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स्कूली छात्रों के लिए अच्छी खबर, विद्यार्थी विज्ञान मंथन के रजिस्ट्रेशन की तारीख 15 अक्टूबर तक बढ़ी

इंदौर। विज्ञान में रुचि रखने वाले इंदौर के स्कूली छात्रों के लिए अच्छी खबर है। प्रमुख इंजीनियरिंग संस्थान श्री जी. एस. इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (SGSITS) ने ‘विद्यार्थी विज्ञान मंथन’ (VVM) 2026-27 के लिए पंजीकरण की अंतिम तारीख बढ़ाकर 15 अक्टूबर 2026 कर दी है। इस फैसले से उन विद्यार्थियों को भी राष्ट्रीय स्तर के इस प्रतिभा खोज कार्यक्रम से जुड़ने का अवसर मिलेगा, जो अब तक किसी कारण से पंजीकरण नहीं करा पाए थे।
विद्यार्थी विज्ञान मंथन का आयोजन विज्ञान भारती (VIBHA), राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) तथा नेशनल काउंसिल ऑफ साइंस म्यूजियम्स (NCSM) द्वारा किया जा रहा है। यह राष्ट्रीय स्तर का टैलेंट सर्च कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य स्कूली विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, तार्किक क्षमता, जिज्ञासा और अनुसंधान के प्रति रुचि विकसित करना है।
इस कार्यक्रम में कक्षा 6 से 11 तक के विद्यार्थी भाग ले सकते हैं। इंदौर के स्कूली छात्रों के लिए यह अपनी वैज्ञानिक प्रतिभा दिखाने और विज्ञान को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित रखने के बजाय व्यावहारिक नजरिए से समझने का अवसर है। पंजीकरण की तारीख बढ़ने से ज्यादा से ज्यादा विद्यार्थियों की भागीदारी की उम्मीद की जा रही है।
विद्यार्थी विज्ञान मंथन के तहत छात्रों की विज्ञान से जुड़ी समझ के साथ उनकी विश्लेषणात्मक क्षमता और समस्या समाधान कौशल को भी प्रोत्साहित किया जाता है। इसका मकसद बच्चों को केवल सवालों के जवाब याद कराने के बजाय उनमें यह समझ विकसित करना है कि किसी वैज्ञानिक तथ्य के पीछे कारण क्या है और किसी समस्या का तार्किक समाधान किस तरह निकाला जा सकता है।
SGSITS के प्रोफेसरों ने इंदौर के स्कूली छात्रों को इस कार्यक्रम से जोड़ने और उनकी वैज्ञानिक सोच विकसित करने के लिए विशेष लाइव इंटरैक्टिव सत्र आयोजित किए। इन सत्रों की खासियत यह रही कि विद्यार्थियों को केवल पारंपरिक व्याख्यान सुनाने के बजाय सीधे गतिविधियों में शामिल किया गया।
फैकल्टी सदस्यों ने छात्रों के सामने ‘विज्ञान बनाम मिथक’ जैसे विषयों पर बहस की चुनौती रखी। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को किसी बात को केवल सुनकर स्वीकार करने के बजाय वैज्ञानिक प्रमाण और तर्क के आधार पर उसका विश्लेषण करने के लिए प्रेरित करना था। छात्रों ने अलग-अलग धारणाओं पर सवाल उठाए और वैज्ञानिक नजरिए से उनके पीछे की सच्चाई समझने का प्रयास किया।
इसके अलावा विद्यार्थियों को 60 सेकंड में हल करने वाली विश्लेषणात्मक समस्याएं भी दी गईं। सीमित समय में समस्या को समझकर उसका समाधान खोजने की इन गतिविधियों के माध्यम से छात्रों की त्वरित सोच और निर्णय क्षमता को परखने तथा विकसित करने का प्रयास किया गया।
सत्र में खुले सवाल-जवाब की व्यवस्था भी रखी गई। इसमें विद्यार्थियों को बिना किसी झिझक के विज्ञान से जुड़े सवाल पूछने के लिए प्रोत्साहित किया गया। प्रोफेसरों ने छात्रों की जिज्ञासाओं का जवाब देते हुए उन्हें बताया कि विज्ञान की शुरुआत ही सवाल पूछने से होती है। किसी घटना के पीछे ‘क्यों’ और ‘कैसे’ तलाशने की आदत वैज्ञानिक सोच का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
SGSITS की इस पहल का प्रमुख उद्देश्य स्कूली छात्रों को उच्च शिक्षा संस्थानों के शिक्षकों और वैज्ञानिक सोच से सीधे जोड़ना रहा। आमतौर पर स्कूल स्तर पर विद्यार्थी विज्ञान को पाठ्यक्रम, परीक्षा और अंकों से जोड़कर देखते हैं। इंटरैक्टिव गतिविधियों के जरिए उन्हें यह समझाने की कोशिश की गई कि विज्ञान रोजमर्रा की जिंदगी में मौजूद समस्याओं को समझने और उनका समाधान खोजने का माध्यम भी है।
विद्यार्थी विज्ञान मंथन जैसे कार्यक्रम उन छात्रों के लिए विशेष रूप से उपयोगी हो सकते हैं, जो भविष्य में विज्ञान, इंजीनियरिंग, चिकित्सा, अनुसंधान या तकनीक से जुड़े क्षेत्रों में आगे बढ़ना चाहते हैं। कम उम्र में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित होने से छात्रों को आगे की पढ़ाई में समस्याओं को समझने और नए विचार विकसित करने में मदद मिल सकती है।
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू रिसर्च के प्रति विद्यार्थियों में रुचि पैदा करना भी है। शोध केवल बड़ी प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं होता, बल्कि किसी सामान्य समस्या के बारे में सवाल पूछना, उसके कारणों को समझना, उपलब्ध तथ्यों का अध्ययन करना और परिणाम निकालना भी शोध प्रक्रिया का हिस्सा है। इसी सोच को स्कूली स्तर पर मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।
इंदौर में आयोजित मार्गदर्शन सत्रों के दौरान छात्रों को विज्ञान को लेकर खुलकर सोचने के लिए प्रेरित किया गया। ‘विज्ञान बनाम मिथक’ जैसी गतिविधियां विद्यार्थियों को तथ्य और धारणा के बीच अंतर समझने में मदद करती हैं। वहीं कम समय में विश्लेषणात्मक समस्याओं को हल करने की चुनौती उनमें आत्मविश्वास और तार्किक क्षमता विकसित करने का माध्यम बन सकती है।
कक्षा 6 से 11 तक का समय विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी दौरान छात्र अपनी रुचियों को पहचानना शुरू करते हैं और भविष्य के विषयों तथा करियर को लेकर सोच विकसित करते हैं। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर के विज्ञान प्रतिभा कार्यक्रम में भागीदारी उन्हें अपनी क्षमताओं को पहचानने का अवसर दे सकती है।
रजिस्ट्रेशन की अंतिम तारीख 15 अक्टूबर तक बढ़ाए जाने के बाद अब उन स्कूलों और विद्यार्थियों को अतिरिक्त समय मिल गया है, जो अभी तक प्रक्रिया पूरी नहीं कर सके थे। स्कूल स्तर पर भी विद्यार्थियों को कार्यक्रम के बारे में जानकारी देकर अधिक से अधिक भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।
विद्यार्थी विज्ञान मंथन की विशेषता यह है कि इसमें वैज्ञानिक ज्ञान के साथ भारतीय विज्ञान परंपरा और वैज्ञानिक उपलब्धियों को समझने का अवसर भी मिलता है। राष्ट्रीय स्तर के इस मंच के जरिए प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को अपनी क्षमता प्रदर्शित करने का मौका मिलता है।
SGSITS के प्रोफेसरों की सक्रिय भागीदारी ने इंदौर के विद्यार्थियों के लिए कार्यक्रम को और संवादात्मक बनाया है। लाइव सेशन में सीधे सवाल पूछने, बहस करने और समस्याएं हल करने का मौका मिलने से छात्रों को पारंपरिक कक्षा से अलग अनुभव मिला।
फिलहाल VVM 2026-27 के लिए पंजीकरण की अंतिम तारीख 15 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है। ऐसे में कक्षा 6 से 11 तक के विज्ञान में रुचि रखने वाले छात्रों के पास राष्ट्रीय प्रतिभा खोज कार्यक्रम में शामिल होने का अतिरिक्त मौका है। वैज्ञानिक जिज्ञासा, तार्किक सोच और शोध के प्रति रुचि विकसित करने के उद्देश्य से आयोजित यह कार्यक्रम इंदौर के विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा पहचानने और राष्ट्रीय स्तर पर उसे प्रदर्शित करने का मंच प्रदान कर सकता है।





