मध्य प्रदेश

NHAI के भूमि अधिग्रहण नोटिफिकेशन पर सवाल, इंदौर HC बेंच ने सुनवाई की

Kavita2
16 April 2026 10:40 AM IST
NHAI के भूमि अधिग्रहण नोटिफिकेशन पर सवाल, इंदौर HC बेंच ने सुनवाई की
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Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने बुधवार को भारतीय किसान यूनियन (सूर्यवंशी) द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई की। इस याचिका में एक राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के लिए जारी भूमि अधिग्रहण नोटिफिकेशन की वैधता को चुनौती दी गई है।

यह याचिका यूनियन की राष्ट्रीय अध्यक्ष सपना के माध्यम से दायर की गई है। इसमें भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 की धारा 3A के तहत जारी अधिसूचना को अवैध घोषित करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह अधिसूचना कानूनी प्रावधानों का पालन नहीं करती है और इससे प्रभावित होने वाले क्षेत्रों का सही और स्पष्ट विवरण इसमें शामिल नहीं किया गया है।

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया ने दलील पेश की। उनकी सहायता अधिवक्ता पूर्वा महाजन ने की। उन्होंने कोर्ट के समक्ष तर्क दिया कि अधिसूचना में प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण से प्रभावित होने वाले गांवों और क्षेत्रों की स्पष्ट पहचान नहीं दी गई है, जो कानून के अनुसार अनिवार्य है।

याचिकाकर्ता पक्ष ने यह भी कहा कि भूमि अधिग्रहण जैसी प्रक्रिया में पारदर्शिता और स्पष्टता बेहद आवश्यक है, ताकि प्रभावित किसानों और भूमि मालिकों को समय रहते जानकारी मिल सके और वे अपनी आपत्तियां दर्ज करा सकें। अधिवक्ता ने जोर देकर कहा कि नोटिफिकेशन में इस महत्वपूर्ण पहलू की अनदेखी की गई है, जिससे पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े होते हैं।

अपनी दलीलों के समर्थन में याचिकाकर्ता पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण निर्णय “कॉम्पिटेंट अथॉरिटी बनाम बारंगोर जूट फैक्ट्री” का भी हवाला दिया। इस फैसले में भूमि अधिग्रहण से जुड़े नोटिफिकेशन की वैधानिकता और उसमें आवश्यक विवरणों की अनिवार्यता पर दिशा-निर्देश दिए गए थे।

कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिका पर आगे की सुनवाई की प्रक्रिया जारी रखी है। संबंधित पक्षों से विस्तृत जवाब मांगा जा सकता है।

यह मामला राज्य में चल रही राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं और भूमि अधिग्रहण प्रक्रियाओं की पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर कानूनी बहस का विषय बन गया है। किसानों और स्थानीय संगठनों की ओर से इस तरह की प्रक्रियाओं में स्पष्टता की मांग लगातार उठती रही है।

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