मध्य प्रदेश

वोटर नहीं होने पर नहीं सुनूंगा: विधायक के बयान से विवाद

Saba Naaz
17 July 2026 5:53 PM IST
वोटर नहीं होने पर नहीं सुनूंगा: विधायक के बयान से विवाद
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मध्य प्रदेश: शिवपुरी जिले से जनप्रतिनिधि और आम जनता के बीच संवाद को लेकर एक विवादित मामला सामने आया है। करैरा विधानसभा क्षेत्र में आयोजित जन चौपाल के दौरान उस समय हंगामा हो गया, जब पोहरी विधानसभा क्षेत्र से अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे ग्रामीणों की शिकायतें सुनने से विधायक ने कथित तौर पर इनकार कर दिया। विधायक के जवाब से नाराज ग्रामीणों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। विरोध के दौरान एक ग्रामीण ने अपने छोटे बच्चे को विधायक की गाड़ी के गर्म बोनट पर रख दिया, जिसके बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

जानकारी के अनुसार, यह मामला शिवपुरी जिले की नरवर तहसील का है। बुधवार को नरवर स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर भवन में करैरा विधायक की ओर से जन चौपाल का आयोजन किया गया था। इस चौपाल में करैरा विधानसभा क्षेत्र के लोगों की समस्याएं सुनी जा रही थीं। बड़ी संख्या में ग्रामीण अपनी शिकायतें और आवेदन लेकर पहुंचे थे। इसी दौरान पोहरी विधानसभा क्षेत्र के नानकपुर और बरखाड़ी गांव के करीब 8 से 10 ग्रामीण भी अपनी समस्याएं लेकर जन चौपाल में पहुंचे।

ग्रामीणों ने बताया कि उनके गांव में पेयजल और बिजली से जुड़ी गंभीर समस्याएं हैं। इन्हीं समस्याओं को लेकर वे विधायक के पास पहुंचे थे, ताकि उनकी शिकायतों का समाधान हो सके। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी समस्या सुनने के बजाय विधायक ने यह कहते हुए आवेदन लेने से इनकार कर दिया कि वे उनके विधानसभा क्षेत्र के मतदाता नहीं हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, विधायक ने ग्रामीणों से कहा कि वे पोहरी विधानसभा क्षेत्र के रहने वाले हैं और इसलिए उनकी समस्याओं का समाधान पोहरी विधायक के पास जाकर ही होगा। विधायक के इस कथित बयान के बाद ग्रामीण नाराज हो गए और मौके पर ही विरोध शुरू कर दिया।

ग्रामीणों का कहना था कि वे किसी व्यक्तिगत काम के लिए नहीं बल्कि सरकार के पास अपनी समस्याएं लेकर आए हैं। उनका तर्क था कि विधायक सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधि हैं और जनता की समस्याओं को सुनना उनकी जिम्मेदारी है। ग्रामीणों ने कहा कि विधानसभा क्षेत्र अलग होने से आम लोगों की परेशानियां खत्म नहीं हो जातीं। सरकार के प्रतिनिधि होने के नाते उन्हें जनता की बात सुननी चाहिए।

मामला बढ़ने के बाद मौके पर मौजूद लोगों और ग्रामीणों के बीच बहस शुरू हो गई। कुछ देर तक वहां नोकझोंक होती रही। इसी दौरान एक ग्रामीण ने अनोखे तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया। उसने अपनी नाराजगी जताते हुए अपने 3 से 4 साल के मासूम बच्चे को विधायक की खड़ी कार के गर्म बोनट पर रख दिया।

ग्रामीण ने इस दौरान कहा कि जब उनकी समस्याएं सुनने वाला कोई नहीं है तो उनके बच्चों को ही ले जाया जाए। इस घटना के बाद मौके पर मौजूद लोग हैरान रह गए। किसी व्यक्ति ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

वीडियो सामने आने के बाद यह मामला राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गया है। लोग जनप्रतिनिधियों के व्यवहार और जनता से उनके संवाद को लेकर सवाल उठा रहे हैं। वहीं, कुछ लोग ग्रामीण द्वारा बच्चे को गर्म बोनट पर रखने के तरीके को भी गलत बता रहे हैं और इसे बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला मान रहे हैं।

इस पूरे विवाद को लेकर अभी तक विधायक की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि मामला सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि वे अपनी समस्याओं के समाधान के लिए जनप्रतिनिधियों के पास जाते हैं और उन्हें उम्मीद होती है कि उनकी बात सुनी जाएगी।

यह घटना एक बार फिर इस सवाल को सामने लाती है कि जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी केवल अपने क्षेत्र के मतदाताओं तक सीमित है या फिर जनता की समस्याओं को व्यापक रूप से सुनना भी उनकी जिम्मेदारी है। फिलहाल वायरल वीडियो के बाद प्रशासन और राजनीतिक गलियारों में इस मामले को लेकर चर्चा जारी है।

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