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Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : पंजाब नेशनल बैंक की कैंटोनमेंट ब्रांच में एक बड़े गोल्ड लोन फ्रॉड का मामला सामने आया है, जिसमें कथित तौर पर नकली सोना गिरवी रखकर करीब 43 लाख रुपये का कर्ज लिया गया। इस मामले ने बैंकिंग सिस्टम में सुरक्षा और जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, यह मामला तब उजागर हुआ जब ब्रांच मैनेजर ने कुछ संदिग्ध लोन खातों की पहचान की और तुरंत आंतरिक जांच (इंटरनल ऑडिट) के आदेश दिए। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि कई ग्राहकों ने बैंक से गोल्ड लोन लेने के लिए नकली सोने के गहने गिरवी रखे थे।
अधिकारियों के मुताबिक, कुल 13 ग्राहकों ने इस धोखाधड़ी में हिस्सा लिया और नकली सोने को असली बताकर बैंक से लोन प्राप्त किया। समय पर लोन की किस्तें न चुकाने के कारण इन खातों पर शक और गहरा गया, जिसके बाद बैंक ने विस्तृत जांच शुरू की।
जांच में यह स्पष्ट हुआ कि गिरवी रखे गए कई गहने असली सोने के मानकों पर खरे नहीं उतरते थे। इसके बाद बैंक ने सभी संदिग्ध खातों को गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (Non-Performing Asset - NPA) के रूप में वर्गीकृत कर दिया।
बैंक सूत्रों का कहना है कि यह मामला आंतरिक नियंत्रण प्रणाली की मजबूती और लोन अप्रूवल प्रक्रिया की समीक्षा की आवश्यकता को दर्शाता है। फिलहाल बैंक ने सभी संबंधित खातों की गहन जांच शुरू कर दी है और धोखाधड़ी में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि लोन प्रक्रिया के दौरान सोने की शुद्धता और मूल्यांकन को लेकर जो मानक अपनाए जाते हैं, उनकी दोबारा समीक्षा की जाएगी ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
इस घटना के बाद बैंकिंग सेक्टर में सतर्कता बढ़ा दी गई है और अन्य शाखाओं में भी गोल्ड लोन खातों की जांच के निर्देश दिए गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि गोल्ड लोन जैसे सुरक्षित माने जाने वाले ऋण में भी फर्जीवाड़ा संभव है, यदि मूल्यांकन प्रक्रिया में लापरवाही बरती जाए। इसलिए मजबूत वेरिफिकेशन सिस्टम और नियमित ऑडिट बेहद जरूरी हैं।
बैंक प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और इस तरह की धोखाधड़ी को रोकने के लिए नए सुरक्षा उपाय लागू किए जाएंगे।





