- Home
- /
- राज्य
- /
- मध्य प्रदेश
- /
- मध्य प्रदेश में भारी...
मध्य प्रदेश में भारी बारिश का अलर्ट, जबलपुर समेत 13 जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी

भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई के बीच एक बार फिर बारिश का दौर तेज होने वाला है। क्षेत्र में सक्रिय हुए नए मौसम सिस्टम के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने शुक्रवार को जबलपुर समेत 13 जिलों के लिए बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक अगले 24 घंटों के दौरान कुछ स्थानों पर चार इंच से अधिक बारिश दर्ज की जा सकती है।
दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026 की वापसी की प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद मध्य प्रदेश में सक्रिय मौसम प्रणाली के कारण बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। इसका सबसे ज्यादा असर पूर्वी, मध्य और दक्षिणी मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में दिखाई दे सकता है। मौसम विभाग के अनुसार इस सिस्टम का प्रभाव 27 सितंबर तक बने रहने की संभावना है।
IMD के पूर्वानुमान के मुताबिक टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, दमोह, उमरिया, जबलपुर, नरसिंहपुर, मंडला, छिंदवाड़ा, सिवनी और बालाघाट जिलों में बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। इन सभी 13 जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। यहां कुछ स्थानों पर कम समय में तेज बारिश होने से निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है।
जबलपुर और आसपास के जिलों में बारिश का असर अधिक रहने का अनुमान है। बादलों की सक्रियता बढ़ने के साथ गरज-चमक और तेज बारिश की स्थिति बन सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार बारिश होने की स्थिति में कच्ची और कमजोर सड़कों पर आवागमन प्रभावित हो सकता है। वहीं शहरों में निचले इलाकों और अंडरपास में पानी जमा होने की आशंका बनी रहेगी।
मौसम विभाग ने लोगों को ऑरेंज अलर्ट वाले क्षेत्रों में सतर्क रहने की सलाह दी है। बहुत भारी बारिश के दौरान नदी-नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। छोटे पुलों और रपटों के ऊपर पानी आने की स्थिति में उन्हें पार करना जोखिम भरा हो सकता है। प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने और मौसम खराब होने पर अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।
मध्य प्रदेश में सितंबर के अंतिम सप्ताह में आमतौर पर मानसून की वापसी की परिस्थितियां बनने लगती हैं, लेकिन सक्रिय मौसमी सिस्टम के कारण कई बार विदाई से पहले तेज बारिश का दौर देखने को मिलता है। इस बार भी प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में इसी तरह की स्थिति बन रही है। मानसून की वापसी की प्रक्रिया के साथ ही नए सिस्टम की सक्रियता ने मौसम का मिजाज बदल दिया है।
टीकमगढ़, छतरपुर और पन्ना जैसे बुंदेलखंड क्षेत्र के जिलों में भारी बारिश का असर कृषि गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। खेतों में तैयार या पकने की अवस्था में पहुंच चुकी फसलों के लिए लगातार बारिश चिंता बढ़ा सकती है। वहीं जहां मिट्टी में नमी की जरूरत है, वहां नियंत्रित बारिश फायदेमंद भी हो सकती है। हालांकि बहुत अधिक पानी जमा होने से फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है।
सतना और रीवा में भी बहुत भारी बारिश का पूर्वानुमान है। विंध्य क्षेत्र के इन जिलों में तेज बारिश के दौरान नदी-नालों के आसपास विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होगी। पहाड़ी या ढलान वाले इलाकों में पानी का बहाव अचानक तेज हो सकता है। ऐसे में लोगों को जलभराव वाले क्षेत्रों और तेज बहाव से दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है।
दमोह, उमरिया और जबलपुर में भी मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। यहां लगातार बारिश होने पर स्थानीय जल स्रोतों का स्तर बढ़ सकता है। शहरी क्षेत्रों में यातायात प्रभावित होने और ग्रामीण क्षेत्रों में संपर्क मार्गों पर पानी आने जैसी परिस्थितियां बन सकती हैं।
नरसिंहपुर, मंडला, छिंदवाड़ा, सिवनी और बालाघाट में भी भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान है। इनमें से कई जिलों में जंगल और पहाड़ी क्षेत्र अधिक हैं। तेज बारिश के दौरान घाट वाले रास्तों और छोटे पुल-पुलियों पर विशेष सतर्कता जरूरी होगी। वाहन चालकों को कम दृश्यता और फिसलन की स्थिति में गति नियंत्रित रखने की सलाह दी जाती है।
बारिश के साथ कुछ क्षेत्रों में गरज-चमक और बिजली गिरने का खतरा भी रह सकता है। मौसम खराब होने की स्थिति में खुले मैदान, पेड़ों के नीचे और बिजली के खंभों के आसपास खड़े होने से बचना चाहिए। किसानों और खेतों में काम करने वाले लोगों को भी गरज-चमक के दौरान सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह दी जाती है।
प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से अलग-अलग क्षेत्रों में मौसम का मिजाज बदलता रहा है। कहीं हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई तो कहीं बादल छाए रहे। अब नया सिस्टम मजबूत होने से बारिश का दायरा और तीव्रता बढ़ने की संभावना जताई गई है। इसका असर अगले दो दिनों तक प्रमुख रूप से दिखाई दे सकता है।
मौसम विभाग के अनुसार सक्रिय सिस्टम का प्रभाव 27 सितंबर तक रहने की उम्मीद है। इसके बाद इसकी तीव्रता और दिशा के आधार पर बारिश की गतिविधियों में कमी आ सकती है। हालांकि मानसून की वापसी की वास्तविक प्रगति और स्थानीय मौसम की परिस्थितियों के आधार पर पूर्वानुमान में बदलाव भी संभव है।
ऑरेंज अलर्ट का अर्थ है कि संबंधित क्षेत्रों में मौसम की स्थिति गंभीर हो सकती है और प्रशासन तथा नागरिकों को तैयार रहने की जरूरत है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर स्थान पर समान मात्रा में बारिश होगी। कुछ इलाकों में बहुत भारी बारिश हो सकती है, जबकि आसपास के दूसरे क्षेत्रों में अपेक्षाकृत कम वर्षा दर्ज की जा सकती है।
अगले 24 घंटे मध्य प्रदेश के 13 जिलों के लिए महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। टीकमगढ़ से लेकर बालाघाट तक फैले बड़े क्षेत्र में बहुत भारी बारिश की संभावना के बीच लोगों को मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की ताजा चेतावनियों पर नजर रखने की सलाह दी गई है। सक्रिय मौसम सिस्टम का असर 27 सितंबर तक बने रहने के अनुमान के कारण प्रदेश में मानसून की विदाई से पहले एक बार फिर तेज बारिश का दौर देखने को मिल सकता है।





