मध्य प्रदेश

महाकुंभ फेम महिला और पति को HC से राहत, कार्रवाई पर रोक

Kavita2
14 July 2026 10:37 AM IST
महाकुंभ फेम महिला और पति को HC से राहत, कार्रवाई पर रोक
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इंदौर : मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने प्रयागराज महाकुंभ 2025 के दौरान सुर्खियों में आई महिला और उसके पति को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने सोमवार को निर्देश दिया कि दोनों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले में अगली सुनवाई तक कोई भी दंडात्मक या जबरन कार्रवाई नहीं की जाए।

मामले की सुनवाई जस्टिस गजेंद्र सिंह की अदालत में हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया कि खरगोन जिले के महेश्वर पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर के आधार पर याचिकाकर्ताओं के खिलाफ अगली सुनवाई तक कोई कठोर कार्रवाई शुरू न की जाए।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पक्षकारों के वकीलों की दलीलों और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत दी जा रही है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई से शुरू होने वाले सप्ताह में तय की है।

जानकारी के अनुसार, यह मामला उस महिला और उसके पति से जुड़ा है, जो प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ 2025 के दौरान सोशल मीडिया और मीडिया में चर्चा का विषय बने थे। महिला की तस्वीरें और वीडियो उस समय काफी वायरल हुए थे, जिसके बाद वह लोगों के बीच पहचान में आई थी।

इसके बाद दोनों के खिलाफ खरगोन जिले के महेश्वर पुलिस थाने में एक आपराधिक मामला दर्ज किया गया था। इसी एफआईआर को लेकर महिला और उसके पति ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और राहत की मांग की थी।

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक कृष्ण तन्खा और अधिवक्ता जेरी लोपेज ने अदालत में पक्ष रखा। उन्होंने कोर्ट के सामने अपनी दलीलें पेश करते हुए कहा कि मामले में उनके खिलाफ की जा रही कार्रवाई पर रोक लगाई जानी चाहिए।

वहीं, राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल सेठी और सरकारी अधिवक्ता सुनीत कपूर अदालत में पेश हुए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी किया।

अदालत के इस फैसले के बाद महिला और उसके पति को फिलहाल राहत मिली है। हालांकि, मामले की अंतिम सुनवाई अभी बाकी है और कोर्ट आगे दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करेगा।

गौरतलब है कि प्रयागराज महाकुंभ 2025 के दौरान कई लोग सोशल मीडिया के जरिए अचानक चर्चा में आए थे। इनमें कुछ साधु-संतों और आम श्रद्धालुओं के साथ-साथ कुछ ऐसे लोग भी शामिल थे, जिनकी तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हुए थे।

महाकुंभ जैसे बड़े धार्मिक आयोजन के दौरान सोशल मीडिया पर कई तरह की सामग्री सामने आई थी। कुछ मामलों में विवाद भी पैदा हुए और पुलिस ने शिकायतों के आधार पर कार्रवाई शुरू की।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, हाई कोर्ट द्वारा दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने का मतलब यह नहीं है कि मामले को खत्म कर दिया गया है। यह केवल अंतरिम राहत है, ताकि याचिकाकर्ताओं के अधिकारों की रक्षा हो सके और अदालत मामले के सभी पहलुओं पर विचार कर सके।

अदालत ने अभी एफआईआर को रद्द करने या मामले की अंतिम स्थिति पर कोई फैसला नहीं दिया है। अगली सुनवाई में कोर्ट मामले से जुड़े तथ्यों और कानूनी पहलुओं पर आगे विचार करेगा।

फिलहाल, हाई कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस को दोनों याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कोई कठोर कदम उठाने से रोक दिया गया है। अब सभी की नजर 27 जुलाई से शुरू होने वाली अगली सुनवाई पर है, जहां मामले की आगे की दिशा तय हो सकती है।

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