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इंदौर। राष्ट्रीय सुरक्षा की बदलती चुनौतियों के बीच प्रबंधन विशेषज्ञता, सैन्य अनुभव और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बेहतर समन्वय की दिशा में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट इंदौर (IIM इंदौर) और भारतीय सेना के मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग (MCTE) ने संयुक्त रूप से ‘राष्ट्रीय कर्तव्य 2.0’ कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी जटिल चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रबंधन, तकनीक और सैन्य रणनीति को एक साझा मंच पर लाना रहा।
कार्यक्रम में सेना और शिक्षा जगत से जुड़े विशेषज्ञों ने राष्ट्रीय सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया। इस दौरान टेक्नोलॉजी, डेटा, लॉजिस्टिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रणनीतिक निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में आधुनिक प्रबंधन तकनीकों के इस्तेमाल पर विशेष जोर दिया गया।
राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए नई सोच पर जोर
कार्यक्रम का उद्घाटन IIM इंदौर के निदेशक प्रो. हिमांशु राय ने किया। इस अवसर पर MCTE के डिप्टी कमांडेंट एवं चीफ इंस्ट्रक्टर मेजर जनरल गौतम महाजन सहित सेना और शिक्षा जगत से जुड़े अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि वर्तमान समय में राष्ट्रीय सुरक्षा केवल पारंपरिक सैन्य क्षमताओं तक सीमित नहीं रह गई है। साइबर तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स, संचार प्रणालियों और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सेना को तकनीकी विशेषज्ञता और प्रबंधन के आधुनिक तरीकों से जोड़ना जरूरी हो गया है।
विशेषज्ञों ने कहा कि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए विभिन्न क्षेत्रों की विशेषज्ञता को एक साथ लाने की आवश्यकता है। इसी दिशा में ‘राष्ट्रीय कर्तव्य 2.0’ को एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
AI और डेटा की बढ़ती भूमिका
कार्यक्रम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा के इस्तेमाल पर विशेष चर्चा हुई। आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी मात्रा में डेटा उपलब्ध होता है। इस डेटा का सही विश्लेषण करके संभावित खतरों की पहचान, संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल और निर्णय लेने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
विशेषज्ञों ने बताया कि AI आधारित तकनीकें सैन्य अभियानों के अलावा निगरानी, लॉजिस्टिक्स, संचार और रणनीतिक योजना जैसे क्षेत्रों में भी उपयोगी हो सकती हैं। हालांकि, तकनीक के इस्तेमाल के साथ उससे जुड़े जोखिमों और जिम्मेदारियों पर भी ध्यान देना जरूरी है।
राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में तकनीक को अपनाते समय डेटा की सुरक्षा, विश्वसनीयता और निर्णय प्रक्रिया में मानवीय भूमिका जैसे विषय भी महत्वपूर्ण हैं। कार्यक्रम में इन पहलुओं पर विचार-विमर्श के माध्यम से संतुलित दृष्टिकोण विकसित करने की कोशिश की गई।
सेना और प्रबंधन विशेषज्ञता का संगम
‘राष्ट्रीय कर्तव्य 2.0’ की खासियत सेना और प्रबंधन शिक्षा के विशेषज्ञों का एक मंच पर आना रहा। सेना के अधिकारियों के पास जटिल परिस्थितियों में नेतृत्व, संसाधन प्रबंधन और त्वरित निर्णय लेने का व्यावहारिक अनुभव होता है। वहीं प्रबंधन संस्थानों में रणनीति, डेटा विश्लेषण, संगठनात्मक व्यवहार और संसाधनों के प्रभावी उपयोग जैसे विषयों पर शोध और प्रशिक्षण किया जाता है।
इन दोनों क्षेत्रों के अनुभव को जोड़कर राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए नई रणनीतियां विकसित की जा सकती हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य भी इसी प्रकार के सहयोग को बढ़ावा देना रहा।
विशेषज्ञों ने माना कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में संसाधनों का कुशल प्रबंधन बेहद महत्वपूर्ण है। सीमित संसाधनों के बीच सही प्राथमिकताएं तय करना और उपलब्ध तकनीक का अधिकतम उपयोग करना किसी भी सुरक्षा व्यवस्था की क्षमता को मजबूत कर सकता है।
लॉजिस्टिक्स और रणनीतिक निर्णय पर चर्चा
कार्यक्रम में रक्षा क्षेत्र में लॉजिस्टिक्स की भूमिका पर भी चर्चा हुई। किसी भी सैन्य अभियान के लिए समय पर आवश्यक संसाधनों, उपकरणों और अन्य सामग्री की उपलब्धता महत्वपूर्ण होती है। आधुनिक तकनीक और डेटा विश्लेषण के जरिए लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को अधिक कुशल बनाया जा सकता है।
इसके साथ ही रणनीतिक निर्णय लेने की प्रक्रिया में डेटा आधारित दृष्टिकोण को अपनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। विशेषज्ञों के अनुसार तेजी से बदलते सुरक्षा वातावरण में निर्णय लेने में देरी गंभीर चुनौती बन सकती है। ऐसे में तकनीक और विश्लेषणात्मक क्षमता निर्णय प्रक्रिया को अधिक सटीक और प्रभावी बनाने में मदद कर सकती है।
शिक्षा और रक्षा क्षेत्र के सहयोग की दिशा में पहल
IIM इंदौर और MCTE की संयुक्त पहल को शिक्षा और रक्षा क्षेत्र के बीच सहयोग बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस तरह के कार्यक्रमों से दोनों क्षेत्रों के विशेषज्ञों को एक-दूसरे के अनुभव और ज्ञान को समझने का अवसर मिलता है।
कार्यक्रम में यह संदेश भी सामने आया कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे व्यापक विषय पर केवल एक क्षेत्र के नजरिए से समाधान तलाशना पर्याप्त नहीं है। सैन्य अनुभव के साथ तकनीकी, प्रबंधन और अकादमिक विशेषज्ञता को जोड़कर अधिक व्यापक रणनीति तैयार की जा सकती है।
‘राष्ट्रीय कर्तव्य 2.0’ ने इसी सोच को आगे बढ़ाने का प्रयास किया। कार्यक्रम में हुए विचार-विमर्श ने राष्ट्रीय सुरक्षा में AI, डेटा, तकनीक, लॉजिस्टिक्स और रणनीतिक प्रबंधन की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया। IIM इंदौर और MCTE की यह साझेदारी भविष्य में रक्षा क्षेत्र की नई चुनौतियों के लिए ज्ञान, तकनीक और प्रबंधन के बीच बेहतर तालमेल विकसित करने की दिशा में उपयोगी साबित हो सकती है।





