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Indore : पानी को लेकर सियासी विवाद, मेयर ने जीतू पटवारी को दी बहस की चुनौती

Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : इंदौर शहर के वॉटर सप्लाई सिस्टम और पानी की गुणवत्ता को लेकर चल रही राजनीतिक बहस अब और तेज हो गई है। इस मुद्दे पर इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी पर सीधा हमला करते हुए उन पर गलत और भ्रामक जानकारी फैलाने का आरोप लगाया है।
यह विवाद उस समय और बढ़ गया जब हाल ही में कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने एक लैब टेस्ट रिपोर्ट सार्वजनिक की, जिसमें दावा किया गया कि इंदौर के नलों से आने वाले पानी का बड़ा हिस्सा पीने योग्य नहीं है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि 90 प्रतिशत नल का पानी जहरीला पाया गया है। इस बयान के बाद शहर में राजनीतिक माहौल गर्म हो गया और दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए।
मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शहर की जल आपूर्ति व्यवस्था, वितरण नेटवर्क और पानी की गुणवत्ता को लेकर जनता को गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना सही तथ्यों के रिपोर्ट पेश कर शहर की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई है।
बिजलपुर में आयोजित 30 MLD GSR प्रोजेक्ट के शिलान्यास समारोह के दौरान बोलते हुए मेयर ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी को खुली सार्वजनिक बहस की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि यदि किसी को इंदौर की जल व्यवस्था पर संदेह है, तो वह तथ्य और आंकड़ों के साथ सामने आए और सार्वजनिक चर्चा में हिस्सा ले।
मेयर ने कहा कि इंदौर देश के उन शहरों में शामिल है जहां जल आपूर्ति और स्वच्छता व्यवस्था पर लगातार सुधार कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि शहर की जल आपूर्ति प्रणाली वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधित है और नियमित निगरानी के तहत पानी की गुणवत्ता की जांच की जाती है।
दूसरी ओर, कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने अपनी रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा था कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इंदौर के 29 वार्डों से 240 पानी के सैंपल एकत्र किए थे। इन सैंपलों को दिल्ली स्थित एक लैब में परीक्षण के लिए भेजा गया था। रिपोर्ट में दावा किया गया कि इनमें से 98 प्रतिशत सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे और अधिकांश फेल पाए गए।
इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद शहर में राजनीतिक विवाद और गहरा गया है। जहां कांग्रेस ने इसे गंभीर जनस्वास्थ्य मुद्दा बताया है, वहीं भाजपा नेताओं ने इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित और भ्रामक करार दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पानी की गुणवत्ता जैसे संवेदनशील मुद्दे पर पारदर्शी और वैज्ञानिक जांच बेहद जरूरी है, ताकि जनता के बीच किसी प्रकार का भ्रम न फैले। उन्होंने यह भी कहा कि अलग-अलग रिपोर्टों और दावों के बीच सटीक और स्वतंत्र ऑडिट की आवश्यकता है।
मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि शहर के विकास कार्यों और जल प्रबंधन प्रणाली को कमजोर दिखाने के प्रयास स्वीकार्य नहीं हैं। उन्होंने दोहराया कि प्रशासन पूरी पारदर्शिता के साथ काम कर रहा है और किसी भी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा जांच का स्वागत किया जाएगा।
कुल मिलाकर, इंदौर में पानी की गुणवत्ता को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है, जिसमें एक तरफ कांग्रेस अपने दावों के समर्थन में रिपोर्ट पेश कर रही है, वहीं दूसरी तरफ नगर निगम और सत्ताधारी पक्ष इसे गलत और भ्रामक बता रहे हैं। यह विवाद आने वाले दिनों में और अधिक राजनीतिक रूप ले सकता है।





