मध्य प्रदेश

IIT इंदौर ने 104 आवेदनों में से चुने 5 स्टार्टअप

Kavita2
23 Oct 2026 12:42 PM IST
IIT इंदौर ने 104 आवेदनों में से चुने 5 स्टार्टअप
x

इंदौर। मध्य प्रदेश में तकनीकी नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) इंदौर ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। संस्थान ने सिंहासा आईटी पार्क स्थित अपने लॉन्चपैड इनक्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर के पहले बैच के लिए पांच स्टार्टअप का चयन किया है। ये स्टार्टअप हेल्थकेयर, प्रिसिजन एग्रीकल्चर यानी सटीक कृषि, असिस्टिव केयर, इमर्सिव ट्रेनिंग और डिफेंस टेक्नोलॉजी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। इस इनक्यूबेशन कार्यक्रम के लिए कुल 104 आवेदन प्राप्त हुए थे। कई चरणों की जांच, संस्थापकों से बातचीत, प्रस्तुतियों और निवेश समिति की सिफारिशों के बाद पांच स्टार्टअप को चुना गया। चयनित स्टार्टअप को तकनीकी मार्गदर्शन, अनुसंधान संसाधनों और उद्योग विशेषज्ञों के सहयोग से अपने उत्पाद विकसित करने का अवसर मिलेगा।

104 आवेदनों में से सिर्फ पांच स्टार्टअप का चयन

लॉन्चपैड इनक्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर के पहले कोहॉर्ट के लिए देश के विभिन्न क्षेत्रों से तकनीकी नवाचार पर काम करने वाले उद्यमियों ने आवेदन किए थे।

केंद्र को कुल 104 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से पांच स्टार्टअप का चयन इनक्यूबेशन कार्यक्रम के लिए किया गया।

चयन प्रक्रिया में स्टार्टअप के तकनीकी समाधान, व्यावहारिक उपयोगिता, बाजार की संभावनाओं और आगे विस्तार की क्षमता जैसे पहलुओं का मूल्यांकन किया गया।

आवेदकों को कई चरणों से गुजरना पड़ा। इनमें प्रारंभिक स्क्रीनिंग, विशेषज्ञों के साथ बातचीत, स्टार्टअप आइडिया की प्रस्तुति और निवेश समिति की समीक्षा शामिल रही।

अंतिम चयन में उन स्टार्टअप को प्राथमिकता दी गई, जिनके तकनीकी समाधान वास्तविक समस्याओं को दूर करने की क्षमता रखते हैं।

पांच महत्वपूर्ण क्षेत्रों में काम करेंगे स्टार्टअप

चयनित स्टार्टअप अलग-अलग तकनीकी क्षेत्रों में नवाचार कर रहे हैं।

हेल्थकेयर से जुड़े स्टार्टअप चिकित्सा सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने वाले समाधान विकसित कर रहे हैं। इनमें डिजिटल तकनीक और आधुनिक उपकरणों की सहायता से मरीजों की देखभाल तथा स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की संभावनाएं शामिल हैं।

प्रिसिजन एग्रीकल्चर क्षेत्र में काम करने वाले स्टार्टअप का उद्देश्य खेती में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाना है।

इसके तहत सेंसर, डेटा विश्लेषण और अन्य डिजिटल प्रणालियों से किसानों को संसाधनों का बेहतर उपयोग करने में सहायता मिल सकती है।

वहीं असिस्टिव केयर से जुड़े नवाचार बुजुर्गों, दिव्यांग व्यक्तियों और विशेष सहायता की आवश्यकता वाले लोगों की दैनिक गतिविधियों को आसान बनाने की दिशा में काम कर सकते हैं।

इमर्सिव ट्रेनिंग में आभासी और संवर्धित वास्तविकता जैसी तकनीकों का उपयोग प्रशिक्षण को अधिक प्रभावी बनाने के लिए किया जा सकता है।

डिफेंस टेक्नोलॉजी से जुड़े स्टार्टअप सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र में आधुनिक तकनीकी समाधान विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करेंगे।

आईआईटी इंदौर और एमपीएसईडीसी की संयुक्त पहल

इस इनक्यूबेशन सेंटर की स्थापना आईआईटी इंदौर की आईआईटीआई दृष्टि साइबर-फिजिकल सिस्टम्स फाउंडेशन और मध्य प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के सहयोग से की गई है।

यह केंद्र राज्य में तकनीक आधारित उद्यमिता को मजबूत बनाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।

आईआईटीआई दृष्टि सीपीएस फाउंडेशन का कार्यक्षेत्र आधुनिक डिजिटल तकनीक, हेल्थकेयर, साइबर-फिजिकल सिस्टम और उद्योगों से जुड़े नवाचारों को प्रोत्साहित करना है।

केंद्र सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत राष्ट्रीय अंतःविषयक साइबर-फिजिकल सिस्टम मिशन में भी आईआईटी इंदौर की इस फाउंडेशन की महत्वपूर्ण भूमिका है।

ऑनबोर्डिंग कार्यक्रम में संस्थापकों ने पेश किए अपने नवाचार

चयनित स्टार्टअप के लिए आयोजित ऑनबोर्डिंग कार्यक्रम में संस्थापकों ने अपने व्यावसायिक मॉडल और तकनीकी समाधानों की जानकारी दी।

कार्यक्रम के दौरान स्टार्टअप संस्थापकों ने बताया कि वे किस समस्या का समाधान तैयार कर रहे हैं और उनकी तकनीक का वास्तविक परिस्थितियों में किस प्रकार उपयोग किया जा सकता है।

इसके अलावा उन्हें उद्योग, शिक्षा, अनुसंधान और स्टार्टअप इकोसिस्टम से जुड़े विशेषज्ञों के साथ बातचीत करने का अवसर मिला।

विशेषज्ञों ने तकनीकी उत्पादों के विकास, बाजार की आवश्यकताओं और व्यवसाय को आगे बढ़ाने से जुड़े पहलुओं पर चर्चा की।

इस तरह के संवाद का उद्देश्य नए उद्यमियों को तकनीकी विशेषज्ञता के साथ व्यावसायिक दृष्टिकोण विकसित करने में सहायता देना है।

स्टार्टअप को मिलेगा तकनीकी मार्गदर्शन

लॉन्चपैड केंद्र में चयनित स्टार्टअप को अपने तकनीकी समाधान विकसित करने और बाजार तक पहुंचाने के लिए मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा।

इनक्यूबेशन कार्यक्रम के तहत उद्यमियों को अनुसंधान सुविधाओं, तकनीकी विशेषज्ञों और उद्योग से जुड़े लोगों के साथ काम करने के अवसर मिल सकते हैं।

इसके अलावा उत्पादों की जांच, शुरुआती मॉडल तैयार करने और उनकी व्यावहारिक उपयोगिता पर काम किया जा सकेगा।

स्टार्टअप के विकास में निवेशकों से संपर्क और व्यावसायिक साझेदारी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

ऐसे में इनक्यूबेशन सेंटर नए उद्यमियों को तकनीकी संसाधनों के साथ उद्योग जगत से जोड़ने का माध्यम बन सकता है।

करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से विकसित हुआ केंद्र

इंदौर के सिंहासा आईटी पार्क में स्थापित लॉन्चपैड इनक्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर को आधुनिक तकनीकी सुविधाओं के साथ विकसित किया गया है।

इस परियोजना के बुनियादी ढांचे पर लगभग 10 करोड़ रुपये के निवेश की जानकारी सामने आई थी।

केंद्र का उद्देश्य डीप टेक्नोलॉजी यानी ऐसी उन्नत तकनीकों पर आधारित स्टार्टअप को प्रोत्साहित करना है, जिनके विकास में वैज्ञानिक अनुसंधान और विशेष तकनीकी विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है।

लॉन्चपैड में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, डिजिटल हेल्थकेयर और आधुनिक विनिर्माण जैसी तकनीकों पर काम करने की सुविधाएं विकसित की गई हैं।

मध्य प्रदेश में स्टार्टअप संस्कृति को मिलेगा बढ़ावा

मध्य प्रदेश सरकार राज्य में सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स और नवाचार आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित करने की दिशा में काम कर रही है।

इंदौर पहले से शिक्षा, उद्योग और व्यापार के प्रमुख केंद्रों में शामिल है।

शहर में आईआईटी इंदौर जैसे संस्थान की मौजूदगी तकनीकी उद्यमिता को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

नए स्टार्टअप के विकास से स्थानीय स्तर पर रोजगार, अनुसंधान और उद्योगों के साथ सहयोग के अवसर पैदा हो सकते हैं।

विशेष रूप से ऐसे उद्यम, जो कृषि, स्वास्थ्य और सुरक्षा जैसी वास्तविक चुनौतियों का समाधान तैयार करते हैं, समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उपयोगी साबित हो सकते हैं।

रिसर्च को बाजार तक पहुंचाने पर जोर

कई बार विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों में विकसित तकनीकी समाधान प्रयोगशालाओं तक सीमित रह जाते हैं।

इनक्यूबेशन केंद्रों का उद्देश्य ऐसे नवाचारों को व्यावसायिक उत्पादों और सेवाओं में बदलने में सहायता करना होता है।

आईआईटी इंदौर की दृष्टि सीपीएस फाउंडेशन भी तकनीकी अनुसंधान को व्यावहारिक उपयोग तक पहुंचाने पर काम कर रही है।

इस पहल के तहत नए उद्यमियों को उत्पाद विकास, परीक्षण और संभावित व्यावसायीकरण के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।

इससे शोधकर्ताओं और स्टार्टअप संस्थापकों के बीच बेहतर समन्वय विकसित होने की संभावना है।

पहले बैच से नई तकनीकी संभावनाओं को मिलेगी दिशा

लॉन्चपैड इनक्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर के पहले बैच में पांच स्टार्टअप का चयन इंदौर के तकनीकी उद्यमिता क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

104 आवेदनों में से चयनित इन स्टार्टअप को अब अपने नवाचारों को अधिक विकसित करने का अवसर मिलेगा।

आने वाले समय में इनकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ये तकनीकी समाधान कितने प्रभावी साबित होते हैं और बाजार में उनकी कितनी उपयोगिता बन पाती है।

फिलहाल आईआईटी इंदौर की यह पहल अनुसंधान, उद्योग और उद्यमिता को एक मंच पर लाकर मध्य प्रदेश के स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में एक नया प्रयास है।

Next Story