मध्य प्रदेश

फ्यूल बचत अभियान: अधिकारी साइकिल-ई-स्कूटर से पहुंचे दफ्तर

Kavita2
17 May 2026 11:19 AM IST
फ्यूल बचत अभियान: अधिकारी साइकिल-ई-स्कूटर से पहुंचे दफ्तर
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Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की देशवासियों से फ्यूल की खपत कम करने की अपील के बाद जिला प्रशासन ने ऊर्जा संरक्षण और ईंधन बचत को लेकर कई ठोस कदम उठाए हैं। इस अभियान के तहत प्रशासनिक अधिकारियों ने स्वयं आगे बढ़कर उदाहरण पेश किया और लोगों को भी वैकल्पिक परिवहन साधनों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

जिले में एडिशनल कलेक्टर जेपी यादव ने फ्यूल बचत अभियान के तहत साइकिल से अपने कार्यालय पहुंचकर एक संदेश दिया कि छोटे-छोटे कदम भी बड़ी बचत का कारण बन सकते हैं। उनकी इस पहल को प्रशासनिक हलकों में सराहा जा रहा है।

इसी क्रम में सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट रामबाबू देवांगन ने पेट्रोल से चलने वाली चारपहिया वाहन की जगह ई-स्कूटर का उपयोग कर दफ्तर पहुंचने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग से न केवल ईंधन की बचत होती है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलती है।

प्रशासनिक अधिकारियों ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे जहां तक संभव हो, सक्रिय परिवहन (एक्टिव ट्रांसपोर्ट) जैसे पैदल चलना और साइकिल का उपयोग करें या फिर सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दें। अधिकारियों का कहना है कि इससे न केवल फ्यूल की खपत कम होगी, बल्कि शहरों में ट्रैफिक और प्रदूषण की समस्या में भी सुधार आएगा।

जिला कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने इस संबंध में सख्त निर्देश जारी किए हैं कि सभी अधिकारी सरकारी कार्यों के लिए केवल सरकारी वाहनों का ही उपयोग करें। उन्होंने कहा कि निजी वाहनों के अनावश्यक उपयोग को हतोत्साहित किया जाना चाहिए और प्रशासन को इस दिशा में अनुशासन का पालन सुनिश्चित करना होगा।

कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट किया कि यह अभियान केवल प्रशासनिक आदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे जनभागीदारी के साथ एक व्यापक आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि फ्यूल की बचत आज की आवश्यकता है, जिससे आर्थिक और पर्यावरणीय दोनों स्तरों पर लाभ मिलेगा।

इस पहल के तहत विभिन्न विभागों में भी जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, जिसमें कर्मचारियों को ऊर्जा संरक्षण और वैकल्पिक परिवहन के लाभों के बारे में जानकारी दी जा रही है। प्रशासन का मानना है कि यदि अधिकारी स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करेंगे तो आम जनता भी इसे अपनाने के लिए प्रेरित होगी।

स्थानीय स्तर पर इस पहल को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है और लोग इसे एक जिम्मेदार प्रशासनिक कदम के रूप में देख रहे हैं। कई नागरिक संगठनों ने भी इस अभियान की सराहना की है और इसे आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

कुल मिलाकर, फ्यूल बचत और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में जिला प्रशासन द्वारा उठाए गए ये कदम न केवल प्रतीकात्मक हैं, बल्कि यह एक व्यवहारिक बदलाव की ओर संकेत करते हैं, जिसका असर आने वाले समय में व्यापक रूप से देखने को मिल सकता है।

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