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Singrauli सिंगरौली : इतिहास में गड़ाखाड़ की घटना काला दिन साबित हुई है. इस आगजनी की घटी घटना का दोषी कौन है? घटना के पूर्व ही कंपनी प्रबंधन को अंदेशा हो गया था. पुलिस बल उपलब्ध कराने की गुहार लगाई गई थी. फिर बल समय से उपलब्ध नही कराया गया. पुलिस इस मामले में फैल हो गई। पूरे घटनाक्रम की गतिविधि सीएम मोहन यादव तक पहुंची चुकी है.
अदाणी पावर प्लांट क्षेत्र गड़ाखाड़ में हुये बवाल सड़क दुर्घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणाों के द्वारा कंपनी के सिफ्ट बसों व कोल वाहनों में आग लगाना कहीं न कहीं सिंगरौली सुलग रही है. अदाणी कंपनी प्रबंधन को सड़क दुर्घटना में मौत की खबर के बाद जब गड़ाखाड़ में भीड़ एकत्रित होने लगी तो एहसास हो गया कि बवाल हो सकता है.
प्रबंधन ने तुरंत एक्सन में आया. एक साथ अपने वर्करोंं को सिफ्ट बसों में बैठाकर टाउनशिप बैढ़न के लिए रवाना किया गया। जैसे ही कंपनी की कई बसें गड़ाखाड़ पहुंची तो पहले से ही चौराहे पर आक्रोशित भीड़ ने बसों में बैठे कर्मचारियों के साथ मारपीट कर खदेड़ने लगे.
अपनी जान बचाते हुये वर्कर बस से उतर कर भागने लगे। बताया जाता है कि तकरीबन आधा दर्जन बस और चार हाईवा वाहन धू-धूकर जल गये। सड़क हादसे में युवको की मौत और आगजनी की घटना की बीच 4 घंटे का अंतराल रहा. यदि सड़क हादसा होने के बाद ही पुलिस शव को उठाकर इस मामले में बे-फिक्र नही होती और एक्सन में आ जाती और इस मामले को गंभीरता से लेती तो शायद इस आगजनी घटना को रोका जा सकता था.
इतना ही नही पुलिस की लापरवाही तब हद हो गई जब कंपनी प्रबंधन 100 पुलिस वाहन व पुलिस बल की मांग करती रही. इसके बावजूद पुलिस प्रशासन मामले को लेकर संजीदगी नही दिखाई. नतीजा आक्रोशित भीड़ ने न केवल पुलिस कर्मियों और कंपनी के कर्मचारियों के साथ बदसलूकी, बल्कि कई वाहनों को भी फूंक दिये. वही आज कोलवाहन परिवहन पूरी तरह बन्द रहा.
ट्रांसपोर्टरों का नेताओं से जुड़ा है तार
बताया जाता है कि अदाणी कंपनी में कोल ट्रांसपोर्टर का कार्य करने वाले कारोबारियों का जनप्रतिनिधियों से तार जुड़ा हुआ है. हालात भी कुछ यही बया कर रहे हैं. घटना के तुरंत बाद पुलिस ने मृतको के परिजनों को बिना बुलाए शव को लेकर जिला अस्पताल पहुंच गये. ऐसा नही है कि इस तरह का यह पहला सड़क हादसा है.
पहले भी हुये हैं। लेकिन जब सड़क हादसे होते हैं तो परिजनों को बुलाया जाता है. उसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जाता है. लेकिन इस सड़क हादसे में पुलिस ने मानवीयता को दरकिनार कर दण्डे के हनक में शव को सिर्फ इस लिये उठाया कि जिस ट्रांसपोर्टर का वाहन था वह जनप्रतिनिधि से जुड़ा हुआ था और पुलिस उसे खुश करने के लिए खुद ही जिम्मेदारी ले ली और फेल हो गई. हद तो तब हो गई जब स्थल पर जिम्मेदार अधिकारी 5 घंटे बाद मौके पर पहुंच रहे हैं। इस सब की खबर सीएम तक पहुंच चुकी है.
डेंजर जोन पर पेट्रोलिंग क्यों नही?
करीब 8 साल पहले तत्कालीन कलेक्टर व एसपी ने टेक्रिकल टीम से भागौलिक स्थिति को हैवी वाहन चलने के लिए उपयुक्त नही पाया था. उस दौरान इंजीनियरों ने रजमिलान से लेकर गड़ाखाड़, सुहिरा, अमिलिया इलाका डेंजर जोन बताया था। लेकिन 8 वर्ष बीत गये इसके बावजूद जिले के जिम्मेदार अधिकारी अमिलिया सड़क मार्ग को लेकर न तो कोई नई रूप रेखा बनाई.
यही वजह है कि हादसे पर विराम नही लग रहा है। इन स्थलों पर कंपनी प्रबंधन पुलिस की पेट्रोलिंग की मांग कई बार कर चुका है. लेकिन पुलिस के जिम्मेदार अधिकारी डेंजर जोन एरिया पर पेट्रोलिंग नही कराते हैं. जबकि यातायात व्यवस्था को लेकर स्पीड गर्वनर का पालन और सांकेतिक चिन्ह जैसे अहम पहलू हैं। इसपर डीएमएफ फण्ड खर्च होना चाहिए. लेकिन अन्य मदों में खर्च कर कमीशन में बदनाम हो रहे हैं.
दहशत में पावर प्लांट के कर्मचारी
सड़क हादसे में दो की मौत और हुई आगजनी की घटना के बाद अदाणी कंपनी के कर्मचारियों में दहशत का माहौल है। चर्चा है कि आगजनी के घटना के बाद कंपनी प्रबंधन आनन-फानन में सिफ्ट खत्म होने वाले कर्मचारियों को बसों से टाउनशिप बैढ़न के लिए रवाना किया.
जैसे ही बस गड़ाखाड़ पहुंची आक्रोशित भीड़ ने बस को रोकवा लिये। भीड़ का रौद्र रूप देखकर बस चालक कर्मचारियों को बस के अन्दर ही छोड़ अपने गेट से बाहर खुद गया। हाईड्रोलिक बस होने से मुख्य गेट नही खुला तो वर्करों ने खिड़की का शीशा तोड़कर अपनी जान बचाते हुये भागना शुरू किये.
चर्चा है कि इस दौरान आधा सैकड़ा लोगों के साथ गुस्साएं लोगों ने मारपीट करते हुये जमकर बवाल काटा. ग्रामीणों के तेवर देख कर्मचारी दहशत में हैं। बताया जा रहा है कि घटना के बाद जो कर्मचारी कंपनी में काम कर रहे थे. उन्हें वही रहने-खाने की व्यवस्था दी गई है. ताकी कर्मचारियों के साथ किसी प्रकार की कोई अनहोनी न हो. चर्चा है कि आज पुलिस की देख-रेख में सिर्फ एक बस कर्मचारियों को लेकर गई है.
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