मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश के गठन को 70 साल चार प्रशासनिक इकाइयों से बना था नया राज्य

nidhi
1 Nov 2026 8:04 AM IST
मध्य प्रदेश के गठन को 70 साल चार प्रशासनिक इकाइयों से बना था नया राज्य
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जानिए भोपाल और छत्तीसगढ़ से जुड़ा इतिहास
भोपाल: देश के मध्य में स्थित मध्य प्रदेश के गठन की कहानी कई प्रशासनिक इकाइयों, रियासतों और क्षेत्रीय पहचानों के एकीकरण से जुड़ी है। एक नवंबर 1956 को राज्यों के पुनर्गठन के तहत नया मध्य प्रदेश अस्तित्व में आया था। इसमें तत्कालीन मध्य प्रदेश, मध्यभारत, विंध्य प्रदेश और भोपाल राज्य के क्षेत्र शामिल किए गए। एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि एक नवंबर 2026 को राज्य के गठन के 70 वर्ष पूरे हुए हैं और 71वां स्थापना दिवस है। इसलिए इस अवसर पर राज्य का जन्म 71 साल पहले हुआ बताना सही नहीं होगा।
आजादी के बाद भारत के सामने रियासतों और अलग-अलग प्रशासनिक व्यवस्थाओं को एक संगठित संघीय ढांचे में जोड़ने की चुनौती थी। संविधान लागू होने और पहले आम चुनाव के बाद भी राज्यों की सीमाएं आज जैसी नहीं थीं। मध्य भारत का बड़ा हिस्सा अलग-अलग शासन व्यवस्थाओं के अंतर्गत था। इन क्षेत्रों की अपनी सरकारें और विधानसभाएं थीं। वर्ष 1956 में हुए पुनर्गठन ने इन्हें नए स्वरूप में जोड़ा। यह बदलाव केवल नक्शे पर सीमाएं खींचने का काम नहीं था, बल्कि प्रशासन, प्रतिनिधित्व और शासन की संस्थाओं को नई व्यवस्था में समाहित करने की प्रक्रिया भी थी।
नए राज्य का एक प्रमुख घटक तत्कालीन मध्य प्रदेश था, जिसका संबंध पुराने सेंट्रल प्रोविंसेज एंड बरार की प्रशासनिक विरासत से था। महाकौशल और छत्तीसगढ़ के क्षेत्र नए राज्य में शामिल हुए। वहीं, पुराने राज्य के कुछ हिस्से पुनर्गठन के दौरान बाहर गए। इसलिए यह समझना जरूरी है कि 1956 से पहले भी मध्य प्रदेश नाम का राज्य मौजूद था, लेकिन उसकी सीमाएं और राजधानी अलग थीं। पुनर्गठन के बाद बने मध्य प्रदेश का आकार तथा प्रशासनिक केंद्र बदल गया। पुराने राज्य और नए राज्य को बिल्कुल एक जैसा मानने से इतिहास की महत्वपूर्ण कड़ी छूट जाती है।
दूसरा प्रमुख हिस्सा मध्यभारत था। इसके क्षेत्रों को नए मध्य प्रदेश में शामिल किया गया, लेकिन कुछ सीमा संबंधी अपवाद भी थे। राज्य पुनर्गठन अधिनियम की धारा नौ के अनुसार, मध्यभारत के मंदसौर जिले की भानपुरा तहसील का सुनेल टप्पा नए मध्य प्रदेश का हिस्सा नहीं बना। दूसरी ओर, तत्कालीन राजस्थान के कोटा जिले का सिरोंज उपखंड नए राज्य में जोड़ा गया। सिरोंज को उस समय के भिलसा जिले में शामिल करने का प्रावधान किया गया था। इससे स्पष्ट होता है कि गठन को केवल चार इकाइयों का बिना बदलाव विलय कहना अधूरा विवरण होगा।
तीसरा घटक विंध्य प्रदेश था, जिसकी राजधानी रीवा थी। रीवा संभाग के आधिकारिक इतिहास के अनुसार, स्वतंत्रता के बाद आसपास की कई रियासतों को मिलाकर वर्ष 1948 में विंध्य प्रदेश बनाया गया था। फिर 1956 में यह नए मध्य प्रदेश में समाहित हो गया। इस क्षेत्र की अपनी राजनीतिक और सांस्कृतिक पहचान थी। पुनर्गठन के बाद वह एक बड़े राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा बना। रीवा की कहानी बताती है कि आधुनिक मध्य प्रदेश तक पहुंचने से पहले कुछ क्षेत्रों ने अलग राज्य के रूप में भी अपना एक चरण पूरा किया था।
चौथा महत्वपूर्ण घटक भोपाल राज्य था। भोपाल जिला प्रशासन के इतिहास के अनुसार, विलय समझौते पर 30 अप्रैल 1949 को हस्ताक्षर हुए और एक जून 1949 को केंद्र सरकार ने मुख्य आयुक्त के माध्यम से प्रशासन संभाला। भोपाल 1949 से 1956 तक एक अलग भारतीय राज्य रहा। नए मध्य प्रदेश के गठन के समय इसकी स्थिति फिर बदली और भोपाल को राजधानी बनाया गया। इस तरह एक पूर्व रियासत की राजधानी आगे चलकर बड़े पुनर्गठित राज्य के शासन का केंद्र बनी। राजधानी बनने के बाद शहर की प्रशासनिक भूमिका में व्यापक परिवर्तन आया।
नवगठित राज्य के पहले मुख्यमंत्री पंडित रविशंकर शुक्ल और पहले राज्यपाल डॉ. पट्टाभि सीतारमैया बने। विधानसभा के अभिलेखों में 31 अक्टूबर 1956 की मध्यरात्रि में भोपाल के मिंटो हॉल में राज्यपाल के शपथ ग्रहण का उल्लेख मिलता है। चारों घटक इकाइयों की विधानसभाओं को मिलाकर नई मध्य प्रदेश विधानसभा बनी। इसका पहला अधिवेशन 17 दिसंबर 1956 से 17 जनवरी 1957 के बीच हुआ। शासन की नई व्यवस्था तैयार करने के लिए गठन से पहले विभिन्न स्थानों पर प्रशासनिक बैठकों और विचार-विमर्श का दौर भी चला था।
न्यायिक व्यवस्था में भी बड़ा परिवर्तन हुआ। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के आधिकारिक इतिहास के अनुसार, पुराने राज्य के नागपुर उच्च न्यायालय की संस्थागत निरंतरता नए मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के रूप में बनी और उसका मुख्य स्थान जबलपुर हुआ। एक नवंबर 1956 को इंदौर तथा ग्वालियर में अस्थायी पीठें गठित की गईं। बाद में राष्ट्रपति की अधिसूचना के माध्यम से वर्ष 1968 में इन स्थानों पर स्थायी पीठें स्थापित हुईं। इस प्रकार राज्य गठन के साथ राजधानी और न्यायिक मुख्यालय अलग-अलग शहरों में विकसित हुए। मध्य प्रदेश के नक्शे में अगला बड़ा बदलाव एक नवंबर 2000 को हुआ, जब छत्तीसगढ़ अलग राज्य बना। इस विभाजन के साथ 1956 में गठित विशाल मध्य प्रदेश को नया भौगोलिक स्वरूप मिला। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर में स्थापित हुआ, जबकि जबलपुर स्थित उच्च न्यायालय उत्तरवर्ती मध्य प्रदेश के लिए बना रहा। आज स्थापना दिवस चार प्रमुख प्रशासनिक इकाइयों से एक राज्य बनने और बाद में उसके पुनर्गठन की यात्रा याद दिलाता है। मध्य प्रदेश का इतिहास सीमाओं के बदलाव के साथ अलग-अलग क्षेत्रों की साझा पहचान बनने की कहानी भी है।
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