मध्य प्रदेश

इंस्टाग्राम दोस्त ने मिलने बुलाया, चलती कार में युवती से गैंगरेप का आरोप, 5 युवकों पर गंभीर आरोप

Kavita2
27 Oct 2026 5:44 PM IST
इंस्टाग्राम दोस्त ने मिलने बुलाया, चलती कार में युवती से गैंगरेप का आरोप, 5 युवकों पर गंभीर आरोप
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उज्जैन । मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले से एक गंभीर आपराधिक मामला सामने आया है। इंदौर की रहने वाली 20 वर्षीय युवती ने आरोप लगाया है कि सोमवार, 26 अक्टूबर की रात इंस्टाग्राम पर बने दोस्त और उसके साथियों ने उसके साथ चलती कार में सामूहिक दुष्कर्म और मारपीट की। युवती ने घटना के बाद पुलिस से शिकायत की और सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर अपने साथ हुई कथित घटना की जानकारी दी।

शिकायत के आधार पर उज्जैन के नानाखेड़ा थाना पुलिस ने चक्रेश जैन और उसके एक अन्य साथी के खिलाफ मामला दर्ज किया है। हालांकि, पीड़िता ने अपने वीडियो में चार से पांच लोगों के शामिल होने का दावा किया है। पुलिस का कहना है कि महिला के लिखित आवेदन में सामने आए तथ्यों के आधार पर फिलहाल दो व्यक्तियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है। अन्य लोगों की संभावित भूमिका की जांच जारी है।

इंस्टाग्राम पर हुई थी दोस्ती, पहले भी हो चुकी थी मुलाकात

पुलिस के अनुसार, युवती की कुछ महीने पहले इंस्टाग्राम के जरिए उज्जैन निवासी चक्रेश जैन से दोस्ती हुई थी। सोशल मीडिया पर बातचीत के बाद दोनों एक-दूसरे के संपर्क में आए और पहले भी एक-दो बार मुलाकात कर चुके थे।

पीड़िता के अनुसार, सोमवार को चक्रेश ने उसे उज्जैन मिलने के लिए बुलाया था। परिचित होने के कारण युवती इंदौर से बस में बैठकर उज्जैन पहुंच गई।

पुलिस के मुताबिक, उज्जैन पहुंचने के बाद युवती की मुलाकात चक्रेश से मेघदूत होटल के पास हुई। इसके बाद दोनों कार में घूमने निकले। कुछ समय बाद चक्रेश का एक अन्य साथी भी कार में बैठ गया।

युवती का आरोप है कि इसके बाद उसके साथ आपराधिक घटना हुई। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कार में कितने लोग मौजूद थे और घटनाक्रम किस तरह आगे बढ़ा।

चलती कार में मारपीट और यौन हिंसा का आरोप

युवती ने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में आरोप लगाया है कि कार में चक्रेश के अन्य साथी भी शामिल हुए और उसके साथ जबरन यौन हिंसा की गई।

पीड़िता ने दावा किया कि आरोपियों ने उसके साथ मारपीट की और उसे शारीरिक चोटें पहुंचाईं। उसने अपने निजी अंगों पर भी चोट पहुंचाए जाने का आरोप लगाया है।

वीडियो में युवती ने शरीर पर लगी कथित चोटों के बारे में जानकारी देते हुए पुलिस से कार्रवाई की मांग की है।

हालांकि, महिला द्वारा लगाए गए सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस ने बताया है कि प्रारंभिक चिकित्सकीय जांच में कुछ आरोपों के संबंध में अलग निष्कर्ष सामने आए हैं। इसलिए घटना से जुड़े सभी तथ्यों की जांच की जा रही है।

इंदौर में अस्पताल के पास छोड़ने का आरोप

पीड़िता के अनुसार, कथित घटना के बाद आरोपी उसे कार से इंदौर की ओर ले गए और अरविंदो अस्पताल के पास छोड़कर चले गए।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, युवती ने घटना की जानकारी अपने मुंहबोले नाबालिग भाई को फोन पर दी। उसने बताया कि सोमवार रात लगभग नौ बजे युवती का फोन आया था और वह काफी परेशान थी।

जानकारी मिलने के बाद वह अरविंदो अस्पताल के पास पहुंचा और युवती को अपने साथ लेकर उज्जैन के नानाखेड़ा थाने गया।

पुलिस ने महिला की शिकायत दर्ज करने के साथ उससे घटना के संबंध में पूछताछ की। शिकायत में बताए गए घटनाक्रम के आधार पर प्रकरण की जांच शुरू की गई है।

पुलिस अधिकारियों ने करीब दो घंटे की पूछताछ

मामले की जानकारी मिलने के बाद उज्जैन पुलिस सक्रिय हुई। रिपोर्टों के अनुसार, सीएसपी श्वेता गुप्ता और नानाखेड़ा थाना प्रभारी नरेंद्र यादव ने महिला से घटना के संबंध में पूछताछ की।

पूछताछ करीब दो घंटे तक चली। इस दौरान युवती से आरोपियों के बारे में जानकारी ली गई और कथित घटना का क्रम समझने का प्रयास किया गया।

इसके बाद महिला को चिकित्सकीय परीक्षण के लिए भेजा गया।

सीएसपी श्वेता गुप्ता के मुताबिक, युवती कुछ महीने पहले चक्रेश जैन के संपर्क में आई थी और दोनों पहले भी मिल चुके थे। सोमवार को महिला इंदौर से उज्जैन आई थी, जहां उसकी चक्रेश से मुलाकात हुई।

पुलिस ने बताया कि महिला के आवेदन के आधार पर दो आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

पांच लोगों पर आरोप, FIR में दो नाम

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू पीड़िता के सोशल मीडिया वीडियो और पुलिस के पास दर्ज लिखित शिकायत के बीच सामने आया अंतर है।

महिला ने सार्वजनिक वीडियो में दावा किया है कि उसके साथ हुई कथित वारदात में पांच लोग शामिल थे।

दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि महिला के आवेदन के आधार पर दो लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

अधिकारियों के अनुसार, घटना में अन्य लोगों की भूमिका की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

पुलिस के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि घटना के समय कार में कौन-कौन मौजूद था और महिला द्वारा लगाए गए आरोपों के समर्थन में कौन-से साक्ष्य उपलब्ध हैं।

आरोपों की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सा संबंधी साक्ष्य, महिला के बयान और अन्य उपलब्ध जानकारी जांच के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

मेडिकल जांच को लेकर क्या बोली पुलिस?

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने महिला की चिकित्सकीय जांच करवाई है। प्रारंभिक जांच के संबंध में सीएसपी श्वेता गुप्ता ने बताया कि महिला के कुछ आरोपों और मेडिकल परीक्षण से मिले निष्कर्षों में अंतर है।

पुलिस के मुताबिक, मेडिकल जांच में महिला के निजी अंगों पर चोट के निशान नहीं मिले। हालांकि, यौन हिंसा से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच की जा रही है।

यह महत्वपूर्ण है कि किसी विशेष प्रकार की चोट का नहीं मिलना अपने आप में यौन हिंसा के आरोप को गलत साबित नहीं करता। मामले का निष्कर्ष सभी चिकित्सकीय, परिस्थितिजन्य और अन्य कानूनी साक्ष्यों के मूल्यांकन के बाद ही निकाला जा सकेगा।

सोशल मीडिया पर जारी वीडियो के बाद मामला चर्चा में

महिला द्वारा अपनी कथित आपबीती बताते हुए वीडियो जारी किए जाने के बाद मामला चर्चा में आया है।

युवती ने वीडियो के माध्यम से अपने साथ हुई कथित हिंसा की जानकारी सार्वजनिक की और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

पुलिस के लिए महिला की सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है। यौन अपराधों की शिकायत करने वाली महिलाओं की पहचान सार्वजनिक करना कानूनन प्रतिबंधित है।

ऐसे मामलों में सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं को भी पीड़िता की पहचान, निजी जानकारी या पहचान उजागर करने वाली तस्वीरें और वीडियो साझा करने से बचना चाहिए।

पुलिस जांच के बाद स्पष्ट होगा पूरा मामला

फिलहाल नानाखेड़ा पुलिस महिला की शिकायत और प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर कार्रवाई कर रही है।

इस मामले में दर्ज प्राथमिकी, मेडिकल परीक्षण और अन्य साक्ष्यों की जांच पूरी होने के बाद ही आरोपियों की वास्तविक भूमिका और घटना की परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी।

उज्जैन की इस घटना ने सोशल मीडिया के माध्यम से बने परिचय और व्यक्तिगत मुलाकातों के दौरान सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को भी चर्चा में ला दिया है।

हालांकि, यह भी स्पष्ट है कि किसी से ऑनलाइन दोस्ती करना या अपनी इच्छा से मिलने जाना यौन हिंसा के लिए सहमति नहीं माना जा सकता। ऐसे मामलों में आरोपों की निष्पक्ष जांच और पीड़ित व्यक्ति के अधिकारों का संरक्षण आवश्यक है।

पुलिस जांच जारी है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।

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