मध्य प्रदेश

AIIMS भोपाल में 260 आउटसोर्स कर्मचारियों पर नौकरी का संकट, विरोध के बाद आदेश वापस

Kavita2
1 Oct 2026 2:45 PM IST
AIIMS भोपाल में 260 आउटसोर्स कर्मचारियों पर नौकरी का संकट, विरोध के बाद आदेश वापस
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भोपाल। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) भोपाल में करीब 260 आउटसोर्स कर्मचारियों को हटाए जाने की आशंका के बाद बुधवार रात से हंगामा मच गया। प्रभावित कर्मचारियों में हाउसकीपिंग स्टाफ, सैनिटरी अटेंडेंट और वार्ड बॉय शामिल थे। कर्मचारियों के अनुसार, आउटसोर्सिंग एजेंसी ने बुधवार रात करीब 9 बजे एक सूची जारी की, जिसके बाद बड़ी संख्या में कर्मचारी अस्पताल परिसर के बाहर जमा होकर विरोध प्रदर्शन करने लगे।

कर्मचारियों का कहना था कि उन्हें पहले से कोई स्पष्ट सूचना नहीं दी गई थी। रात में अचानक सूची सामने आने से कई कर्मचारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया। लंबे समय से अस्पताल में काम कर रहे कर्मचारियों ने एजेंसी और प्रबंधन से यह बताने की मांग की कि आखिर किन आधारों पर कर्मचारियों के नाम सूची में शामिल किए गए।

सूची जारी होते ही कर्मचारियों में असंतोष फैल गया। कई कर्मचारी अस्पताल के बाहर पहुंच गए और फैसले का विरोध करने लगे। कर्मचारियों ने कहा कि वे लंबे समय से AIIMS भोपाल में सेवाएं दे रहे हैं और अचानक काम से हटाए जाने की स्थिति में उनके परिवार की आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ेगा।

प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने मांग की कि उन्हें हटाने का कारण स्पष्ट किया जाए और किसी भी तरह के सेवा समाप्ति आदेश से पहले उनकी बात सुनी जाए। उनका कहना था कि बिना संवाद के अचानक ऐसी सूची जारी करना उचित नहीं है।

मामले ने तूल पकड़ा तो गुरुवार को राहत की खबर सामने आई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, विरोध प्रदर्शन के बाद 260 आउटसोर्स कर्मचारियों को हटाने अथवा ट्रांसफर से जुड़ा आदेश वापस ले लिया गया। इसके बाद कर्मचारियों ने अपना प्रदर्शन समाप्त करने की बात कही।

इस पूरे घटनाक्रम से AIIMS भोपाल में आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवा व्यवस्था एक बार फिर चर्चा में आ गई है। अस्पताल में बड़ी संख्या में गैर-चिकित्सकीय सेवाएं आउटसोर्स एजेंसियों के माध्यम से संचालित होती हैं। केंद्र सरकार ने भी पूर्व में संसद में बताया था कि AIIMS जैसे संस्थानों में सुरक्षा, हाउसकीपिंग और अस्पताल सहायता जैसी गैर-मुख्य सेवाओं के लिए आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति की जाती है।

AIIMS भोपाल में हाउसकीपिंग और वार्ड सेवाओं में लगे कर्मचारी अस्पताल की रोजमर्रा की व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। वार्डों की सफाई, मरीजों से जुड़ी सहायक व्यवस्थाएं और अस्पताल के अलग-अलग हिस्सों में स्वच्छता बनाए रखने जैसे कार्य इन्हीं कर्मचारियों के जिम्मे रहते हैं।

यही वजह है कि एक साथ बड़ी संख्या में कर्मचारियों को हटाने की आशंका से अस्पताल की सेवाओं पर असर पड़ने की चिंता भी सामने आई। कर्मचारियों का कहना था कि यदि अचानक इतने लोगों की सेवा समाप्त कर दी जाती है तो अस्पताल में पहले से काम कर रही टीम पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि सूची जारी करने से पहले उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया गया। रात करीब 9 बजे सूची सामने आने से कर्मचारियों में यह धारणा बनी कि अगले दिन से उन्हें काम पर आने से रोका जा सकता है। इसी कारण देर रात ही लोग अस्पताल के बाहर एकत्र हो गए।

प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों की प्रमुख मांग रोजगार की निरंतरता और सेवा की स्थिति को लेकर स्पष्ट आदेश जारी करने की थी। उनका कहना था कि केवल मौखिक आश्वासन पर्याप्त नहीं है और लिखित रूप से स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।

इस बीच एक अलग आदेश को लेकर 516 सैनिटरी अटेंडेंट से जुड़ी चिंता भी सामने आई। इससे आउटसोर्स कर्मचारियों में असुरक्षा की भावना और बढ़ी। हालांकि इस अलग आदेश की प्रकृति और उसका अंतिम असर क्या होगा, इसे लेकर विस्तृत स्थिति अभी स्पष्ट होना बाकी है।

AIIMS भोपाल में आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति एजेंसियों के माध्यम से होती है। हाल में संस्थान की ओर से विभिन्न श्रेणियों के लिए मैनपावर आउटसोर्सिंग से जुड़ी निविदा प्रक्रिया भी सामने आई थी। सितंबर 2026 में जारी एक निविदा में प्रशासनिक, तकनीकी और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कई आउटसोर्स पद शामिल थे।

ऐसे में कर्मचारियों को आशंका थी कि एजेंसी या ठेका व्यवस्था में बदलाव के कारण पुराने कर्मचारियों की सेवाएं प्रभावित की जा सकती हैं। हालांकि इस मामले में अंतिम प्रशासनिक कारण को लेकर स्पष्ट आधिकारिक विवरण सामने नहीं आया है।

कर्मचारियों के विरोध के बाद स्थिति तेजी से बदली। गुरुवार को सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, प्रबंधन ने सेवा समाप्ति और ट्रांसफर से संबंधित आदेश निरस्त कर दिया और कर्मचारियों की बहाली का रास्ता साफ किया। इसके बाद प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों को तत्काल राहत मिली।

इस फैसले के बाद अस्पताल के बाहर जारी विरोध भी समाप्त होने लगा। कर्मचारियों ने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य अपनी नौकरी और सेवा की स्थिति को स्पष्ट कराना था। आदेश वापस होने के बाद उन्हें फिलहाल राहत मिली है।

फिर भी पूरे घटनाक्रम ने आउटसोर्स कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा से जुड़े सवालों को सामने ला दिया है। आउटसोर्स प्रणाली में कर्मचारी संबंधित संस्थान के बजाय एजेंसी के माध्यम से नियुक्त होते हैं, जिसके कारण एजेंसी या अनुबंध बदलने पर उनकी सेवा को लेकर असमंजस पैदा हो सकता है।

AIIMS भोपाल जैसे बड़े अस्पताल में आउटसोर्स कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। खासकर सफाई, वार्ड सहायता और अन्य सहयोगी सेवाओं में उनकी अनुपस्थिति का सीधा असर मरीजों और अस्पताल की व्यवस्था पर पड़ सकता है।

फिलहाल करीब 260 कर्मचारियों के लिए राहत की स्थिति बन गई है। विरोध प्रदर्शन के बाद उन्हें हटाने से जुड़ा आदेश वापस ले लिया गया है। हालांकि कर्मचारी भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए सेवा शर्तों को स्पष्ट करने और प्रबंधन से बेहतर संवाद की मांग कर रहे हैं।

बुधवार रात अचानक सूची जारी होने से शुरू हुआ यह विवाद गुरुवार को आदेश वापस लिए जाने के बाद शांत हुआ। अब कर्मचारियों की नजर इस बात पर रहेगी कि आगे की आउटसोर्स व्यवस्था में उनकी नौकरी और सेवा शर्तों को किस तरह सुरक्षित रखा जाता है।

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