मध्य प्रदेश

जंक फूड से बच्चों के दांतों में बढ़ रही सड़न, ‘पेडोमैटिक्स’ कार्यशाला में विशेषज्ञों ने जताई चिंता

Kavita2
7 Oct 2026 10:20 AM IST
जंक फूड से बच्चों के दांतों में बढ़ रही सड़न, ‘पेडोमैटिक्स’ कार्यशाला में विशेषज्ञों ने जताई चिंता
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इंदौर। बच्चों में बढ़ती जंक फूड की आदत और उसके कारण दांतों में तेजी से बढ़ रही सड़न पर विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। मंगलवार को सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में आयोजित छठी वार्षिक संयुक्त कार्यशाला ‘पेडोमैटिक्स’ में बाल दंत चिकित्सा देखभाल, आधुनिक उपचार तकनीकों और बच्चों के इलाज से जुड़ी नई चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने कहा कि बच्चों में दांतों की समस्याएं केवल इलाज का विषय नहीं रह गई हैं, बल्कि समय रहते रोकथाम पर ध्यान देना अब अधिक जरूरी हो गया है।

कार्यशाला का आयोजन इंडियन डेंटल एसोसिएशन यानी आईडीए की इंदौर शाखा और सरकारी डेंटल कॉलेज एवं अस्पताल के बाल चिकित्सा एवं निवारक दंत चिकित्सा विभाग द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। कार्यक्रम में बाल दंत चिकित्सा से जुड़े विशेषज्ञों, डॉक्टरों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य बच्चों के लिए दंत चिकित्सा उपचार को अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक और कम डरावना बनाना था।

विशेषज्ञों ने बताया कि आज के समय में बच्चों के खान-पान में बड़ा बदलाव आया है। चॉकलेट, कैंडी, मीठे पेय, पैकेज्ड स्नैक्स और अन्य जंक फूड का सेवन बढ़ने से दांतों में कैविटी और सड़न के मामले बढ़ रहे हैं। कई बच्चे दिनभर में बार-बार मीठी या चिपचिपी चीजें खाते हैं, जिससे दांतों पर बैक्टीरिया तेजी से सक्रिय होते हैं और दांतों की ऊपरी परत को नुकसान पहुंचता है।

कार्यशाला में यह भी बताया गया कि समस्या केवल जंक फूड तक सीमित नहीं है। सही तरीके से ब्रश न करना, रात में बिना ब्रश किए सो जाना, नियमित डेंटल चेकअप से दूरी और छोटे बच्चों में दांतों की देखभाल को लेकर लापरवाही भी बड़ी वजह हैं। विशेषज्ञों ने माता-पिता से अपील की कि बच्चों के दांत निकलने के शुरुआती दौर से ही उनकी सफाई और देखभाल पर ध्यान दिया जाए।

कार्यक्रम के दौरान निवारक दंत चिकित्सा पर विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि अगर बच्चों को शुरू से ही सही ब्रशिंग तकनीक, संतुलित खान-पान और नियमित जांच की आदत डाली जाए तो दांतों की कई समस्याओं को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सकता है। इससे बाद में जटिल और दर्दनाक उपचार की जरूरत भी कम हो सकती है।

‘पेडोमैटिक्स’ कार्यशाला में बाल दंत चिकित्सा की आधुनिक तकनीकों पर भी चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि बच्चों का इलाज सामान्य वयस्क मरीजों से अलग तरीके से करना पड़ता है। छोटे बच्चे अक्सर डेंटल चेयर, मशीनों की आवाज और इंजेक्शन जैसी चीजों से डरते हैं। ऐसे में डॉक्टरों के लिए केवल तकनीकी दक्षता ही नहीं, बल्कि बच्चों के मनोविज्ञान को समझना भी जरूरी है।

बच्चों में डर कम करने के लिए व्यवहार प्रबंधन तकनीक, सरल भाषा में समझाना, इलाज से पहले उपकरणों से परिचित कराना और माता-पिता की भूमिका को संतुलित रखना महत्वपूर्ण बताया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि जब बच्चा डॉक्टर पर भरोसा करने लगता है तो उपचार आसान और अधिक प्रभावी हो जाता है।

कार्यशाला में समकालीन तकनीकों के माध्यम से कम दर्द और कम समय में उपचार करने के तरीकों पर भी चर्चा की गई। आधुनिक उपकरणों और नई तकनीकों के उपयोग से कई प्रक्रियाओं को बच्चों के लिए अधिक सहज बनाया जा सकता है। खासतौर पर कैविटी, दांतों की सफाई और छोटे उपचारों में ऐसी तकनीकें बच्चों के अनुभव को बेहतर कर सकती हैं।

विशेषज्ञों ने बच्चों में दांतों की सड़न के शुरुआती संकेतों की पहचान पर भी जोर दिया। यदि दांतों पर सफेद या भूरे धब्बे दिखें, बच्चा ठंडा-गर्म खाने पर दर्द बताए, खाना चबाते समय परेशानी हो या मुंह से दुर्गंध आने लगे तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय रहते दंत चिकित्सक से सलाह लेने पर समस्या को गंभीर होने से रोका जा सकता है।

कार्यक्रम में इस बात पर भी चर्चा हुई कि बच्चों के दांतों की देखभाल केवल स्कूल जाने की उम्र से शुरू नहीं होनी चाहिए। दूध के दांत भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि वे बच्चों को सही तरीके से चबाने, बोलने और स्थायी दांतों के लिए जगह बनाए रखने में मदद करते हैं। इसलिए यह सोच गलत है कि दूध के दांत खराब भी हो जाएं तो कोई फर्क नहीं पड़ता।

विशेषज्ञों ने माता-पिता से बच्चों के भोजन में चीनी की मात्रा कम करने और प्राकृतिक खाद्य पदार्थों को बढ़ावा देने की सलाह दी। फलों, सब्जियों और संतुलित आहार के साथ पर्याप्त पानी पीने की आदत दांतों के लिए फायदेमंद मानी गई। इसके अलावा बच्चों को दिन में दो बार सही तरीके से ब्रश करने के लिए प्रेरित करने पर भी जोर दिया गया।

कार्यशाला में दंत चिकित्सा के विद्यार्थियों और युवा डॉक्टरों को बच्चों के इलाज के दौरान सुरक्षा मानकों और संवाद कौशल पर भी जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने कहा कि एक सफल बाल दंत चिकित्सक के लिए उपचार के साथ बच्चे और परिवार का भरोसा जीतना भी उतना ही जरूरी है।

‘पेडोमैटिक्स’ जैसी कार्यशालाओं का उद्देश्य नई तकनीकों और व्यावहारिक अनुभवों को साझा करना है, ताकि बाल दंत चिकित्सा सेवा को और बेहतर बनाया जा सके। बदलती जीवनशैली के बीच बच्चों में दांतों की समस्याएं जिस तेजी से बढ़ रही हैं, उसे देखते हुए रोकथाम और जागरूकता दोनों को मजबूत करना जरूरी माना गया।

कार्यशाला के अंत में विशेषज्ञों ने दोहराया कि बच्चों के दांतों की अच्छी सेहत की शुरुआत घर से होती है। सही खान-पान, नियमित ब्रशिंग, जंक फूड पर नियंत्रण और समय-समय पर दंत चिकित्सक से जांच कराने से बड़ी समस्याओं से बचा जा सकता है। ‘पेडोमैटिक्स’ कार्यशाला ने इसी संदेश के साथ आधुनिक बाल दंत चिकित्सा को सुरक्षित, सहज और निवारक बनाने पर जोर दिया।

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