मध्य प्रदेश

बारिश से भीगीं बच्चों की किताबें खुले मैदान में सुखाने को मजबूर

nidhi
3 Sept 2026 7:42 AM IST
बारिश से भीगीं बच्चों की किताबें खुले मैदान में सुखाने को मजबूर
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बच्चों की किताबें धूप में सुखाने के लिए बिछाईं

मध्य प्रदेश: धार जिले में स्कूली बच्चों के लिए रखी गई किताबें बारिश के पानी में भीगने का मामला सामने आया है। बारिश से गीली हुई बड़ी संख्या में किताबों को बाद में धूप में बिछाकर सुखाने की कोशिश की गई। बच्चों तक पहुंचने से पहले ही किताबों की ऐसी स्थिति सामने आने के बाद इनके रखरखाव और सुरक्षित भंडारण की व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक बच्चों को वितरण के लिए रखी गई किताबें बारिश और नमी की चपेट में आ गईं। पानी लगने के कारण किताबों के पन्ने भीग गए और उन्हें नुकसान पहुंचने की आशंका पैदा हो गई। किताबों को बचाने के लिए कर्मचारियों ने उन्हें बाहर निकालकर खुले स्थान पर धूप में अलग-अलग बिछा दिया ताकि उनमें जमा नमी दूर हो सके। एक साथ बड़ी संख्या में किताबें धूप में बिछी दिखाई देने के बाद मामला चर्चा में आ गया। ये किताबें विद्यार्थियों की पढ़ाई के लिए महत्वपूर्ण हैं और सरकारी स्तर पर बच्चों तक शैक्षणिक सामग्री पहुंचाने के लिए बड़ी व्यवस्था की जाती है। ऐसे में वितरण से पहले किताबों का बारिश में भीगना भंडारण व्यवस्था की तैयारियों पर सवाल खड़े करता है।
बरसात के मौसम में किताबों और अन्य शैक्षणिक सामग्री को सुरक्षित रखने के लिए सूखे और पानी से सुरक्षित स्थान की जरूरत होती है। यदि किताबों को ऐसे स्थान पर रखा जाए जहां बारिश का पानी या नमी पहुंच सकती है तो उनके खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। पानी लगने के बाद पन्ने आपस में चिपक सकते हैं जबकि छपाई और कागज की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है। किताबों को धूप में सुखाने से नमी कम की जा सकती है लेकिन ज्यादा पानी लगने की स्थिति में उन्हें पूरी तरह पहले जैसी स्थिति में लाना मुश्किल हो सकता है। खासकर बच्चों को दी जाने वाली नई किताबों के मामले में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि वे पढ़ने योग्य और अच्छी स्थिति में हों।
मामला सामने आने के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि किताबें किस स्थान पर रखी गई थीं और वहां बारिश से बचाव के पर्याप्त इंतजाम थे या नहीं। यदि किसी गोदाम या वितरण केंद्र में किताबें रखी गई थीं तो वहां पानी कैसे पहुंचा इसकी जांच भी महत्वपूर्ण हो जाती है। साथ ही यह पता लगाया जाना जरूरी है कि कितनी किताबें प्रभावित हुई हैं और उनमें से कितनी अब भी विद्यार्थियों को बांटने की स्थिति में हैं।
सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के लिए पाठ्यपुस्तकें पढ़ाई का मुख्य आधार होती हैं। कई परिवार बच्चों के लिए अलग से बाजार से किताबें खरीदने की स्थिति में नहीं होते। इसलिए सरकारी स्तर पर उपलब्ध कराई जाने वाली किताबों का समय पर और सुरक्षित तरीके से बच्चों तक पहुंचना बेहद महत्वपूर्ण है। बारिश के दौरान किताबों के भीगने जैसी घटनाओं को रोकने के लिए भंडारण केंद्रों में पहले से तैयारी की आवश्यकता होती है। किताबों को जमीन से ऊपर सुरक्षित स्थान पर रखने के साथ छत में रिसाव और पानी के प्रवेश की संभावना की जांच की जानी चाहिए। बरसात शुरू होने से पहले गोदामों का निरीक्षण भी ऐसी घटनाओं को रोकने में मदद कर सकता है।
इस घटना के बाद प्रभावित किताबों की स्थिति का आकलन करना भी जरूरी होगा। जो किताबें पूरी तरह खराब हो चुकी हैं उन्हें विद्यार्थियों को देने के बजाय उनके स्थान पर नई किताबों की व्यवस्था की जानी चाहिए। वहीं जिन किताबों को सुखाने के बाद इस्तेमाल किया जा सकता है उनकी भी गुणवत्ता जांची जानी चाहिए।
बच्चों की शिक्षा से जुड़ी सामग्री के रखरखाव में लापरवाही का सीधा असर विद्यार्थियों पर पड़ सकता है। किताबें समय पर नहीं मिलने या खराब स्थिति में मिलने से पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका रहती है। ऐसे में संबंधित विभाग से यह अपेक्षा की जाती है कि पाठ्यपुस्तकों के भंडारण से लेकर वितरण तक हर स्तर पर निगरानी रखी जाए। धार में बारिश में भीगी किताबों को धूप में सुखाने का मामला फिलहाल चर्चा में है। घटना ने एक बार फिर सरकारी शैक्षणिक सामग्री के सुरक्षित भंडारण की आवश्यकता को सामने रखा है। अब संबंधित स्तर पर यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा कि प्रभावित बच्चों को खराब किताबें न मिलें और जरूरत पड़ने पर उनके लिए नई पाठ्यपुस्तकों की व्यवस्था की जाए।

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