मध्य प्रदेश

उज्जैन में शराब पी रहे युवकों ने पुलिसकर्मियों पर किया हमला, कांस्टेबल गंभीर घायल

Kavita2
24 Oct 2026 4:13 PM IST
उज्जैन में शराब पी रहे युवकों ने पुलिसकर्मियों पर किया हमला, कांस्टेबल गंभीर घायल
x

उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन में शुक्रवार देर रात पुलिसकर्मियों पर हमले का मामला सामने आया है। सड़क किनारे शराब पी रहे कुछ युवकों को रोकना पुलिसकर्मियों को भारी पड़ गया। आरोप है कि शराब पीने से मना करने पर युवकों ने पुलिस टीम के साथ विवाद शुरू कर दिया और देखते ही देखते मामला मारपीट तक पहुंच गया। इस घटना में एक पुलिस कांस्टेबल के गंभीर रूप से घायल होने की खबर है। वहीं, पुलिस वाहन के ड्राइवर के साथ भी मारपीट की गई और उसके कपड़े फाड़ दिए गए। घटना के बाद पुलिसकर्मियों की सुरक्षा और सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने वालों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

रात करीब 10:30 बजे हुई घटना

प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना शुक्रवार रात करीब 10:30 बजे नीलगंगा थाना क्षेत्र के अंतर्गत संवरखेड़ी रोड पर हुई। पुलिस की फर्स्ट रिस्पॉन्स व्हीकल (एफआरवी) टीम इलाके में नियमित गश्त कर रही थी। इस दौरान टीम सड़क किनारे मौजूद दुकानदारों से दुकानें बंद करने के लिए कह रही थी।

गश्त के दौरान पुलिस वाहन संवरखेड़ी रोड स्थित बंधन गार्डन के पास पहुंचा। यहां कुछ युवक सड़क किनारे बैठकर शराब पी रहे थे। पुलिसकर्मियों ने उन्हें सार्वजनिक स्थान पर शराब पीने से रोका। इसी बात को लेकर युवकों और पुलिसकर्मियों के बीच कहासुनी शुरू हो गई।

बताया जा रहा है कि शुरुआती बहस कुछ ही देर में हिंसक झड़प में बदल गई। आरोप है कि युवकों ने पुलिसकर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार किया और इसके बाद मारपीट शुरू कर दी।

कांस्टेबल विक्रम सिंह चौहान पर हमला

जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार रात कांस्टेबल विक्रम सिंह चौहान एफआरवी वाहन के ड्राइवर लोकेन्द्र के साथ ड्यूटी पर तैनात थे। दोनों क्षेत्र में गश्त करते हुए कानून व्यवस्था बनाए रखने का काम कर रहे थे।

बंधन गार्डन के पास सड़क किनारे शराब पी रहे युवकों को रोकने के दौरान विवाद बढ़ गया। आरोप है कि युवकों ने पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया। इस दौरान कांस्टेबल विक्रम सिंह चौहान गंभीर रूप से घायल हो गए।

घटना में उन्हें कितनी और किस प्रकार की चोटें आई हैं, इसकी विस्तृत जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है। हालांकि, कांस्टेबल के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना ने मामले को संवेदनशील बना दिया है।

ड्राइवर लोकेन्द्र से भी मारपीट, कपड़े फाड़े

हमले के दौरान पुलिस वाहन के ड्राइवर लोकेन्द्र को भी निशाना बनाया गया। आरोप है कि युवकों ने उनके साथ मारपीट की और धक्का-मुक्की के दौरान उनके कपड़े तक फाड़ दिए।

इस घटना से अंदाजा लगाया जा सकता है कि मौके पर विवाद किस हद तक बढ़ गया था। पुलिस टीम का उद्देश्य सार्वजनिक स्थान पर शराब पी रहे युवकों को रोकना था, लेकिन आरोपियों ने समझाइश मानने के बजाय पुलिसकर्मियों से ही विवाद शुरू कर दिया।

ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों के साथ इस तरह की मारपीट का मामला गंभीर माना जाता है। विशेष रूप से तब, जब पुलिसकर्मी कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए गश्त कर रहे हों।

दुकानदारों को दुकान बंद करने की दे रही थी समझाइश

घटना से पहले एफआरवी टीम इलाके में गश्त कर रही थी। पुलिसकर्मी दुकानदारों को दुकानें बंद करने के लिए कह रहे थे। इसी दौरान टीम बंधन गार्डन के पास पहुंची थी।

रात के समय सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने और इसके कारण होने वाले विवादों को रोकना पुलिस की नियमित निगरानी का हिस्सा होता है। ऐसे स्थानों पर कई बार शराब के नशे में विवाद, मारपीट और अन्य अप्रिय घटनाएं होने की आशंका बनी रहती है।

इसी वजह से पुलिसकर्मी सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने वालों को रोकते हैं और जरूरत पड़ने पर नियमानुसार कार्रवाई करते हैं। उज्जैन की इस घटना में भी पुलिस टीम ने युवकों को शराब पीने से रोकने का प्रयास किया था।

पुलिसकर्मियों पर हमले से सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

इस घटना ने एक बार फिर ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की सुरक्षा का मुद्दा सामने ला दिया है। आम नागरिकों की सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी संभालने वाले पुलिसकर्मियों पर ही हमला होना चिंता का विषय है।

विशेषज्ञों के अनुसार, गश्त के दौरान पुलिसकर्मियों को कई बार ऐसे लोगों का सामना करना पड़ता है, जो नशे की हालत में होते हैं। ऐसे मामलों में सामान्य समझाइश भी विवाद का कारण बन सकती है।

खासकर देर रात सीमित पुलिस बल के साथ गश्त करने वाली टीमों के लिए इस तरह की परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं। इसलिए संवेदनशील स्थानों पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त पुलिस सहायता महत्वपूर्ण मानी जाती है।

सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने से बढ़ते हैं विवाद

सड़क किनारे और सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने की घटनाएं कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकती हैं। नशे की हालत में कुछ लोग सामान्य बातचीत या समझाइश को लेकर भी आक्रामक हो सकते हैं।

ऐसी परिस्थितियों में आसपास मौजूद लोगों, राहगीरों और दुकानदारों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने से रोकने के पीछे मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों की सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखना होता है।

उज्जैन की घटना में भी पुलिसकर्मियों ने इसी उद्देश्य से युवकों को रोका था। हालांकि, आरोपियों ने पुलिस की बात मानने के बजाय विवाद को हिंसक रूप दे दिया।

आरोपियों की पहचान और कार्रवाई को लेकर जानकारी का इंतजार

फिलहाल उपलब्ध जानकारी में हमला करने वाले युवकों की संख्या और उनकी पहचान स्पष्ट नहीं हो सकी है। इसके अलावा घटना के संबंध में कितने लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है या किसी की गिरफ्तारी हुई है, इसकी भी पुष्टि नहीं हुई है।

मामले में आगे की कार्रवाई और घटनाक्रम को लेकर पुलिस की आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। पुलिस की जांच में यह स्पष्ट हो सकेगा कि विवाद किस तरह शुरू हुआ और हमले में कौन-कौन शामिल था।

घटना ने खड़े किए गंभीर सवाल

उज्जैन के नीलगंगा थाना क्षेत्र में हुई यह घटना कानून व्यवस्था के लिहाज से गंभीर है। रात में गश्त कर रहे पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट और एक कांस्टेबल के घायल होने की खबर ने ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

अब इस मामले में आरोपियों की पहचान, घटना की परिस्थितियों और कानूनी कार्रवाई से जुड़ी जानकारी महत्वपूर्ण होगी। वहीं, घायल कांस्टेबल की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर भी विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।

Next Story