मध्य प्रदेश

Jabalpur: केंद्रीय अधिकरण में सुनवाई के लिए पहुंचा मामला

Admindelhi1
23 April 2026 10:10 AM IST
Jabalpur: केंद्रीय अधिकरण में सुनवाई के लिए पहुंचा मामला
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जबलपुर: मध्यप्रदेश में कैडर रिव्यू में हुई देरी का असर अब पुलिस अधिकारियों के करियर पर साफ दिखाई दे रहा है। इस देरी के चलते कई अधिकारी आईपीएस में चयन के अवसर से वंचित हो गए। हालांकि, अब केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) के हस्तक्षेप के बाद उन्हें राहत मिलने की उम्मीद जगी है, वहीं प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

इस मामले को लेकर ग्वालियर के एसपी (अजाक) सत्येंद्र सिंह तोमर, जबलपुर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (क्राइम) जितेंद्र सिंह और मुकेश कुमार वैश्य ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण, जबलपुर खंडपीठ में याचिका दायर की है। आवेदकों की ओर से अधिवक्ता पंकज दुबे ने अधिकरण को बताया कि कैडर रिव्यू एक नियमित प्रक्रिया है, जिसे हर पांच वर्ष में समय पर पूरा किया जाना अनिवार्य है। लेकिन इस मामले में चार साल की देरी ने अधिकारियों के करियर पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है।

अधिवक्ता पंकज दुबे और अक्षय खंडेलवाल ने अधिकरण के समक्ष तर्क दिया कि इस पूरे मामले में अधिकारियों की कोई गलती नहीं है। यह पूरी तरह से प्रशासनिक विफलता का परिणाम है। उन्होंने कहा कि किसी प्रक्रिया में देरी के कारण यदि अधिकारियों के अधिकार प्रभावित होते हैं, तो इसकी जिम्मेदारी शासन की है, न कि संबंधित अधिकारियों की।

उन्होंने अधिकरण से मांग की कि प्रशासनिक देरी का खामियाजा अधिकारियों पर न डाला जाए और उन्हें न्याय दिलाने के लिए उचित आदेश पारित किए जाएं।

दरअसल, वर्ष 2018 में होने वाला कैडर रिव्यू चार साल की देरी से 2022 में पूरा किया गया। इस असामान्य विलंब के कारण कई पुलिस अधिकारी 56 वर्ष की अधिकतम आयु सीमा पार कर गए और आईपीएस चयन प्रक्रिया में शामिल होने के लिए अयोग्य हो गए।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यदि कैडर रिव्यू 2018 में समय पर हो जाता, तो वे सभी अधिकारी निर्धारित आयु सीमा के भीतर रहते और आईपीएस चयन के लिए पात्र होते। लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के चलते वे इस अवसर से वंचित रह गए, जिससे उनके वैधानिक अधिकार प्रभावित हुए।

आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि सभी संबंधित अधिकारी लगभग 26 से 27 वर्षों की सेवा पूरी कर चुके हैं, जो उनके अनुभव और कार्यकुशलता को दर्शाता है। ऐसे में उन्हें आईपीएस में चयन का अवसर मिलना चाहिए था, लेकिन देरी के कारण यह संभव नहीं हो सका।

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