मध्य प्रदेश

Indore : दुर्लभ बीमारी से जूझ रही बच्ची के इलाज पर हाई कोर्ट की टिप्पणी

Kavita2
18 Jun 2026 10:00 AM IST
Indore : दुर्लभ बीमारी से जूझ रही बच्ची के इलाज पर हाई कोर्ट की टिप्पणी
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Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने एक दुर्लभ जेनेटिक बीमारी से पीड़ित साढ़े तीन साल की बच्ची के इलाज के लिए आर्थिक सहायता की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। इस मामले ने दुर्लभ और महंगी बीमारियों से जूझ रहे परिवारों की कठिनाइयों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

इंदौर के द्वारकापुरी क्षेत्र की रहने वाली अनिका स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) टाइप-2 नामक गंभीर जेनेटिक बीमारी से पीड़ित है। उसकी स्थिति को देखते हुए इलाज के लिए विशेष दवा और जीन थेरेपी की आवश्यकता बताई गई है, जिसकी लागत अत्यधिक अधिक है।

इस मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष के वकीलों चंचल गुप्ता और लखन शर्मा ने अदालत के सामने तर्क रखा कि राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही ‘लाड़ली बहना योजना’ के तहत 1.25 करोड़ से अधिक महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि प्रत्येक लाभार्थी के हिस्से से एक महीने के लिए मात्र 2 रुपये की कटौती की जाए, तो इससे एक बड़ा फंड इकट्ठा किया जा सकता है, जिससे अनिका के इलाज के लिए आवश्यक राशि जुटाई जा सकती है।

इसी बहस के दौरान अदालत ने राज्य सरकार के वकील से मौखिक रूप से सवाल किया कि क्या यह बच्ची भी ‘लाड़ली बहना’ नहीं है। इस टिप्पणी ने मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया और गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए सरकारी सहायता की जरूरत पर ध्यान केंद्रित किया।

याचिकाकर्ताओं के अनुसार, अनिका के इलाज के लिए ज़ोलजेन्स्मा (Zolgensma) नामक जीन थेरेपी की आवश्यकता है, जिसे दुनिया की सबसे महंगी दवाओं में से एक माना जाता है। इस उपचार की अनुमानित लागत लगभग 9 करोड़ रुपये बताई गई है, जो सामान्य परिवारों की पहुंच से काफी दूर है।

परिवार का कहना है कि इस बीमारी का इलाज समय पर न मिलने पर बच्ची की स्थिति और गंभीर हो सकती है। ऐसे में आर्थिक सहायता अत्यंत आवश्यक है।

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में यह भी चर्चा हुई कि कैसे महंगी बीमारियों के इलाज के लिए सरकारी योजनाओं और सामाजिक संसाधनों के बीच संतुलन बनाया जा सकता है।

यह मामला न केवल एक परिवार की चुनौती को दर्शाता है, बल्कि देश में दुर्लभ बीमारियों के महंगे इलाज और स्वास्थ्य सहायता प्रणाली की जरूरतों पर भी सवाल खड़े करता है।

फिलहाल अदालत में मामले की सुनवाई जारी है और सभी पक्षों की दलीलों पर विचार किया जा रहा है।

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