमी के बाद जुलाई में मानसूनी गतिविधियां तेज हुईं और कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। हालांकि, बारिश का वितरण समान नहीं रहा, जिसके कारण कई क्षेत्रों में अब भी सामान्य से कम वर्षा की स्थिति बनी हुई है।
किसानों के लिए जुलाई की बारिश राहत लेकर आई है, क्योंकि खरीफ फसलों की बुवाई और शुरुआती विकास के लिए पर्याप्त नमी की जरूरत होती है। राज्य के कई हिस्सों में बारिश होने से खेती-किसानी के कामों को गति मिली है। हालांकि, जिन जिलों में अब तक बारिश की कमी बनी हुई है, वहां किसान अभी भी अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
मौसम विभाग ने शनिवार के लिए राज्य के कई जिलों में बारिश की संभावना जताई है। अनुमान के अनुसार, कई क्षेत्रों में 30 से 35 मिलीमीटर या इससे अधिक वर्षा हो सकती है। इससे मानसून की स्थिति में और सुधार आने की उम्मीद है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, शनिवार को भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़ और विदिशा सहित कई जिलों में बारिश की संभावना है। इसके अलावा इंदौर संभाग के झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा और खरगोन जैसे जिलों में भी अच्छी बारिश हो सकती है।
मालवा और निमाड़ क्षेत्र के उज्जैन, नीमच, मंदसौर, रतलाम, आगर मालवा, शाजापुर और देवास जिलों में भी बारिश की संभावना जताई गई है। वहीं नर्मदापुरम संभाग के नर्मदापुरम, बैतूल और हरदा जिलों में भी मौसम सक्रिय रहने का अनुमान है।
ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना और अशोकनगर जिलों में भी बारिश की संभावना बताई गई है। इसके अलावा जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्ना, सिवनी, बालाघाट, मंडला और डिंडोरी जैसे जिलों में भी बारिश हो सकती है।
विंध्य और बुंदेलखंड क्षेत्र के रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी जिलों में भी मौसम विभाग ने वर्षा की संभावना जताई है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून की शेष अवधि में अच्छी बारिश होने पर राज्य में वर्षा की कमी को काफी हद तक पूरा किया जा सकता है। मध्य प्रदेश में मानसून आमतौर पर सितंबर तक सक्रिय रहता है, इसलिए अभी बारिश के आंकड़ों में सुधार की संभावना बनी हुई है।
राज्य सरकार और प्रशासन भी बारिश की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। कृषि विभाग की ओर से फसलों की स्थिति और जल उपलब्धता की लगातार समीक्षा की जा रही है। जिन क्षेत्रों में कम बारिश हुई है, वहां किसानों को मौसम के अनुसार कृषि गतिविधियां करने की सलाह दी जा रही है।
जल संसाधनों के लिहाज से भी मानसून की बारिश बेहद महत्वपूर्ण है। प्रदेश के बांधों, तालाबों और जलाशयों में जलस्तर बढ़ाने के लिए अच्छी बारिश जरूरी है। पिछले कुछ दिनों में हुई बारिश से कई क्षेत्रों में जल स्रोतों की स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन सामान्य स्थिति तक पहुंचने के लिए अभी और बारिश की जरूरत है।
फिलहाल मध्य प्रदेश में मानसून की गतिविधियां जारी हैं। जुलाई की बारिश ने जहां राहत दी है, वहीं जून की कमी के कारण राज्य का कुल वर्षा आंकड़ा अभी भी सामान्य से नीचे है। मौसम विभाग को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में बारिश का सिलसिला जारी रहने से प्रदेश में मानसून की स्थिति बेहतर हो सकती है।





