मध्य प्रदेश

इंदौर के इंजीनियरिंग कॉलेज में हिंदी मीडियम BTech सिविल कोर्स शुरू

Kavita2
6 May 2026 3:58 PM IST
इंदौर के इंजीनियरिंग कॉलेज में हिंदी मीडियम BTech सिविल कोर्स शुरू
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Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित एक सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज ने तकनीकी शिक्षा को मातृभाषा में बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अधिकारियों के अनुसार, कॉलेज में अब सिविल इंजीनियरिंग में BTech कोर्स हिंदी मीडियम में भी शुरू किया गया है। यह पहल राज्य में तकनीकी शिक्षा को अधिक सुलभ और समावेशी बनाने के उद्देश्य से की गई है।

इस नए प्रावधान के तहत छात्रों को एक विशेष प्रोत्साहन भी दिया जाएगा। यदि विद्यार्थी अपने कोर्स के अंतिम वर्ष तक हिंदी मीडियम में पढ़ाई जारी रखते हैं, तो उन्हें 2 लाख रुपये का इंसेंटिव प्रदान किया जाएगा। यह योजना छात्रों को मातृभाषा में तकनीकी शिक्षा अपनाने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से शुरू की गई है।

सरकारी प्रतिनिधियों ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता हर वर्ग और पृष्ठभूमि के प्रतिभाशाली छात्रों को समान अवसर प्रदान करना है। इस दिशा में हिंदी मीडियम में तकनीकी शिक्षा का विस्तार एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है, जो आने वाले समय में बड़ी संख्या में युवाओं को प्रभावित करेगा।

बताया गया कि इंदौर स्थित SGSITS Indore में वर्ष 1952 से अंग्रेजी मीडियम में BTech (सिविल) की पढ़ाई कराई जा रही है। अब इस संस्थान में हिंदी मीडियम के लिए भी अलग से सीटें उपलब्ध कराई गई हैं।अधिकारियों के अनुसार,

पहले जहां अंग्रेजी मीडियम में 90 सीटें थीं, वहीं हिंदी मीडियम के लिए 30 अतिरिक्त सीटों को मंजूरी दी गई है। इस प्रकार अब सिविल इंजीनियरिंग BTech कोर्स में कुल 120 छात्रों को प्रवेश मिलेगा।

हिंदी मीडियम कोर्स शुरू करने से पहले विशेषज्ञों की एक टीम पिछले चार वर्षों से कार्य कर रही थी, जो AICTE से मान्यता प्राप्त अंग्रेजी पुस्तकों का हिंदी में अनुवाद करने में जुटी थी। यह कार्य छात्रों को बेहतर अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया।

इसके अलावा, शिक्षकों को भी इस नई प्रणाली के अनुसार तैयार करने के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम और वर्कशॉप आयोजित की गई हैं, ताकि वे हिंदी मीडियम में तकनीकी विषयों को प्रभावी ढंग से पढ़ा सकें।

अधिकारियों का मानना है कि यह पहल तकनीकी शिक्षा को भाषा की बाधा से मुक्त करने में मदद करेगी और ग्रामीण तथा हिंदी भाषी छात्रों के लिए उच्च शिक्षा के अवसरों को और अधिक सुलभ बनाएगी।

फिलहाल इस योजना को लेकर छात्रों और अभिभावकों में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है, और इसे देश में तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रयोग के रूप में देखा जा रहा है।

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