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भोपाल। मध्य प्रदेश में चीता संरक्षण कार्यक्रम को एक और विस्तार मिलने जा रहा है। राज्य में अब चीतों को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व, जिसे नौरादेही के नाम से भी जाना जाता है, में बसाने की तैयारी शुरू हो गई है। श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क और मंदसौर-नीमच क्षेत्र में स्थित गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य के बाद नौरादेही राज्य में चीतों का तीसरा प्रमुख ठिकाना बनने जा रहा है।
चीता स्टीयरिंग कमेटी ने नौरादेही में चार चीतों को भेजने की मंजूरी दे दी है। योजना के तहत चीतों को चरणबद्ध तरीके से नए क्षेत्र में स्थानांतरित किया जाएगा। इस प्रक्रिया की शुरुआत 7 अक्टूबर से होगी। पहले चरण में कूनो नेशनल पार्क से एक नर चीता ‘ठोलो’ और एक मादा चीता ‘CCB-3’ को नौरादेही लाया जाएगा।
चीतों को नए आवास में बसाने की योजना का उद्देश्य राज्य में इस प्रजाति के संरक्षण के लिए उपलब्ध क्षेत्र का विस्तार करना है। एक ही क्षेत्र पर निर्भरता कम होने के साथ चीतों के लिए नए प्राकृतिक आवास विकसित करने की दिशा में भी यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नौरादेही बनेगा तीसरा चीता ठिकाना
मध्य प्रदेश में चीता संरक्षण की शुरुआत कूनो नेशनल पार्क से हुई थी। इसके बाद राज्य के मंदसौर-नीमच क्षेत्र में स्थित गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य को भी चीतों के लिए तैयार किया गया। अब नौरादेही में चीतों को बसाने की योजना बनाई गई है।
इस तरह मध्य प्रदेश में चीतों के लिए तीन बड़े प्राकृतिक आवास उपलब्ध होंगे। इससे संरक्षण कार्यक्रम को अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में फैलाने में मदद मिल सकती है।
नौरादेही का क्षेत्रफल और प्राकृतिक परिस्थितियां वन्यजीवों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। यहां पहले से विभिन्न वन्यजीव प्रजातियां मौजूद हैं। चीतों के लिए नए क्षेत्र के रूप में इसे विकसित करने से संरक्षण कार्यक्रम का दायरा बढ़ेगा।
7 अक्टूबर को आएगा पहला जोड़ा
नौरादेही में चीतों को बसाने की प्रक्रिया 7 अक्टूबर से शुरू होगी। पहले चरण में कूनो नेशनल पार्क से दो चीतों को स्थानांतरित किया जाएगा।
इनमें नर चीता ठोलो और मादा चीता CCB-3 शामिल हैं। दोनों चीतों को कूनो से नौरादेही लाने से पहले आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी।
नए स्थान पर पहुंचने के बाद चीतों को सीधे खुले जंगल में छोड़ने के बजाय उनकी निगरानी और अनुकूलन की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। नए वातावरण में उनके व्यवहार, स्वास्थ्य और गतिविधियों पर नजर रखना संरक्षण कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।
कुल चार चीते लाने की मंजूरी
चीता स्टीयरिंग कमेटी ने नौरादेही के लिए कुल चार चीतों को भेजने की मंजूरी दी है। शुरुआती चरण में दो चीतों को स्थानांतरित किया जाएगा, जबकि बाकी चीतों को योजना के अनुसार बाद में लाया जाएगा।
इससे नौरादेही में चीता आबादी विकसित करने की प्रक्रिया शुरू होगी। चीतों की संख्या बढ़ाने के साथ उनके लिए पर्याप्त शिकार आधार, पानी और सुरक्षित आवास सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा।
वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञों के लिए नए क्षेत्र में चीतों की गतिविधियों की निगरानी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी।
संरक्षण कार्यक्रम का बढ़ता दायरा
भारत में चीता संरक्षण कार्यक्रम का एक प्रमुख उद्देश्य इस प्रजाति की आबादी को फिर से स्थापित करना और उनके लिए उपयुक्त प्राकृतिक आवास विकसित करना है। मध्य प्रदेश इस कार्यक्रम का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
कूनो नेशनल पार्क में चीतों की मौजूदगी के बाद राज्य में दूसरे संभावित क्षेत्रों की पहचान की गई। गांधी सागर में भी चीतों को बसाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। अब नौरादेही को इस नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी है।
तीन अलग-अलग क्षेत्रों में चीतों की मौजूदगी से संरक्षण प्रयासों को व्यापक भौगोलिक आधार मिल सकता है।
प्राकृतिक आवास में निगरानी अहम
चीतों को एक नए क्षेत्र में स्थानांतरित करना केवल उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने तक सीमित नहीं होता। नए आवास में उनके व्यवहार और पर्यावरण के साथ तालमेल पर लगातार निगरानी की आवश्यकता होती है।
नौरादेही में पहुंचने के बाद चीतों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए निगरानी व्यवस्था का इस्तेमाल किया जाएगा। उनके स्वास्थ्य, भोजन, आवाजाही और अन्य वन्यजीवों के साथ उनके व्यवहार की जानकारी जुटाई जाएगी।
इसके साथ यह भी देखा जाएगा कि चीते नए क्षेत्र में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों के साथ किस तरह तालमेल बैठाते हैं।
वन्यजीवों के लिए बढ़ेगा संरक्षण क्षेत्र
नौरादेही में चीतों की बसाहट से मध्य प्रदेश के वन्यजीव संरक्षण क्षेत्र का विस्तार होगा। एक ही प्रजाति के संरक्षण के साथ इसका असर पूरे पारिस्थितिकी तंत्र पर भी पड़ सकता है।
चीता एक प्रमुख शिकारी प्रजाति है। किसी क्षेत्र में इसकी मौजूदगी वहां के वन्यजीव पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा बन सकती है। हालांकि इसके लिए शिकार प्रजातियों की पर्याप्त संख्या और आवास की सुरक्षा आवश्यक है।
नए क्षेत्र में चीतों को बसाने से पहले इन्हीं परिस्थितियों का आकलन किया जाता है।
कूनो से नौरादेही तक संरक्षण की कड़ी
कूनो नेशनल पार्क मध्य प्रदेश में चीता संरक्षण कार्यक्रम का सबसे चर्चित केंद्र रहा है। इसके बाद गांधी सागर को दूसरे प्रमुख स्थल के रूप में विकसित किया गया। अब नौरादेही को तीसरे ठिकाने के रूप में जोड़ने की योजना है।
कूनो से ठोलो और CCB-3 को नौरादेही लाने की शुरुआत इस पूरी योजना का पहला महत्वपूर्ण चरण होगी। इसके बाद बाकी दो चीतों को भी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार यहां लाया जाएगा।
इससे मध्य प्रदेश में चीता संरक्षण के लिए उपलब्ध आवासों की संख्या बढ़ जाएगी।
आगे की प्रक्रिया पर नजर
7 अक्टूबर से शुरू होने वाली स्थानांतरण प्रक्रिया के बाद नौरादेही में चीतों की निगरानी पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। वन विभाग के सामने चीतों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के साथ स्थानीय पारिस्थितिकी के साथ उनका संतुलन बनाए रखने की चुनौती होगी।
चीतों की गतिविधियों से मिलने वाले आंकड़े आगे की संरक्षण रणनीति बनाने में भी उपयोगी हो सकते हैं। इनके आधार पर भविष्य में और चीतों को इस क्षेत्र में लाने या संरक्षण व्यवस्था में बदलाव से जुड़े फैसले लिए जा सकते हैं।
फिलहाल चीता स्टीयरिंग कमेटी की मंजूरी के बाद नौरादेही में चीतों को बसाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। 7 अक्टूबर को ठोलो और CCB-3 के स्थानांतरण के साथ मध्य प्रदेश में चीता संरक्षण कार्यक्रम के तीसरे बड़े केंद्र की शुरुआत होगी। इसके बाद कुल चार चीतों को नौरादेही में बसाने की योजना है।





