मध्य प्रदेश

110 की रफ्तार से दौड़ेगी देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, 120 पर ट्रायल सफल

Kavita2
7 Sept 2026 5:27 PM IST
110 की रफ्तार से दौड़ेगी देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, 120 पर ट्रायल सफल
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इंदौर। भारतीय रेलवे अब स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। देश की पहली हाइड्रोजन-पावर्ड ट्रेन को अधिकतम 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलाने की दिशा में काम किया जा रहा है। रेलवे बोर्ड के चेयरमैन और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) सतीश कुमार ने बताया कि ट्रेन का 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। अब रेलवे इसे व्यावहारिक रूप से अधिकतम 110 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से संचालित करने की तैयारी कर रहा है।

इंदौर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए सतीश कुमार ने हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना की प्रगति के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अभी तक हाइड्रोजन ट्रेन की परिचालन गति 75 किलोमीटर प्रति घंटे निर्धारित की गई है। हालांकि रेलवे ने इससे कहीं अधिक गति पर इसका परीक्षण किया है।

सतीश कुमार के मुताबिक, ट्रेन के 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार के लिए ट्रायल पूरे हो चुके हैं। इन परीक्षणों के बाद रेलवे अब इसकी अधिकतम परिचालन गति 110 किलोमीटर प्रति घंटे तक ले जाने की कोशिश कर रहा है। यदि रेलवे की योजना सफल होती है तो यह देश में हाइड्रोजन आधारित रेल परिवहन की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी।

अब सबसे बड़ा सवाल—किस रूट पर चलेगी ट्रेन?

हाइड्रोजन ट्रेन की गति से जुड़ी तैयारियों के साथ रेलवे के सामने अब इसके पहले परिचालन रूट को अंतिम रूप देने की चुनौती है। रेलवे इस ट्रेन के लिए उपयुक्त मार्ग चुनने को लेकर विभिन्न हितधारकों के साथ बातचीत कर रहा है।

रूट चुनते समय केवल यात्रियों की संख्या या दूरी को ही आधार नहीं बनाया जाएगा। हाइड्रोजन ईंधन की उपलब्धता, ट्रेन के रखरखाव की सुविधा, ईंधन भरने की व्यवस्था और आवश्यक तकनीकी बुनियादी ढांचे जैसे पहलुओं का भी आकलन किया जा रहा है।

हाइड्रोजन ट्रेन को नियमित रूप से संचालित करने के लिए लगातार और भरोसेमंद ईंधन आपूर्ति सबसे महत्वपूर्ण जरूरतों में से एक होगी। ऐसे में रेलवे ऐसे रूट की तलाश कर रहा है, जहां हाइड्रोजन की आपूर्ति और उससे संबंधित आवश्यक सुविधाओं को व्यावहारिक रूप से विकसित किया जा सके।

हाइड्रोजन फ्यूल सप्लाई के लिए तैयार करना होगा इंफ्रास्ट्रक्चर

पारंपरिक डीजल या इलेक्ट्रिक ट्रेन की तुलना में हाइड्रोजन-पावर्ड ट्रेन के लिए अलग तरह के बुनियादी ढांचे की जरूरत होती है। ट्रेन को नियमित रूप से हाइड्रोजन उपलब्ध कराने के लिए विशेष फ्यूलिंग व्यवस्था तैयार करनी होगी। इसके अलावा हाइड्रोजन के सुरक्षित भंडारण और संचालन के लिए भी आवश्यक तकनीकी मानकों का पालन करना होगा।

रेलवे अधिकारी इन्हीं जरूरतों का अध्ययन कर रहे हैं। ट्रेन को किसी रूट पर उतारने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी होगा कि वहां हाइड्रोजन की सप्लाई बिना किसी बाधा के जारी रह सके।

रेलवे विभिन्न स्टेकहोल्डर्स के साथ इसी मुद्दे पर विचार-विमर्श कर रहा है। तकनीकी आवश्यकताओं के साथ सुरक्षा व्यवस्था भी परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी।

डीजल ट्रेनों का बन सकती है स्वच्छ विकल्प

हाइड्रोजन आधारित ट्रेन तकनीक को रेल परिवहन में कार्बन उत्सर्जन कम करने के विकल्प के रूप में देखा जाता है। खासकर उन मार्गों पर जहां पूर्ण विद्युतीकरण व्यावहारिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो, वहां भविष्य में ऐसी तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है।

हाइड्रोजन फ्यूल सेल में हाइड्रोजन का इस्तेमाल बिजली पैदा करने के लिए किया जाता है। यही बिजली ट्रेन की प्रणोदन प्रणाली को ऊर्जा उपलब्ध कराती है। यदि इसके लिए इस्तेमाल होने वाला हाइड्रोजन स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों से तैयार किया जाए तो रेल परिवहन के पर्यावरणीय प्रभाव को और कम करने में मदद मिल सकती है।

भारत जैसे विशाल रेलवे नेटवर्क वाले देश के लिए वैकल्पिक ऊर्जा तकनीकों का सफल परीक्षण महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि बड़े स्तर पर हाइड्रोजन ट्रेनें चलाने से पहले ईंधन की लागत, उपलब्धता, रखरखाव और आधारभूत संरचना जैसे पहलुओं का समाधान करना होगा।

120 पर ट्रायल, 110 पर चलाने की तैयारी

हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना में सबसे महत्वपूर्ण प्रगति इसका 120 किलोमीटर प्रति घंटे की गति पर सफल परीक्षण है। इससे यह संकेत मिला है कि ट्रेन अधिक गति पर संचालन की तकनीकी क्षमता रखती है। इसके बावजूद नियमित यात्री सेवा में सुरक्षा और परिचालन आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए रेलवे फिलहाल अधिकतम 110 किलोमीटर प्रति घंटे की गति का लक्ष्य लेकर चल रहा है।

वर्तमान में इसकी परिचालन गति 75 किलोमीटर प्रति घंटे रखी गई है। यानी रेलवे की नई योजना सफल होने पर ट्रेन की अधिकतम गति में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है।

रेलवे के लिए नई तकनीक का बड़ा प्रयोग

भारतीय रेलवे पिछले कुछ वर्षों से ऊर्जा दक्षता बढ़ाने और पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करने की दिशा में कई स्तरों पर काम कर रहा है। हाइड्रोजन ट्रेन इसी दिशा में महत्वपूर्ण प्रयोग है। इसके सफल परिचालन से रेलवे को भविष्य में वैकल्पिक ईंधन आधारित ट्रेनों की संभावनाओं का वास्तविक आकलन करने में मदद मिलेगी।

फिलहाल यात्रियों की नजर इस बात पर है कि देश की पहली हाइड्रोजन-पावर्ड ट्रेन किस रूट पर उतारी जाएगी। रेलवे की ओर से मार्ग का अंतिम चयन होने और हाइड्रोजन ईंधन की नियमित आपूर्ति के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होने के बाद इसके परिचालन को लेकर तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।

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