मध्य प्रदेश

7 साल की मेहनत से खोदा कुआं, सागर के किसान ने बदली गांव की तस्वीर

Kavita2
5 Aug 2026 4:11 PM IST
7 साल की मेहनत से खोदा कुआं, सागर के किसान ने बदली गांव की तस्वीर
x

सागर। कहते हैं कि दृढ़ इच्छाशक्ति और प्यार के सामने बड़ी से बड़ी मुश्किल भी छोटी पड़ जाती है। मध्य प्रदेश के सागर जिले में एक 71 वर्षीय आदिवासी किसान ने अपनी मेहनत और संकल्प से इस बात को सच कर दिखाया है। पत्नी के साथ हुए कथित अपमान से आहत होकर उन्होंने अकेले अपने दम पर सात साल तक मेहनत की और एक कुआं खोद डाला, जो आज गर्मी के दिनों में पूरे गांव के लिए पानी का सहारा बना हुआ है।

इस किसान की कहानी बिहार के प्रसिद्ध ‘माउंटेन मैन’ दशरथ मांझी की याद दिलाती है, जिन्होंने अपनी पत्नी की मौत के बाद पहाड़ काटकर रास्ता बना दिया था। उसी तरह सागर जिले के इस किसान ने भी अपनी पत्नी की परेशानी को दूर करने के लिए एक ऐसा काम कर दिखाया, जिसकी चर्चा अब पूरे इलाके में हो रही है।

जानकारी के अनुसार, सागर जिले के एक आदिवासी गांव में रहने वाले इस किसान ने यह कदम तब उठाया, जब उनकी पत्नी को पानी लाने के दौरान एक निजी कुएं पर कथित तौर पर अपमानित किया गया था। पानी जैसी मूलभूत जरूरत के लिए पत्नी को परेशानी झेलनी पड़ी, यह बात किसान के मन को छू गई और उन्होंने गांव में अपना कुआं बनाने का फैसला किया।

इसके बाद उन्होंने फावड़ा और अन्य साधारण औजारों की मदद से खुद ही कुआं खोदना शुरू कर दिया। शुरुआत में लोगों को उनका यह फैसला मुश्किल और असंभव लगा, लेकिन किसान अपने संकल्प पर डटे रहे। उन्होंने लगातार सात वर्षों तक मेहनत की और आखिरकार जमीन के अंदर से पानी निकालने में सफल रहे।

7 साल ,मेहनत ,खोदा कुआं, सागर ,की यह मेहनत अब गांव के लोगों के लिए वरदान साबित हो रही है। भीषण गर्मी के महीनों में जब कई इलाकों में पानी की कमी हो जाती है, तब यह कुआं ग्रामीणों की जरूरत पूरी करने में मदद करता है। स्थानीय लोगों के लिए यह सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि मेहनत, आत्मसम्मान और दृढ़ निश्चय का प्रतीक बन गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि किसान ने जिस लगन और धैर्य के साथ यह काम पूरा किया, वह प्रेरणादायक है। उन्होंने बिना किसी बड़ी मशीन या सरकारी सहायता के वर्षों तक मेहनत करके ऐसा काम किया, जिससे आज कई लोगों को फायदा मिल रहा है।

यह घटना ग्रामीण भारत की उस भावना को भी दर्शाती है, जहां लोग अपनी समस्याओं का समाधान खोजने के लिए कठिन परिस्थितियों में भी प्रयास करते हैं। पानी जैसी बुनियादी जरूरत के लिए किया गया यह प्रयास न केवल परिवार के लिए था, बल्कि धीरे-धीरे पूरे समुदाय के लिए उपयोगी साबित हुआ।

किसान की कहानी अब इलाके में चर्चा का विषय बन गई है। लोग उनके जज्बे और मेहनत की सराहना कर रहे हैं। उनका कहना है कि उम्र के इस पड़ाव पर भी उन्होंने जो हिम्मत दिखाई, वह युवाओं के लिए भी प्रेरणा है।

जल संकट आज देश के कई ग्रामीण इलाकों की बड़ी समस्या है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर किए गए इस तरह के प्रयास लोगों को आत्मनिर्भर बनने का संदेश देते हैं। हालांकि, स्थायी जल प्रबंधन के लिए सरकारी योजनाओं और सामुदायिक भागीदारी की भी जरूरत होती है।

सागर के इस आदिवासी किसान की कहानी यह बताती है कि किसी भी बदलाव की शुरुआत एक छोटे से संकल्प से हो सकती है। पत्नी के सम्मान और परिवार की जरूरत से शुरू हुआ उनका प्रयास आज पूरे गांव के लिए राहत का कारण बन चुका है।

सात साल की कठिन मेहनत के बाद खोदा गया यह कुआं अब उनकी लगन और प्रेम की मिसाल बन गया है। यह कहानी साबित करती है कि मजबूत इच्छाशक्ति और मेहनत के आगे बड़ी से बड़ी चुनौती को भी पार किया जा सकता है।

Next Story