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मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश में 2,387 करोड़ की सिंचाई परियोजना का शुभारंभ
Rajeshwari Nishad
24 Oct 2026 6:41 PM IST

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धार। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 को धार जिले के सरदारपुर में किसानों को बड़ी सौगात दी। उन्होंने सरदारपुर स्थित खेल परिसर में नर्मदा-झाबुआ-पेटलावद-थांदला-सरदारपुर माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना का लोकार्पण किया। करीब 2,387.60 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना का उद्देश्य धार और झाबुआ जिले के 260 गांवों की 57,422 हेक्टेयर कृषि भूमि तक सिंचाई की सुविधा पहुंचाना है। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान परियोजना के तैयार रूट मैप का भी अवलोकन किया। इसे पश्चिमी मध्य प्रदेश के किसानों के लिए सिंचाई सुविधाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
260 गांवों के किसानों को मिलेगा लाभ
इस महत्वाकांक्षी परियोजना से धार और झाबुआ जिलों के किसानों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना के तहत धार जिले की सरदारपुर तहसील के 66 गांवों की 25,422 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने की योजना है। वहीं, झाबुआ जिले के 194 गांवों की 32,000 हेक्टेयर भूमि को इसका लाभ मिलेगा।
झाबुआ जिले में झाबुआ, पेटलावद, मेघनगर, थांदला, रामा और राणापुर क्षेत्रों के गांवों को परियोजना में शामिल किया गया है। इनमें झाबुआ तहसील के 108 गांवों की 17,802 हेक्टेयर भूमि, पेटलावद के छह गांवों की 1,502 हेक्टेयर, मेघनगर के 28 गांवों की 5,504 हेक्टेयर, थांदला के 39 गांवों की 5,927 हेक्टेयर, रामा के 12 गांवों की 1,185 हेक्टेयर तथा राणापुर के एक गांव की 80 हेक्टेयर भूमि शामिल है।
परियोजना से इन क्षेत्रों में सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ाने का लक्ष्य है। इससे किसानों को खेतों तक पानी पहुंचाने में सुविधा मिल सकती है और वर्षा पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
नर्मदा नदी से खेतों तक पहुंचेगा पानी
इस सिंचाई परियोजना की प्रमुख विशेषता नर्मदा नदी से पानी उठाकर पाइपलाइन के माध्यम से कृषि भूमि तक पहुंचाने की व्यवस्था है। परियोजना के लिए धार जिले की कुक्षी तहसील के चंदनखेड़ी गांव के पास नर्मदा नदी से पानी उठाने का प्रावधान किया गया है।
योजना के तहत करीब 186.62 मिलियन घन मीटर पानी के उपयोग का प्रावधान है। पूरी व्यवस्था के संचालन के लिए लगभग 102.30 मेगावाट बिजली की आवश्यकता निर्धारित की गई है।
माइक्रो उद्वहन सिंचाई प्रणाली में पानी को पंपों की सहायता से ऊंचाई वाले क्षेत्रों तक पहुंचाया जाता है। इसके बाद पाइपलाइन नेटवर्क के माध्यम से निर्धारित क्षेत्रों में पानी उपलब्ध कराया जाता है। इस तकनीक का उद्देश्य पानी के वितरण को बेहतर बनाना और खेतों तक सिंचाई की सुविधा पहुंचाना है।
परियोजना में भूमिगत पाइप नहर प्रणाली का इस्तेमाल किया गया है। इससे पारंपरिक खुली नहरों की तुलना में भूमि पर कम जगह घेरने और पानी के वितरण को व्यवस्थित बनाने में मदद मिल सकती है।
खेती और किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद
धार और झाबुआ के कई ग्रामीण क्षेत्रों में खेती के लिए पर्याप्त पानी की उपलब्धता महत्वपूर्ण चुनौती रही है। कृषि उत्पादन का बड़ा हिस्सा वर्षा और उपलब्ध सिंचाई संसाधनों पर निर्भर करता है। ऐसे में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार किसानों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
परियोजना के पूरी तरह प्रभावी होने पर किसानों को फसलों के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है। इससे खेती की योजना बनाने, फसल उत्पादन में सुधार और कृषि गतिविधियों को अधिक व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि गांवों तक पानी कितनी नियमितता से पहुंचता है, सिंचाई नेटवर्क का संचालन कैसा रहता है और किसान इस सुविधा का कितना उपयोग कर पाते हैं। परियोजना का उद्देश्य सिंचाई की उपलब्धता बढ़ाकर कृषि क्षेत्र को मजबूत करना है।
आदिवासी अंचल में विकास को मिलेगी गति
धार और झाबुआ जिले के कई इलाके आदिवासी बहुल हैं। यहां कृषि और उससे जुड़े रोजगार ग्रामीण परिवारों की आजीविका का महत्वपूर्ण आधार हैं। सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होने से इन क्षेत्रों में खेती के लिए बेहतर परिस्थितियां बनाने में मदद मिल सकती है।
नर्मदा का पानी खेतों तक पहुंचने से कृषि गतिविधियों को बढ़ावा मिलने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की संभावना है। बेहतर सिंचाई व्यवस्था किसानों को पानी की उपलब्धता के अनुरूप खेती की योजना बनाने में मदद कर सकती है।
हालांकि, खेती और आय पर परियोजना का वास्तविक प्रभाव समय के साथ सामने आएगा। इसके लिए पानी की नियमित आपूर्ति, बिजली की उपलब्धता, रखरखाव और सिंचाई व्यवस्था के प्रभावी संचालन की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
विकास कार्यों पर भी रहा जोर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का सरदारपुर दौरा केवल सिंचाई परियोजना के लोकार्पण तक सीमित नहीं रहा। इस दौरान क्षेत्र में विभिन्न विकास कार्यों के भूमिपूजन और लोकार्पण से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। परियोजना को प्रदेश में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और किसानों को बेहतर संसाधन उपलब्ध कराने के प्रयासों से जोड़कर देखा जा रहा है।
राज्य सरकार की ओर से कृषि और ग्रामीण अधोसंरचना को मजबूत करने के प्रयासों में सिंचाई परियोजनाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। कृषि क्षेत्र में पानी की उपलब्धता बढ़ाने से किसानों को बेहतर अवसर मिल सकते हैं और स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिल सकता है।
किसानों के लिए बड़ी पहल
नर्मदा-झाबुआ-पेटलावद-थांदला-सरदारपुर माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना की लागत 2,387.60 करोड़ रुपये है। इससे धार और झाबुआ के 260 गांवों की 57,422 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा देने का लक्ष्य रखा गया है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा परियोजना का लोकार्पण क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। अब इस परियोजना का वास्तविक असर पानी की नियमित आपूर्ति, संचालन और किसानों तक सुविधा पहुंचने पर निर्भर करेगा।
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