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Gwalior : 33 दिन तक चले ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम में रिटायर्ड महिला से 1.57 करोड़ की ठगी

Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : ग्वालियर में साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें 69 वर्षीय रिटायर्ड लैब टेक्नीशियन से कथित तौर पर 1.57 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई। यह पूरी ठगी “डिजिटल अरेस्ट” स्कैम के जरिए 33 दिनों तक चली, जिसमें साइबर अपराधियों ने खुद को CBI और अन्य केंद्रीय एजेंसियों का अधिकारी बताकर पीड़िता को मानसिक दबाव में रखा।
पीड़िता मीनाक्षी नखरे, जो सरदार पाटणकर साहिब का बाड़ा क्षेत्र की रहने वाली हैं, ने इस मामले में ग्वालियर क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के अनुसार, यह पूरा मामला 10 मई 2026 को शुरू हुआ, जब उन्हें एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली स्थित टेलीकॉम विभाग का अधिकारी अशोक गुप्ता बताया।
कॉलर ने पीड़िता को बताया कि उनके नाम पर एक मोबाइल नंबर और बैंक खाता खोला गया है, जिसका इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य अवैध गतिविधियों में किया जा रहा है। इस आरोप के बाद महिला को डराने के लिए लगातार कॉल और मैसेज किए गए।
जब पीड़िता ने इन आरोपों को गलत बताया, तो ठगों ने उन्हें धमकी दी कि यदि वे दो घंटे के भीतर दिल्ली नहीं पहुंचीं, तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इसके बाद खुद को CBI अधिकारी बताने वाले अन्य लोगों ने भी उनसे संपर्क किया और पूरे मामले को “आधिकारिक जांच” का रूप देकर उन्हें डराया।
इस दौरान साइबर ठगों ने लगातार दबाव बनाते हुए उन्हें “डिजिटल अरेस्ट” की स्थिति में रखा, यानी उन्हें मानसिक रूप से यह विश्वास दिलाया गया कि वे पुलिस की निगरानी में हैं और किसी भी समय गिरफ्तार हो सकती हैं। इसी डर का फायदा उठाकर ठगों ने अलग-अलग चरणों में उनसे बड़ी रकम वसूल ली।
लगातार 33 दिनों तक चले इस स्कैम में ठगों ने अलग-अलग बहानों से उनसे कुल 1.57 करोड़ रुपये की ठगी की। पीड़िता को इस दौरान किसी से बात करने या बाहर जाने से भी रोका गया और उन्हें पूरी तरह मानसिक दबाव में रखा गया।
मामले का खुलासा तब हुआ जब पीड़िता को संदेह हुआ और उन्होंने परिजनों को जानकारी दी। इसके बाद उन्होंने ग्वालियर क्राइम ब्रांच में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और साइबर सेल की मदद से कॉल डिटेल्स और बैंक ट्रांजैक्शन की जांच की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह “डिजिटल अरेस्ट” स्कैम का एक गंभीर उदाहरण है, जिसमें अपराधी लोगों को डराकर और सरकारी एजेंसियों का नाम लेकर ठगी करते हैं। इस तरह के मामलों में पीड़ितों को मानसिक रूप से नियंत्रित कर उनसे बड़ी रकम ऐंठी जाती है।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी सरकारी एजेंसी की ओर से इस तरह की गिरफ्तारी या पूछताछ फोन पर नहीं की जाती। ऐसे मामलों में लोगों को सतर्क रहने और तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करने की सलाह दी गई है।
फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क की पहचान करने में जुटी है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह कॉल्स कहां से किए गए और पैसे किस खाते में ट्रांसफर हुए।
कुल मिलाकर, ग्वालियर का यह मामला एक बार फिर साइबर ठगी के बढ़ते खतरे और “डिजिटल अरेस्ट” जैसे नए तरीकों से होने वाली धोखाधड़ी की गंभीरता को उजागर करता है।





